एनडीए सरकार केफैसलों पर विपक्ष का प्रहार

  • लोकसभा सीटों में बढ़ोत्तरी पर उठे सवाल
  • कमर्शियल सिलेंडर, प्रीमियम व एटीफ केदाम बढ़ाने पर भी सरकार पर निशाना
  • कांग्रेस ने केंद्र के प्रस्तावित विधेयक पर जताई कड़ी आपत्ति
  • बीजू पटनायक पर बयान देकर फंसे निशिकांत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दुनिया पश्चिम एशिया केसंकट से जूझ रही है। ऐसे में भारत भी उससे अछूता नहीं है। जैसे यहां पर तेल व गैस के लिए मारामारी मची हुई। हालांकि सरकार सब कुछ नियंत्रण में रहने की बात कर रही है। पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्ष सरकार की कुछ निर्णयों पर उसे घेर रहा है। जैसे एटीएफ, कमर्शियल सिलेंडर व प्रीमियम तेलों के दाम बढ़ानें को लेकर कांग्रेस, सपा, टीमएमसी से लेकर डीएमकेतक सरकार के ऊपर सवाल उठा रहे हैं। इन सबके बीच कांग्रेस ने जनगणना व लोसीटो की संख्या के तरीकेपर भी उंगली उठाई है। उधर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दिग्गज दिवंगत नेता बीजू पटनायक पर अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी है। बता दें राजधानी दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएपफ) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में 100 प्रतिशत की अधिक की बढ़ोतरी को लेकर जताई जा रही आशंका गलत साबित हुई। पहले खबरें आई थीं कि एटीएफ की कीमतें दोगुने से ज्यादा बढ़कर दो लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक बढ़ोतरी इससे काफी कम है। कीमतों में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वर्तमान कीमत करीब 1.04 लाख रुपये प्रति किलोलीटर है।

30 दिन में 310 रुपये बढ़ गए कमर्शियल सिलेंडर के दाम

फाइनेंशियल ईयर के पहले दिन ही लोगों को महंगाई का झटका लगा है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों (आयल पीएसयूएस) ने आज, यानी 1 अप्रैल से अपने 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की है। अब दिल्ली में इस सिलेंडर का दाम बढ़ कर 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये हो गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 1 मार्च को 1768.50 रुपये थे, जो 7 मार्च को बढ़कर 1883 रुपये हो गए थे। इसके बाद अब 195.50 रुपये बढ़कर 2078.50 हो गए हैं, यानी 1 मार्च से अब तक 310 की कुल बढ़ोतरी हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, कोलकाता में आज से 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2208.00 रुपये, मुंबई में 2031.00 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये हो गई है।

बैकफुट पर भाजपा सांसद- अब मांगी माफी

बीजेपी के सीनियर नेता और सांसद निशिकांत दुबे ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक पर टिप्पणी कर बुरे फंस गए। हालांकि उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी। लेकिन बीजू जनता दल उन पर हमलावर है। इतना ही नहीं वह अपनी पार्टी के नेताओं के भी निशाने पर आ गए लेकिन अब उन्होंने बिजू बाबू को लेकर की गई टिप्पणी पर माफी मांग ली है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि बिजू पटनायक के बार में उन्होंने जो भी कहा, उसका गलत अर्थ निकाला गया। इसके साथ ही निशिकांत ने ये भी साफ किया कि ये उनका निजी विचार था। पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं।

लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि पर घमासान

लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि करने के केंद्र सरकार के कथित प्रस्ताव पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस कदम को अन्यायपूर्ण और दक्षिण भारत के हितों के खिलाफ बताते हुए तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की पृष्ठभूमि में लोकसभा का आकार बढ़ाने के लिए एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया, ”मोदी सरकार लोकसभा का आकार 50 प्रतिशत बढ़ाने के लिए एक विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव कर रही है। प्रत्येक राज्य को आवंटित सीट की संख्या में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है।” उन्होंने कहा, ”यह तर्क देना भ्रामक है कि कुल सीट में 50 प्रतिशत की वृद्धि न्यायसंगत है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि अनुपात फिलहाल नहीं बदल सकता है लेकिन इसके गहरे निहितार्थ हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

लोस सीटों में बढ़ोत्तरी दक्षिण भारत के लिए अन्यायपूर्ण : जयराम

कांगे्रस नेता जयराम रमेश के अनुसार प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों में 50प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिसका सीधा असर प्रत्येक राज्य को आवंटित सीटों पर पड़ेगा। कांग्रेस का तर्क है कि इससे उत्तरी राज्यों को तो भारी फायदा होगा, लेकिन दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों का संख्याबल कमजोर हो जाएगा। लोकसभा में विभिन्न राज्यों के मौजूदा संख्याबल के अंतर में किसी भी तरह की वृद्धि से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा। उदाहरण के लिए वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 80 सीट हैं और तमिलनाडु में 39 सीट हैं। प्रस्तावित विधेयक के साथ, उप्र की लोस सीट की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी जबकि तमिलनाडु में अधिकतम 59 सीट हो पाएंगी। इसी तरह, केरल में लोस की 20 सीट बढ़कर 30 हो जाएंगी, जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 60 सीट हो जाएंगी। कुल मिलाकर, दक्षिणी राज्यों को 66 सीट का फायदा होगा जबकि उत्तरी राज्यों को 200 सीट का फायदा होगा।

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