गुजरात BJP में बगावत? 5 विधायकों का CM को पत्र, बाबूशाही के खिलाफ खोला मोर्चा

गुजरात में भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है... पार्टी के पांच विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में कथित...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पांच विधायकों ने हाल ही में.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक पत्र लिखकर राज्य की नौकरशाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं.. यह पत्र वडोदरा जिले के विधायकों द्वारा लिखा गया है.. जिसमें उन्होंने कहा है कि राज्य में अफसर राज, बाबूशाही हावी हो गई है.. उनके अनुसार आम आदमी को सरकारी दफ्तरों में छोटा-सा काम करवाना भी एक युद्ध लड़ने जैसा हो गया है.. यह घटना जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आई.. जब ये विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने लगे.. इस पत्र ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है.. क्योंकि यह भाजपा के अंदरूनी असंतोष को दर्शाता है.. कई लोग इसे एक संकेत मान रहे हैं.. कि आने वाले दिनों में और विधायक अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं.. गुजरात विधानसभा में भाजपा के कुल 156 विधायक हैं.. लेकिन पत्र में उठाए गए मुद्दे इतने गंभीर हैं.. कि अगर ये फैलते हैं.. तो ज्यादा विधायकों की आत्मा जाग सकती है.. जैसा कि कुछ राजनीतिक टिप्पणीकार कह रहे हैं..

आपको बता दें कि जनवरी 2026 की शुरुआत में.. वडोदरा जिले के पांच भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक संयुक्त पत्र लिखा.. इन विधायकों के नाम अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं.. लेकिन पत्र में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्य के सरकारी अधिकारी अपनी मनमानी चला रहे हैं..

जानकारी के मुताबिक विधायकों ने पत्र में लिखा है कि पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और अन्य उच्च अधिकारी अपनी पसंदीदा जगहों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए काम कर रहे हैं.. वे ग्राउंड लेवल पर नहीं जाते, जिससे जमीनी हकीकत से दूर रहते हैं.. नतीजा यह है कि लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है..

पत्र में कहा गया है कि एक साधारण व्यक्ति को सरकारी कार्यालय में कोई काम करवाना युद्ध लड़ने जैसा हो गया है.. बिना रिश्वत या सिफारिश के काम नहीं होते.. यह आम जनता की रोजमर्रा की परेशानी को दर्शाता है.. जिसमें जमीन के दस्तावेज, पुलिस शिकायतें या सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आदि शामिल है..

विधायकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गई.. तो मौजूदा सरकार को बड़ा नुकसान हो सकता है.. वे कहते हैं कि अधिकारी अपनी ऑफिस बना लेते हैं.. और वहां से ही आदेश देते हैं.. लेकिन असल में कोई काम नहीं होता है..

वहीं यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो गया.. एक पोस्ट में आप नेता इशुदान गढ़वी ने लिखा कि गुजरात के भाजपा के पांच विधायकों ने सीएम को पत्र लिखकर सिकायत की है की राज्य में बाबूशाही चल रही है.. और उन्होंने लिखा है की एक आम आदमी को सरकारी दफ्तर में काम करवाना एक युद्ध के समान हो गया है.. आज पांच की आत्मा जगी है.. आने वाले दिनों में 105 की आत्मा जागेगी..

वहीं यह पहली बार नहीं है जब गुजरात में भाजपा विधायक अपनी सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं.. सितंबर 2025 में, कई विधायकों ने पत्र लिखकर भ्रष्टाचार और निष्क्रियता का आरोप लगाया था.. गुजरात समाचार की रिपोर्ट के अनुसार विधायकों ने सूरत में बाढ़ प्रबंधन की खराबी.. जिला कलेक्टर कार्यालयों में भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही.. और गिर के शेरों की मौतों का जिक्र किया था.. यहां तक कि विधायक हार्दिक पटेल ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की धमकी दी थी..

गुजरात में भाजपा की सरकार 1995 से चली आ रही है.. और वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 2021 से पद पर हैं.. 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 156 सीटें जीतीं.. जो राज्य में कुल 182 सीटों का बड़ा बहुमत है.. सरकार विकास मॉडल के लिए जानी जाती है.. लेकिन हाल के वर्षों में आंतरिक असंतोष बढ़ा है.. विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरशाही की मजबूत पकड़ के कारण जनप्रतिनिधि कमजोर पड़ रहे हैं..

जानकारी के अनुसार मई 2024 में तीन भाजपा विधायकों ने अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाए थे.. जुलाई 2025 में, पोरबंदर के विधायक अर्जुन मोधवाड़िया ने फिक्स्ड वेज पॉलिसी पर पत्र लिखने से इनकार किया.. लेकिन कहा कि उनका नाम दुरुपयोग किया गया.. ये घटनाएं दिखाती हैं कि गुजरात में विधायकों.. और अधिकारियों के बीच तनाव पुराना है..

बता दें कि बाबूशाही का मतलब है कि सरकारी अधिकारी इतने ताकतवर हो जाते हैं कि वे जनप्रतिनिधियों को भी नहीं मानते.. गुजरात में यह समस्या क्यों बढ़ रही है.. विशेषज्ञों के अनुसार अधिकारियों का ट्रांसफर और प्रमोशन मुख्यमंत्री कार्यालय से होता है.. जिससे वे विधायकों की सुनते नहीं..

सितंबर 2025 की रिपोर्ट में विधायकों ने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर कार्यालयों में बिना पैसे के काम नहीं होता.. एक व्यवसायी ने कहा कि कांग्रेस के समय से भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ा है.. सरकारी दफ्तरों में काम करवाना मुश्किल है.. यह दिखाता है कि सीएम पोर्टल पर शिकायत करने पर ही काम होता है.. जो सिस्टम की कमजोरी है.. वहीं यह सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है.. उत्तर प्रदेश में भी सीएम योगी आदित्यनाथ को जनता दरबार लगाना पड़ता है.. क्योंकि अधिकारी काम नहीं करते है..

वहीं ये मुद्दे आम आदमी को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं.. जमीन रजिस्ट्री, पुलिस FIR, सरकारी सब्सिडी.. सबमें देरी और रिश्वत की मांग आम हो गई है.. अगर विधायक खुद असहाय हैं, तो आम जनता की क्या हालत होगी.. अभी तक मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.. लेकिन अक्टूबर 2025 में डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने कहा था कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में.. हम लोगों की सेवा करने.. और अलग-अलग विभागों के सुचारू रूप से काम करने को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.. बता दें यह सामान्य बयान है.. लेकिन वर्तमान पत्र पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है..

 

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