चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सुप्रीम कोर्ट में बहस, अब 14 मई को होगी अगली सुनवाई
Supreme Court of India में गुरुवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: Supreme Court of India में गुरुवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं की ओर से कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है।
यह मामला उस कानून से जुड़ा है जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दायर अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि नया कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि नियुक्ति समिति की संरचना ऐसी होनी चाहिए जिसमें कार्यपालिका का अत्यधिक प्रभाव न हो।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है और आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखना संविधान की मूल भावना का हिस्सा है। उन्होंने दलील दी कि नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता जरूरी है ताकि चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा कायम रहे।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कानून का बचाव करते हुए कहा गया कि संसद को कानून बनाने का पूरा अधिकार है और नया प्रावधान संवैधानिक ढांचे के अनुरूप है। सरकार ने यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बनाए गए प्रावधान लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
गौरतलब है कि इस कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में लंबे समय से बहस जारी है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
इससे पहले भी Election Commission of India की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण टिप्पणियां कर चुका है। अदालत ने पूर्व में कहा था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र चुनाव आयोग बेहद आवश्यक है।
अब इस मामले पर सभी की नजरें 14 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में अदालत इस कानून की संवैधानिक वैधता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अहम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा कर सकती है।



