देश की शिक्षा व्यवस्था चरमराई? 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर

शिक्षा मंत्रालय की तरफ संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक देश में 2025-26 में 1,00,843 सिंगल टीचर स्कूल हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शिक्षा मंत्रालय की तरफ संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक देश में 2025-26 में 1,00,843 सिंगल टीचर स्कूल हैं.

सबसे ज्यादा सिंगल टीचर वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है. फिर झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का नंबर आता है.

देश में नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत हर बच्चे को क्वॉलिटी एजुकेशन देने का लक्ष्य है. लेकिन 29 जुलाई को राज्यसभा में सांसद रणदीप सुरजेवाला के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय का आया जवाब कुछ अलग ही कहानी बताती है. एजुकेशन मिनिस्ट्री के मुताबिकदेश में 2025-26 के दौरान 1,00,843 ऐसे स्कूल हैं, जहां पूरे स्कूल को संभालने के लिए सिर्फ एक ही शिक्षक है.इसका साफ अर्थ है कि लाखों बच्चों की पढ़ाई सिर्फ एक ही शिक्षक के जरिए चल रही है.

वहीं, नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे बच्चों के नामांकन में 2.26 करोड़ की कमी आई है. सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख से घटकर 10.13 लाख हो गई है, जबकि निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी है.

क्या होते हैं सिंगल टीचर स्कूल?

जहां सिर्फ एक ही शिक्षक पूरे स्कूल को संभालने के लिए हो, उसे सिंगल टीचर स्कूल कहते हैं. वही एक टीचर सभी कक्षाओं को पढ़ाने, बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने, मिड-डे मील की निगरानी, प्रशासनिक कार्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित पूरा काम करता है. अगर वह शिक्षक अवकाश पर चला जाए या फिर ट्रेनिंग और किसी अन्य सरकारी आदेशों के तहत किसी काम में लग जाए तो स्कूल की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है.
देश में कितने हैं ऐसे स्कूल?

शिक्षा मंत्रालय ने UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर बताया कि पूरे देश में 1,00,843 सिंगल टीचर स्कूल हैं. सबसे ज्यादा सिंगल टीचर वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है. फिर झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का स्थान आता है. वहीं कम सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या अंडमान एवं निकोबार में, दिल्ली में 7, लद्दाख में 28, सिक्किम में 31, नागालैंड में 35 और केरल में 67 है.

सबसे ज्यादा सिंगल टीचर स्कूल वाले राज्य?

आंध्र प्रदेश 16,357

झारखंड 9,827

महाराष्ट्र 9,269

कर्नाटक 8,042

उत्तर प्रदेश 7,874

राजस्थान 7,200

पश्चिम बंगाल 6,769

तेलंगाना 4,793

तमिलनाडु 3,957

असम 3,159
सिंगल टीचर स्कूल होने के पीछे क्या वजहें हैं?

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऐसा होने के पीछे कई वजहें हैं. शिक्षकों का रिटायर होने, इस्तीफा देने, नए पदों का समय पर सृजन न होने, भर्ती प्रक्रिया में देरी, छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों का रिअप्वाइंटमेंट ना होना. दूरदराज, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति की चुनौती. शिक्षा मंत्रालय का यह भी कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, तैनाती और सेवा संबंधी जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है ना कि भारत सरकार की.

सिंगल टीचर स्कूल के चलते क्या-क्या समस्याएं आती हैं?

मल्टीग्रेड क्लासरूम में हर बच्चे को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.

पढ़ाई की गुणवत्ता में कमी आ सकती है. बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो सकते हैं

प्रशासनिक कामों में समय जाने से पढ़ाने का समय कम हो जाता है

शिक्षक पर मानसिक और कार्यभार का दबाव बढ़ जाता है

देश में छात्र-शिक्षक अनुपात कितना है?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में इस बात का साफ जिक्र किया गया था कि हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने चाहिए. इसमें सामान्य क्षेत्रों में 30:1 का छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) बनाए रखने का लक्ष्य है. वहीं, सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों में यह अनुपात 25:1 होना चाहिए.शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि UDISE+ 2025-26 के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारित मानकों के भीतर है.

प्राथमिक स्तर- 19:1

उच्च प्राथमिक- 17:1

माध्यमिक- 15:1

उच्च माध्यमिक – 23:1

फिलहाल छात्र-शिक्षक अनुपात का राष्ट्रीय औसत बेहतर नजर आ रहा है, लेकिन सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या कुछ औस संकेत देते हैं. इसका साफ अर्थ यह है कि औसत आंकड़े स्थानीय समस्याओं को पूरी तरह नहीं दिखा रहे हैं.

सरकार सिंगल टीचर स्कूलों की चुनौती से निपटने के लिए क्या कर रही है?

शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि केंद्र सरकार समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खाली पद भरने के लिए सलाह देती है. इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक वह पारदर्शी और मेरिट आधारित शिक्षक भर्ती पर जोर दे रही है. भर्ती प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करवा रही है. शिक्षक आवश्यकता का तकनीक आधारित आकलन कर रही है. समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दी जा रही है. RTE कानून के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है. शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए NISHTHA कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके अलावा DIKSHA प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल प्रशिक्षण और ई-कंटेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

क्या सिर्फ शिक्षकों की भर्ती से समस्या खत्म होगी?

शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से तैनाती

दूरदराज क्षेत्रों में सेवा के लिए प्रोत्साहन

समय से भर्तियां

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

डिजिटल शिक्षा पर जोर

इन हालात में नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को हासिल करना क्यों मुश्किल है?

भारत में शिक्षा व्यवस्था में लगातार किए जा रहे सुधारों के प्रयासों के बावजूद एक लाख से अधिक सिंगल टीचर स्कूल यह बताते हैं कि जमीनी स्तर पर शिक्षक उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को ताजा हालातों के जरिए नहीं हासिल किया जा सकता है. बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिले, इसके लिए सिंगल टीचर स्कूल जैसी स्थानीय चुनौतियों से छुटकारा पाना होगा.

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