ओम प्रकाश राजभर ने बढ़ाई NDA की टेंशन, बिहार में 29 सीटों पर बीजेपी को दिया झटका!

उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी सुभासपा... अब बिहार में भी दस्तक देने की तैयारी कर रही है.... पार्टी 29 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है....

4पीएम न्यूज नेटवर्कः उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार में सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर अब बिहार में भी अपनी राजनीति जमीन तैयार करने में जुट गए हैं….. पिछले काफी समय से उनकी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जमीन पर काम कर रहे हैं….. खुद ओम प्रकाश राजभर भी बिहार दौरे पर जाते रहते हैं….. पार्टी की नजर बिहार के पिछड़ा वर्ग के वोटरों पर हैं…… एनडीए की सहयोगी होने के नाते सुभासभा भी चुनाव की तैयारी में जुटी है….. बता दें कि बिहार चुनाव में ओम प्रकाश राजभर की मुस्तैदी ने एनडीए के टेंशन को बढ़ा दिया है…. राजभर बिहार में चुनाव लड़ते हैं…. तो इसका सीधा असर बीजेपी के वोटबैंक पर पड़ेगा…. राजभर की पार्टी बिहार के बीजेपी के ओबीसी, दलित, पिछड़ा समेत अन्य वर्गों के भी वोट बैंक में सेंधमारी करेगी…. जिसका परिणाम बीजेपी और जेडीयू दोनों को भुगतना पड़ेगा….

वहीं बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है…. भले ही अभी बिहार चुनाव में समय है… लेकिन सभी बड़े नेता राज्य का लगातार दौरा कर रहे हैं….. और नेता जनता के बीच पहुंचकर अपनी उपलब्धियां गिनाने से नहीं चूक रहे है…. सभी पार्टियां  चुनाव की तैयारी में जुटी हुई हैं…. ऐसे में ओम प्रकाश राजभर की एंट्री ने पूरा सियासी माहौल खराब कर दिया है….. और अपनी ही सहयोगी पार्टियों के वोट बैंक में सेंधमारी करने की तैयारी करने में जुट गए हैं…. आपको बता दें कि बिहार में में अगर जाति आधार पर देखते हैं….. तो यादव समाज 14.26 फीसदी…. जो सबसे ज्यादा हैं….. इसके बाद रविदास 5.2 फीसदी….. कोईरी 4.2 फीसदी…… ब्राह्मण 3.65 फीसदी….. राजपूत 3.45 फीसदी….. मुसहर 3.08 फीसदी…. भूमिहार 2.86 फीसदी…… साहू जाति 2.81 फीसदी…… कुर्मी 2.8 फीसदी….. मल्लाह 2.60 फीसदी….. और बनिया 2.31 फीसदी है…… इन 11 जातियों के अलावा बाकी 198 जातियों की हिस्सेदारी 50 फीसदी हैं…… जिनमें अधिकतर जातियों की आबादी 1 फीसदी से भी कम है…..

वहीं छोटी-छोटी जातियां, जिनकी आबादी कम है….. लेकिन चुनाव में फिलर के तौर पर वो काफी अहम हो जाते हैं…… उदाहरण के तौर पर समझिए कि कुम्हार महज एक फीसदी है…… जो खुद के दम पर जीत नहीं सकते हैं…… लेकिन जब किसी दूसरे वोटबैंक के साथ जुड़ जाते हैं…. तो एक बड़ी ताकत बन जाते हैं….. नीतीश ने इन्हीं तमाम छोटी-छोटी जातियों को मिलाकर अपना सियासी आधार खड़ा किया है….. तो यूपी में बीजेपी ने भी इसी फॉर्मूले पर खुद को दोबारा से खड़े करने में कामयाब रही है…… ऐसे में अब बिहार में 200 के करीब छोटी-छोटी जातियों पर राजनीतिक दल का फोकस होगा….. राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग जातियों के नेताओं को अब आगे करके अपनी राजनीति कर सकती हैं….. वहीं यह बात साफ है कि यादव और मुस्लिम अहम भूमिका में है…… 14 फीसदी यादव और 18 फीसदी मुस्लिम हैं…… जिन्हें मिलाकर 32 फीसदी होता है…… बिहार में आरजेडी यादव-मुस्लिम समीकरण के सहारे लंबे समय से सियासत करती रही है….. लेकिन रिपोर्ट में जिस तरह से मुसलमानों की आबादी यादव समुदाय से ज्यादा है…… तो उनके प्रतिनिधित्व की तुलना की जाए तो यादव भारी पड़ते हैं….. 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में 52 यादव…. और 19 मुस्लिम विधायक जीते…… ऐसे में 14 यादव समुदाय का प्रतिनिधित्व 21 फीसदी….. और 18 फीसदी मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व एक फीसदी से कुछ ज्यादा है…..

वहीं, ओबीसी की राजनीति में भी बड़ा परिवर्तन हो सकता है….. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो यादव भले ही 14 फीसदी है…… लेकिन कुर्मी समुदाय कोइरी और मल्लाह समुदाय से कम हैं…… इस लिहाज से कोइरी समुदाय की सियासी अहमियत मिल सकती है…… नीतीश ने कभी कुर्मी-कोइरी का समीकरण बनाने में सफल रहे हैं…… लेकिन कुर्मी समुदाय की तरह राजनीतिक अहमियत अभी तक नहीं मिल सकी है…… इस तरह मल्लाह समुदाय की सियासत पर सियासी दलों का फोकस हो सकता है. नीतीश कुमार से गठबंधन टूटने के बाद से बीजेपी कोइरी वोटों पर अपना खास फोकस कर रखी है…… जिसके लिए सम्राट चौधरी को प्रदेश बनाया गया तो उपेंद्र कुशवाहा को भी साथ लिया है….. इसके अलावा मल्लाह समुदाय से आने वाले हरि सहनी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बना रखा है….. बीजेपी ऐसे ही दूसरी ओबीसी जातियों को भी साधने की कवायद में है,…… लेकिन नीतीश कुमार भी किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ रहे हैं……

जिसको देखते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रदेश की उन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है….. जहां पिछडे़ वर्ग के मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं….. सुभासपा 17 मार्च बिहार के सीतामढ़ी में एक बड़ी रैली की तैयारी कर रही है…… जिसमें पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी शामिल हो सकते हैं….. तो वहीं इस रैली के बाद अलग-अलग विधानसभाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला….. और युवाओं का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएंगे….. सुभासपा अध्यक्ष और पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर पूरी तैयारी नज़र बनाए हैं….. और पार्टी के कामों की समीक्षा कर रहे हैं….. और उन्होंने बिहार की नवादा, पश्चिमी चंपारण, सासाराम, नालंदा, औरंगाबाद, गया और बेतिया समेत 29 सीटों पर तैयारी की जानकारी मांगी है…… राजभर एनडीए गठबंधन के तहत इन सीटों पर अपनी पार्टी की दावेदारी कर सकते हैं…..

जानकारी के मुताबिक सुभासपा पिछले तीन महीनों में 24 रैलियां कर चुकी हैं…… 30 जनवरी को पार्टी की पूर्णिया में भी एक रैली हुई थी…… पार्टी के मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने बताया कि सुभासपा यूपी से बाहर भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है…… पार्टी की तैयारी उन सीटों पर हैं….. जहां पिछड़ा वर्ग की मतदाता अधिक संख्या में मौजूद हैं…..  बता दें कि सुभासपा उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी है…… जिसके बाद अब पार्टी बिहार में दस्तक देने की कोशिश में है…..

 

 

Related Articles

Back to top button