Bollywood के मशहूर एक्टर की दर्दनाक मौत, पेट की बीमारी बनी जान की दुश्मन
बॉलीवुड और टीवी की दुनिया में काम करने वाले सितारे ना सिर्फ ऑडियंस को एंटरटेन करते हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉलीवुड और टीवी की दुनिया में काम करने वाले सितारे ना सिर्फ ऑडियंस को एंटरटेन करते हैं..बल्कि, दिन-रात मेहनत कर अपनी एक अलग जगह भी इंडस्ट्री में बनाते हैं।
कई सेलेब्स तो ऐसे हैं..जिन्हें पहचान ही बड़े पर्दे की जगह छोटे पर्दे की दुनिया में काम करने से मिली। हां बस, दुःख की बात ये है कि, कुछ सितारे ऐसे होते हैं..जिनकी निजी ज़िंदगी पर्दे से एकदम उलट होती है। आखिर, ये लोगों के चेहरे पर तो मुस्कान ले आते हैं..लेकिन, उनकी खुद की ज़िंदगी दुखों से भरी होती है।
और, ऐसी ही कहानी बॉलीवुड और टीवी टाउन के उस मशहूर एक्टर की भी रही..जिसे एक समय पर इंडस्ट्री का दूसरा ‘राजेश खन्ना’ तक कहा जाने लगा था। उन्होंने रामानंद सागर की पौराणिक कथा पर आधारित 80s के सीरियल ‘रामायण’ में भी काम किया। साथ ही और भी कई शोज किये। लेकिन, इस एक्टर का अंत बेहद दर्दनाक रहा। पेट की एक बीमारी के कारण एक्टर हमेशा-हमेशा के लिए इस दुनिया से दूर हो गए।
4pmbollywood की इस रिपोर्ट में हम जिस हीरो की बात कर रहे हैं..उनका नाम विजय अरोड़ा है। जो कि आज हमारे बीच इस दुनिया में तो मौजूद नहीं हैं। लेकिन, समय-समय पर उनसे जुड़े किस्से जरूर लोगों के दिलों में ताज़ा हो जाते हैं।
तो, अपने 70 के दशक के करियर में विजय अरोड़ा ने हर बड़ी और खूबसूरत हीरोइन के साथ काम किया था। साल 1971 में ‘फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ से पढ़ाई पूरी करने के बाद विजय एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने के लिए ‘सपनों के शहर’ मुंबई आए थे। वो FTII, पुणे के गोल्ड मेडलिस्ट थे। गोरा चेहरा और लंबी हाइट की वजह से उन्हें हिंदी सिनेमा में फिल्में आसानी से मिलने लगीं। उन्होंने पहली बार साल 1972 में आई फिल्म ‘जरूरत’ में रीना रॉय और ‘राखी और हथकड़ी’ में आशा पारेख के साथ काम किया था।
हालांकि, उनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक ही रही। लेकिन, फिर आई फिल्म ‘यादों की बारात’। फिल्म ने सक्सेस के सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले और फिल्म का गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ तो सुपर-डुपर हिट साबित हुआ। ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं, अपने चॉकलेटी लुक की वजह से एक्टर विजय अरोड़ा रातों-रात फेमस हो गए और बैक-टू-बैक फिल्में साइन करने लगे। उनकी सक्सेस का आलम ये रहा कि उनकी तुलना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले एक्टर राजेश खन्ना से होने लगी, क्योंकि दोनों की हाइट और लुक्स दिखने में एक ही जैसी थी।
जब हर कोई उन्हें दूसरा ‘राजेश खन्ना’ कहने लगा। तो, खुद राजेश खन्ना ने भी स्वीकार किया था कि अगर कोई उनकी जगह ले सकता है तो वह विजय अरोड़ा हैं। विजय और राजेश खन्ना ने साथ में भी तीन फिल्मों में काम किया था। दोनों स्टार्स को ‘निशान’, ‘रोटी’, और ‘सौतन’ जैसी हिट फिल्मों में साथ देखा गया था।
तो, अपने करियर में विजय ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और साथ ही टीवी के कई सीरियल्स में भी काम किया था। उन्होंने रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ में मेघनाथ का रोल निभाया था, जो घर-घर में प्रभु श्रीराम और माता सीता के किरदार जितना ही पसंद किया गया था। इस किरदार ने विजय अरोड़ा को जिंदगी भर की ऐसी पॉपुलैरिटी दी कि आज भी उन्हें इस किरदार के लिए याद किया जाता है।
खास बात ये है कि, विजय अरोड़ा को ‘मेघनाद’ का रोल भी काफी दिलचस्प अंदाज़ में मिला। दरअसल, विजय ने रामानंद सागर के प्रोडक्शन हाउस ‘सागर आर्ट्स’ के साथ भी काफी समय तक काम किया। इस दौरान वह उनके पॉपुलर टीवी सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ के कुछ एपिसोड्स में भी नजर आए। यहीं से रामानंद सागर विजय अरोड़ा के फैन थे। फिल्मों में काम करके उनके तगड़ा बेस बन चुका था। कदकाठी भी अच्छी थी और आवाज भी दमदार। बस रामानंद सागर को विजय अरोड़ा के रूप में अपना ‘मेघनाद’ मिल गया था।
हालांकि, विजय ने हिंदी सिनेमा में जितना काम किया, उतना नाम वो नहीं कमा पाए। विजय को फिल्मों में वैसा मुकाम नहीं मिला, जिसके उन्होंने सपने देखे थे।अपने करियर के पीक पर वो हिंदी सिनेमा में होने वाली राजनीति का शिकार हुए और उन्होंने खुद इस बात को स्वीकारा था।
निजी ज़िन्दगी की बात करें तो, ये भी काफी चर्चित रही। उन्होंने मॉडल और ‘मिस इंडिया’ रहीं दिलबर देबरा से शादी की थी। उनका एक बेटा भी है, जिसका नाम फरहाद है।
वहीं, स्टारडम की बुलंदियों पर पहुंचने के साथ ही विजय अरोड़ा की दर्दनाक मौत हो गई। विजय अरोड़ा का साल 2007 में निधन हुआ था। उन्हें पेट की बीमारी थी। बताया जाता है कि उनके पेट का कैंसर हुआ था। वह काफी समय से इसे झेल रहे थे। उनके पेट के कैंसर का पता लास्ट स्टेज में चला था और डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता। और फिर अपने घर पर उन्होंने आखिरी सांस ली थी।
तो, विजय अरोड़ा की मौत के बाद दिलबर की बुरी हालत हो गई थी। वो अजीब हरकतें करने लगी थीं। इस बारे में उनके बेटे फरहाद ने साल 2009 में एक इंटरव्यू में बताया था। फरहाद ने बताया था कि उनकी मां डिप्रेशन में चली गई थीं। वह दिनभर रोती रहती थीं और अजीब हरकतें करती थीं। कई बार गैस खुली छोड़ देतीं और भूल जातीं कि क्या कर रही हैं। कभी वह खुद से बातें करके जोर-जोर से हंसतीं तो कभी चीखने-चिल्लाने लगती थीं। करीब डेढ़ साल तक दिलबर की हालत ऐसी ही रही और फिर होमियोपैथिक दवाइयों के बाद वह ठीक हो सकीं।



