“पेपर लीक के गुनाहगारों के घर बुलडोजर कब जाएगा, योगी जी?” -पूर्व मंत्री नरेंद्र वर्मा का सरकार पर बड़ा हमला

पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा ने पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला। फेसबुक लाइव में उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक विरोधियों पर बुलडोजर चलता है, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामलों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। सीतापुर की महमूदाबाद विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा ने फेसबुक लाइव के जरिए योगी सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बार-बार परीक्षाएं रद्द होने और पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि जब सरकार अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की बात करती है, तो पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध करने वालों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती।

“गरीब परिवार बच्चों को पढ़ाने के लिए जमीन तक बेच रहे”

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा आज सबसे ज्यादा निराश और परेशान है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जमीन, जेवर और वर्षों की जमा पूंजी तक दांव पर लगा देते हैं। लेकिन जब परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द होती हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं युवाओं को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गांवों और छोटे कस्बों के लाखों छात्र कठिन परिस्थितियों में तैयारी करते हैं, लेकिन सिस्टम की खामियों की वजह से उनका भविष्य अधर में लटक जाता है।

यूपी पुलिस भर्ती से लेकर RO-ARO तक कई परीक्षाओं का जिक्र

पूर्व मंत्री ने यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा 2024 का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 48 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, जिनमें से 43 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। लेकिन पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा दोबारा करानी पड़ी। उन्होंने यूपी टीईटी 2021, आरओ-एआरओ परीक्षा, लेखपाल भर्ती और पीईटी जैसी कई परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लाखों युवाओं का समय और मेहनत बर्बाद हुई है। नरेंद्र वर्मा ने कहा कि सिर्फ मुकदमा दर्ज कर देना काफी नहीं है। पेपर लीक कराने वाले गिरोहों और उनके नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

“राजनीतिक विरोधियों पर चलता बुलडोजर, पेपर लीक माफियाओं पर क्यों नहीं?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्हें “बुलडोजर बाबा” उनके समर्थक कहते हैं, वह खुद उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री और गोरखपुर मठ का महंत मानते हैं। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार बुलडोजर कार्रवाई को कानून व्यवस्था का प्रतीक मानती है, तो पेपर लीक कराने वालों के घरों तक बुलडोजर क्यों नहीं पहुंचता। उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर की कार्रवाई राजनीतिक विरोधियों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वालों के खिलाफ वैसी सख्ती नहीं दिखाई देती।

रोजगार के दावों पर भी उठाए सवाल

नरेंद्र सिंह वर्मा ने भाजपा सरकार के रोजगार संबंधी वादों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हर साल लाखों रोजगार देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात अलग दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अप्रेंटिसशिप और आउटसोर्सिंग को भी स्थायी रोजगार की तरह पेश किया जा रहा है। रोजगार मेलों में युवाओं को नौकरी के नाम पर अप्रेंटिसशिप के लिए भेजा जाता है और सरकार इसे अपनी उपलब्धि बताकर प्रचारित करती है।

“आउटसोर्सिंग व्यवस्था से श्रमिकों का हो रहा शोषण”

पूर्व मंत्री ने कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था ने श्रमिकों की स्थिति और कमजोर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम लेते हैं, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त वेतन मिलता है और न ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ। उन्होंने मांग की कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर कर्मचारियों को कम से कम संविदा पर नियुक्त किया जाए, ताकि श्रमिकों को न्यूनतम अधिकार और सुरक्षा मिल सके।

ट्रेड यूनियन अधिकारों पर भी सरकार को घेरा

नरेंद्र वर्मा ने सरकार पर श्रमिक हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि नई नीतियों के जरिए ट्रेड यूनियनों के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों की बजाय उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देना बन गई है। उन्होंने कहा कि लगातार बदलती नीतियों का असर मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है और आर्थिक असुरक्षा बढ़ती जा रही है।

युवाओं के मुद्दे पर बढ़ रही राजनीतिक बहस

प्रदेश में लगातार भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठते सवाल और बेरोजगारी का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। विपक्ष जहां इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा संकट बता रहा है, वहीं सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और दोषियों पर कार्रवाई का दावा करती रही है। हालांकि, पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा के इस बयान के बाद एक बार फिर पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट – वली चौधरी

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