मोदी के विदेश में साख बढ़ने के दावे फेल

- रिलायंस को अमेरिका में तेल रिफाइनरी परियोजना से पहले खर्च करने पड़े करोड़ों
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मोदी सरकार की विदेश में साख बढऩे का दावा करने वाले लोगों को एक खबर ने आईना दिखा दिया है। ट्रंप की मित्रता की हवा निकलने के बाद एक और कारनामें ने मोदी सरकार को बट्टा लगा दिया है। दरअसल भारत की बड़ी निजी कंपनी रिलायंस ने अमेरिका में एक तेल रिफाइनरी परियोजना से पहले अमेरिकी सरकार और नीति-निर्माताओं को प्रभावित करने के लिए भारी लॉबिंग खर्च किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने करीब 14.9 लाख डॉलर लॉबिंग पर खर्च किए। एक वेबसाइट के मुताबिक, यह जानकारी अमेरिकी सीनेट में जमा रिकॉर्ड से सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार यह खर्च ऊर्जा नीति, व्यापार नियमों, प्रतिबंधों और तेल पर लगने वाले टैरिफ जैसे मुद्दों को लेकर अमेरिकी प्रशासन से संपर्क बनाने के लिए किया गया था। दस्तावेजों के मुताबिक 2025 में रिलायंस ने लॉबिंग पर बड़ा खर्च किया, जिसमें से 7.6 लाख डॉलर सिर्फ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच खर्च किए गए। इसके अलावा कंपनी ने पहले से काम कर रही तीन लॉबिंग फर्मों के साथ एक नई फर्म चेकमेट गवर्नमेंट रिलेशन को भी नियुक्त किया। इस फर्म के कुछ अधिकारियों के अमेरिकी प्रशासन से पुराने संबंध बताए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में रिलायंस समूह अमेरिकी प्रशासन की आलोचना के दायरे में भी आया था। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि भारत की कुछ बड़ी कंपनियां सस्ते रूसी तेल खरीदकर उससे मुनाफा कमा रही हैं। इसी दौरान अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था।
ट्रंप के ऐलान से पहले बढ़ी लॉबिंग
यह लॉबिंग उस समय की गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने टेक्सास में नई तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा की। 11 मार्च को ट्रंप ने बताया कि टेक्सास के ब्राउन्सविल पोर्ट पर बनने वाली इस रिफाइनरी को रिलायंस समर्थन देगी। इसे पिछले 50 वर्षों में अमेरिका की पहली नई बड़ी रिफाइनरी परियोजनाओं में से एक बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना को अमरिका फसर्ट रिफाइनिंग नाम की कंपनी विकसित कर रही है। इस कंपनी ने कहा कि उसे एक वैश्विक ऊर्जा कंपनी से नौ अंकों का निवेश मिला है और एक समझौते के तहत वह अमेरिकी शेल ऑयल से बने ऊर्जा उत्पादों की खरीद-प्रसंस्करण और वितरण करेगी।



