मणिशंकर के बयान पर फिर उठा सियासी तूफान

  • बोले कांग्रेस नेता- नफरत की राजनीति के बावजूद देश की दो-तिहाई आबादी हिंदू राष्ट्र के पक्ष में नहीं
  • हिंदू संगठनों के निशाने पर आए कांग्रेस के बागी नेता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल को दोबारा से हिंदू राष्ट्र बनाये जाने की मांगे उठनी तेज हो रही है। ऐसे में कांग्रेस के बागी नेता मणिशंकर अय्यर के बयान ने देश क भीतर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राजीव गांधी की एजूकेशन पर उंगली उठाने वाले अय्ययर का कहना है कि देश की दो तिहाई आबादी भारत को हिंदू राष्ट्र बनते नहीं देखना चाहती। हालांकि उन्होंने कोई सर्वे, आंकड़े या एजेंसी को कोट नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि नफरत की राजनीति के बावजूद देश की दो-तिहाई आबादी हिंदू राष्ट्र के पक्ष में नहीं है। उधर उनके बयान के आते ही वह हिंदू संगठनों के निशाने पर आ गए। हालांकि अभी उनके बयान के बाद सियासी प्रतिक्रिया नहीं आई हैं।

वीडियो संदेश के सहारे कही बात

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, दक्षिण एशियाई देशों और दूसरे मुल्कों दुबई, सऊदी अरब, ब्रिटेन या अमेरिका में रहने वाले मुसलमानों को ईद की बधाई देते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है? कि मैं उस भारत से बोल रहा हूं, जहां की सरजमीं सबका स्वागत करती है। सब इस देश में खुशी से रहें, एक-दूसरे के साथ सब अमन से रहें और एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखना चाहते हैं। इस पर कोई नफरत की जरूरत नहीं है, देश में नफरत फैलाया जा रहा है। लेकिन, इसके बावजूद दो-तिहाई हिंदुस्तानी, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत हिंदू हैं, जिन्होंने उन सियासी शक्तियों को सहारा नहीं दिया कि इस देश को कभी हिंदू राष्ट्र बनाया जाए।

भारत एक सेक्यूलर राष्ट्र

उन्होंने कहा कि यह एक सेक्युलर देश है और इसे हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। हालांकि इससे पूर्व वह देश के पूर्व स्वा. प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शिक्षा पर सवाल उठा कर काफी चर्चित हुए थे। उन्होंने राजीव गांधी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इंदिरा गांधी का नाम सभी जानते हैं। जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो लोगों ने सोचा और मैंने खुद सोचा कि यह एयरलाइंस पायलट हैं और दो बार फेल हो चुके हैं।

विवादों में कई बार फंस चुके हैं अय्यर

मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि मैंने राजीव गांधी के साथ कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में राजीव गांधी फेल हो चुके हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में फेल होना बहुत ही मुश्किल है। वहां फस्र्ट डिवीजन पास होना आसान है। लेकिन, वहां फेल होना बहुत मुश्किल है क्योंकि यूनिवर्सिटी अपनी छवि बरकरार रखने के लिए कोशिश करती है कि सभी कम से कम पास हो जाएं। लेकिन, इसके बावजूद राजीव गांधी फेल हो गए। फिर वह गए इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन, वहां दोबारा फेल हुए। मैंने सोचा कि ऐसे व्यक्ति को क्या प्रधानमंत्री बनना है।

प्रयागराज में बुलडोजर एक्शन पर ‘सुप्रीम’ आदेश

  • शीर्ष अदालत ने डेवलपमेंट ऑथारिटी को लगाई फटकार
  • याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख मुआवजा देने का आदेश
  • 24 घंटे के भीतर मकान गिराना गलत और अवैध था

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में 2021 में हुए बुलडोजर एक्शन पर मंगलवार (1 अप्रैल) फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट ऑथोरिटी को 5 याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर मकान गिराना गलत था और इसे अवैध माना है। कोर्ट ने कहा कि यह मुआवजा इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में सरकारें बिना उचित प्रक्रिया के लोगों के मकान गिराने से परहेज करें। जजों ने हाल ही में सामने आए एक वीडियो का भी हवाला दिया, जिसमें गिरती हुई झोपड़ी से एक बच्ची अपनी किताबें लेकर भाग रही थी।

अंबेडकर नगर का वीडियो हुआ था वायरल

दरअसल, 23 मार्च को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था इस वायरल वीडियो में एक बच्ची बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान अपनी झोपड़ी की तरफ दौड़ते हुए दिखाई दे रही है। बच्ची झोपड़ी के पास पहुंचकर अपनी किताबें लेकर जल्दी से बाहर आती है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिया था इस तरह का फैसला

इससे पहले 7 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार को बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी. पीड़ितों का कहना था कि राज्य सरकार ने गलती से उनकी ज़मीन को गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति मान लिया। इसके कारण प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घर गिरा दिए गए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन घरों को गलती से गिराया गया है, उन्हें राज्य सरकार अपने खर्च पर फिर से बनाएगी. अगर आप (अटॉर्नी जनरल) इसे चुनौती देना चाहते हैं, तो एक हलफनामा दाखिल करके कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं।

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