मनंथावडी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ और उपकरणों की भारी कमी, प्रियंका गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
गांधी ने अस्पताल में कर्मचारियों की कमी और अहम मेडिकल उपकरणों की कमी को मुख्य मुद्दे बताया, और कहा कि इन चिंताओं को पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों के सामने उठाया गया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: प्रियंका गांधी ने अस्पताल में कर्मचारियों की कमी और अहम मेडिकल उपकरणों की कमी को मुख्य मुद्दे बताया, और कहा कि इन चिंताओं को पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों के सामने उठाया गया था. मनंथावडी मेडिकल कॉलेज में कई एक्सपर्ट्स की कमी है और लोगों को खासी दिक्कत होती है
केरल में विधानसभा चुनाव से पहले एक महिला की डिलीवरी के दौरान पेट में ही कपड़ा छोड़ देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल लापरवाही की कथित घटना की निष्पक्ष और सही तरीके से जांच की मांग की है. कांग्रेस इस मसले पर लगातार मुखर है और डॉक्टर तथा स्टाफ पर एक्शन लेने की मांग कर रही है.
प्रियंका गांधी ने केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज को भेजे अपने पत्र में कहा कि कथित मेडिकल लापरवाही के कारण उस युवा मां को असहनीय दर्द हुआ, जो जानलेवा भी हो सकता था. पत्र में उन्होंने यह उम्मीद जताई कि महिला की शिकायत के जवाब में जिला मेडिकल अधिकारी द्वारा शुरू की गई जांच “निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता के साथ की जाएगी.”
अव्यवस्था पर बिफरीं प्रियंका गांधी
कांग्रेस नेता का कहना है कि जहां केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली अधिकांश लोगों के लिए मेडिकल इलाज को सुलभ बनाने में अहम रही है, वहीं उनके वायनाड संसदीय क्षेत्र के मनंथावडी मेडिकल कॉलेज जो यहां के लोगों के लिए एक अहम लाइफ लाइन है- गंभीर संसाधनों की कमी से जूझ रहा है.
उन्होंने कॉलेज में कर्मचारियों की कमी और अहम मेडिकल उपकरणों की कमी को मुख्य मुद्दे बताया, और कहा कि इन चिंताओं को पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों के सामने उठाया गया था. उन्होंने बताया कि मनंथावडी मेडिकल कॉलेज में कई एक्सपर्ट्स की कमी है और इसकी वजह से मरीजों को बेहतर इलाज के खातिर कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज जाने के लिए 80 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करनी पड़ती है.
साथ ही प्रियंका गांधी ने सरकार से सरकारी अस्पतालों में प्रभावी जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र तय करने का अनुरोध किया, और कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच की मांग की.
क्या है मामला
मामला यह है कि इस अस्पताल में महिला ने 20 दिसंबर को एक बच्चे को जन्म दिया. महिला की ओर दर्ज शिकायत के अनुसार, डिलीवरी के बाद भी उसे पेट में तेज दर्द हुआ और अगले पांच दिनों में वह कई बार डॉक्टरों के पास गई. लेकिन मेडिकल स्टाफ ने उसकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया. यहां तक डॉक्टरों ने “पेट साफ करने” के लिए दवाई दे दी, लेकिन दर्द बना रहा.
महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि 29 दिसंबर को उसके गर्भाशय से कपड़े का एक टुकड़ा निकला, जिसके बाद उसे राहत मिली. उसने जांच के दौरान एक्सपर्ट पैनल के सामने वह कपड़ा भी पेश किया. महिला ने कहा, “मुझे इंसाफ चाहिए. मेरी बार-बार की शिकायतों को कि मेरे गर्भाशय में कुछ फंसा हुआ है, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया.” मामला तूल पकड़ने पर जांच के लिए 3 सदस्यीय पैनल का गठन किया गया.
केरल स्वास्थ्य सेवा में अग्रणी
यह हाल तब है जब केरल अपने यहां की बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए जाना जाता है और उसकी लगातार तारीफ की जाती है. यह दक्षिणी राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश के शीर्ष 4 राज्यों में आता है. पिछले साल जुलाई में नीति आयोग की ‘गुड हेल्थ एंड वेलबीइंग इंडेक्स’ में केरल चौथे स्थान पर आ गया था. जबकि इस लिस्ट में गुजरात पहले नंबर पर रहा. केरल साल 2018 में इस लिस्ट में पहले नंबर पर रहा था.
पिछले साल जारी 2023-24 के इंडेक्स में गुजरात 90 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा था. इसके बाद महाराष्ट्र और उत्तराखंड (84) और हिमाचल प्रदेश (83) थे. कर्नाटक ने केरल के साथ चौथा स्थान साझा किया.



