SC ने UGC के जातिगत नियमों पर रोक लगाई, राजनीतिक दलों ने किया स्वागत
कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किया है. सपा, टीएमसी सहित कई दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे वोट-बैंक की राजनीति बताया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए जातिगत भेदभाव नियमों पर रोक लगा दी है, जिन्हें गैर-समावेशी और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखने वाला बताया गया था. कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किया है. सपा, टीएमसी सहित कई दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे वोट-बैंक की राजनीति बताया है.
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के हालिया नियम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है. इन याचिकाओं में कहा गया कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है. साथ ही कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है. कोर्ट ने नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए. कोर्ट के इस फैसले का समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत तमाम दलों ने स्वागत किया है.
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, कोर्ट यही तय करता है. कानून की भाषा और भाव साफ होना चाहिए. बात सिर्फ नियम नहीं, नीयत की भी होती है. ना किसी का उत्पीड़न हो और ना किसी के साथ अन्याय. ना किसी पर जुल्म-ज्यादती हो और ना किसी के साथ नाइंसाफी. दोषी बचे ना और निर्दोष के साथ अन्याय ना हो.
‘…तो हमने 2012 से क्या सीखा?’
अखिलेश यादव ने कहा कि 2012 में भी रेगुलेशन आए थे. 2026 में नए रेगुलेशंस आए हैं तो हमने 2012 से क्या सीखा? हमारा संविधान कहता है कि हम कहीं भेदभाव नहीं कर सकते. संविधान और तमाम कानून हैं, उसके बावजूद भी भेदभाव और अन्याय होता है,. मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. इस मामले में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया आई है.
यूजीसी की गाइडलाइन असंवैधानिक थी
बनर्जी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने सही किया क्योंकि यूजीसी की गाइडलाइन असंवैधानिक थी. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, मैं देश के प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत सभी को धन्यवाद देता हूं. मैं कोर्ट को उसके फैसले के लिए धन्यवाद देता हूं. प्रधानमंत्री ने देश में कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया. यह प्रधानमंत्री मोदी ही थे जिन्होंने ईडब्ल्यूएस को आरक्षण दिया. हम जैसे लोग सिर्फ अपने देश के लोगों के लिए जीते हैं.
इस नियम की कोई जरूरत नहीं थी
यूजीसी गाइडलाइंस पर रोक लगने पर राजस्थान ब्राह्मण महासभा का भी बयान आया है. महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, इस नियम की कोई जरूरत नहीं थी. यह साफ है कि यह वोट-बैंक की राजनीति है, जो गलत है. यह जातिवाद. जब तक इसे बढ़ावा देते रहेंगे, असमानता ही बढ़ेगी. सब कुछ पर्दे के पीछे हो रहा है और सिर्फ ऊंची जातियों को दबाया जा रहा है. ऊंची जातियों को समझ आ गया है कि उनके वोट कमजोर हैं, इसीलिए उन्हें दबाया जा रहा है. यह पॉलिसी पूरी तरह गलत है.



