विदाई से पहले मानसून का प्रहार, सितंबर में क्यों टूट पड़ा बारिश का कहर?

IMD ने सितंबर के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है. हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में तेज वर्षा और बाढ़ जैसी स्थिति देखी जा रही है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: IMD ने सितंबर के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है. हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में तेज वर्षा और बाढ़ जैसी स्थिति देखी जा रही है.

सितंबर यानी मानसून की विदाई का महीना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सितंबर शुरू होते ही बारिश खत्म हो जाती है. देश के कई हिस्सों में इस महीने भी अच्छी बारिश होती है, पिछले कुछ सालों के आंकड़े इसके गवाह हैं.

भारत में सितंबर में औसतन 167.9 मिलीमीटर बारिश होती है. 2023 में सितंबर में देशभर में 190 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 13 प्रतिशत ज्यादा थी. वहीं 2024 में भी सितंबर की बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत ज्यादा रही. यानी लगातार दो साल सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई.

हालांकि 2026 का सीन अलग है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि इस साल सितंबर में देशभर की कुल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. सितंबर की सामान्य बारिश 167.9 मिलीमीटर है, जबकि इस बार इसके करीब 91 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है.

कम बारिश का अनुमान, फिर भी तेज वर्षा

अब सवाल है कि अगर पूरे महीने की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है तो सितंबर की शुरुआत कुछ राज्यों में इतनी तेज बारिश से क्यों हुई? कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य शामिल हैं.

बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम वजह

दरअसल इसकी बड़ी वजह इस समय बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया है. जो पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है. इसके असर से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ी है. उत्तर भारत के कुछ हिस्से भी इसकी चपेट में हैं. यानी पूरे देश में मानसून मजबूत नहीं हुआ है, बल्कि एक खास मौसम सिस्टम कुछ इलाकों में बारिश को ज्यादा पॉवरफुल बना रहा है.

5 सितंबर तक कहां ज्यादा बारिश?

IMD के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में बारिश का असर ज्यादा रहेगा. दिल्ली-एनसीआर के साथ हरियाणा और चंडीगढ़ में भारी बारिश की संभावना है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है. खासकर उत्तराखंड के कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश का खतरा है.

वहीं मध्य भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में बारिश का असर देखने को मिलेगा. पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है.

पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय के साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी बारिश का दौर बना रहने की संभावना है. यानी सितंबर की शुरुआत में बारिश का असर किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है. उत्तर से लेकर मध्य और पूर्वी भारत तक कई राज्यों में भारी बारिश का खतरा है, पूर्वोत्तर में भी मौसम सक्रिय बना हुआ है.

पूरे महीने कम बारिश, फिर भी बाढ़ जैसी स्थिति क्यों?

यही इस बार के सितंबर की सबसे अहम बात है. पूरे देश का औसत बारिश का आंकड़ा किसी एक राज्य या जिले की तस्वीर नहीं बताता. मान लीजिए पूरे महीने देश में औसत बारिश कम रही, लेकिन किसी राज्य में दो-तीन दिन लगातार बहुत ज्यादा बारिश हो गई. वहां जलभराव, बाढ़ या सड़कें बंद होने जैसी स्थिति बन सकती है.

मौसम का यही बदलता पैटर्न अब ज्यादा दिखाई देता है. बारिश के दिनों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन जब बारिश होती है तो कम समय में ज्यादा पानी गिर सकता है. इसीलिए एक तरफ तो सितंबर में एक ओर सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, दूसरी ओर कुछ राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है.

असली बदलाव बारिश की मात्रा से ज्यादा उसके समय और जगह में दिखाई दे रहा है. एक तरफ पूरे महीने का आंकड़ा सामान्य से नीचे रह सकता है, दूसरी तरफ कुछ इलाकों में कुछ घंटों या कुछ दिनों में बहुत ज्यादा पानी गिर सकता है.

यानी सितंबर सिर्फ मानसून की विदाई का महीना नहीं है. इस महीने मानसून कमजोर जरूर पड़ता है, लेकिन जाते-जाते कई बार अपना तेज असर छोड़ जाता है, जैसा कि दिखाई दे रहा है.

Related Articles

Back to top button