पिंकी चौधरी का नफरती वीडियो वायरल, योगी राज में नफरती चिंटुओं को मिल रहा बढ़ावा

भाजपा राज में एक तरफ जहां सत्ता के लोभी नेता अपनी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए हिन्दू-मुसलमान की राजनीति करते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में एक तरफ जहां सत्ता के लोभी नेता अपनी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए हिन्दू-मुसलमान की राजनीति करते हैं।

तो वहीं दूसरी तरफ कुछ कथित धार्मिक नेता ऐसे भी हैं जो खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार बताते हैं लेकिन हरकतें ऐसी ओछी करते हैं जिससे पूरे समाज को शर्मिंदा होना पड़ता है। गांधी-भगत सिंह के इस देश में आज हिन्दू-मुसलमान इस कदर बढ़ चुका है जिसकी कोई सीमा नहीं है।

फर्जी हिन्दुतवा का प्रचार करने वाले ये कथिति नेता समाज को दीमक की तरह खोखला करते जा रहे हैं। और सत्ता का सुख भोग रहे हमारे सीएम महोदय योगी जी हैं कि ऐसे लोगों पर नकेल कसने के बजाय उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।

हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी का एक वीडियो हाल ही में तेजी से वायरल हो रहा है। जहां गाजियाबाद में एक भंडारे के दौरान उन्होंने एक गरीब मुसलमान के हाथ से प्लेट छीन ली और कहा, “मुल्ला न आवे यहां, कोई मुसलमान हमारा खाना न खाए।”

दोस्तों यह घटना सिर्फ एक छोटी सी घटना नहीं है। बल्कि यह दिखाती है कि समाज में कितनी नफरत फैल रही है। भूख लगने पर इंसान, इंसान होता है, न कि हिंदू या मुसलमान। लेकिन पिंकी चौधरी ने धर्म के नाम पर भेदभाव किया।

हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब पिंकी चौधरी ने ऐसी हरकत की हो और विवादों में आये हों। बल्कि पहले भी वो विवादों में रहा चुका है। 29 दिसंबर 2025 को 21 सेकेंड का उनका एक वीडियो सामने आया था। जो गाजियाबाद के शालीमार गार्डन एरिया का था। इसमें लोगों के हाथ में तलवारें और फरसे थे। भारत माता की जय का नारा लगाते हुए सभी एक घर के सामने रुकते हैं। घर से बाहर निकले शख्स को तलवार थमाते हैं।

कैसे वो वीडियो में कहते हुए नजर आ रहे हैं कि ये आपकी बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए। अगर बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा होती है, तो विधर्मियों से अपनी सुरक्षा के लिए। शख्स तलवार लेता है, माथे से लगाता है। फिर सभी नारा लगाते हैं- जय श्री राम। तलवार बांटने वाले हिंदू रक्षा दल के सदस्य थे।

6 जनवरी को पुलिस ने इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी को बेटे के साथ अरेस्ट किया। जहां उनकी सिट्टी पट्टी गुल नजर आई। 14 जनवरी को पुलिस ने पिंकी को जेल भेजा, लेकिन 15 जनवरी को जमानत हुई तो 25 किमी लंबा जूलस काफिले के साथ निकाला। कई बार उन पर केस दर्ज हुए, लेकिन वे जेल जाते हैं और जल्दी बाहर आ जाते हैं। जिसका नाजायज फायदा उठाया।

जैसा की आप सब सुनते ही होंगे कि सूबे की योगी आदित्यनाथ की सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी-बड़ी बातें और दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है ये आप बखूबी समझते हैं। तभी तो इस घटना पर अब तक कोई सख्त एक्शन नहीं दिख रहा है।

पुलिस ने FIR दर्ज की या नहीं, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अगर कोई मुसलमान कुछ गलत करता तो तुरंत एक्शन होता, लेकिन यहां चुप्पी साध ली गई है। यह चुप्पी सवाल उठाती है कि सरकार किस तरफ है? क्या सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही है जो खुले आम नफरत फैला रहे हैं?

आपने अक्सर देखा होगा कि राजनितिक मंचों पर खड़े होकर वोटरों को साधने के लिए योगी सरकार हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। पिंकी जैसे लोग घूम-घूमकर नफरत का जहर फैला रहे हैं। अगर सरकार चाहे तो तुरंत एक्शन ले सकती है। लेकिन खामोश रहना मतलब बिना कहे समर्थन देना। इससे समाज में डर बढ़ रहा है। मुसलमान परिवार सोच रहे होंगे कि क्या अब भंडारे में भी नहीं जा सकते? गरीब आदमी भूखा सोया तो उसकी क्या गलती? उसने सिर्फ खाना मांगा था।

ऐसे में पिंकी चौधरी का बयान “मुल्ला न आवे” बहुत खतरनाक है। इससे दो समुदायों के बीच दीवार और मजबूत हो रही है। भारत एक एकता वाला देश है। यहां अलग-अलग धर्म, जाति के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं। लेकिन कुछ लोग वोट बैंक के लिए यह भाईचारा तोड़ना चाहते हैं। भंडारे में प्लेट छीनना कोई बहादुरी नहीं, बल्कि कायरता और नीचता का प्रमाण है।

वैसे तो देखा जाए तो हिंदू संस्कृति अतिथि देवो भव कहती है, लेकिन पिंकी जैसे छोटी सोच के लोग इसे भूल गए हैं। योगी सरकार को इस पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए। पिंकी चौधरी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरे लोग सबक लें।

अगर सरकार चुप रही तो नफरत और बढ़ेगी। सड़कों पर ऐसे और वीडियो आएंगे। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। चाहे कोई भी हो, अगर वह नफरत फैलाए तो सजा मिलनी चाहिए।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे गलत बता रहे हैं। कुछ कह रहे हैं कि यह हिंदुत्व की असली तस्वीर है। लेकिन सच्चाई यह है कि नफरत किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है। हमें सभी धर्मों के अच्छे लोगों को साथ लाना चाहिए। भूख, गरीबी और बेरोजगारी सबके लिए समान समस्या है।

पिंकी चौधरी जैसे लोगों को लगता है कि नफरत फैलाकर वे लोकप्रिय हो जाएंगे। लेकिन असल में वे समाज को कमजोर कर रहे हैं। योगी सरकार अगर अभी भी चुप रही तो लोगों का विश्वास सरकार पर से उठ जाएगा। पिंकी चौधरी का यह वीडियो न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि खतरनाक भी है।

सवाल ये बनता है कि आखिर कब तक योगी राज में ऐसे लोगों का बोलबाला बना रहेगा और गरीबों पर हिन्दू-मुसलमान करके जुल्म ढाते रहेंगे? लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि सरकार ऐसी घटनाओं पर मूक दर्शक बनी महज तमाशा देख रही है।

गौरतलब है कि योगी सरकार की खामोशी इसे और बढ़ावा दे रही है। पिंकी जैसे लोगों पर सरकार द्वारा नकेल न लगाना, न सिर्फ लोगों के दिलों में नफरत घोल रहा है बल्कि समाज पर गलत असर डाल रहा है। जो की आने वाली पीढ़ियों को भी तबाह कर सकता है।

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