बांदा के स्कूल में बच्चों से बालू ढुलवाने का आरोप, वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप

बांदा के कम्पोजिट विद्यालय अछरौड़ में बच्चों से बालू ढुलवाने का आरोप सामने आया है। वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है और प्रशासन से जांच व दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बुंदेलखंड के बांदा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने ‘शिक्षा के मंदिर’ की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां बच्चों को किताबों और कक्षा में होना चाहिए, वहां उनसे श्रम कराए जाने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कम्पोजिट विद्यालय अछरौड़ में सामने आया मामला

घटना बांदा जिले के कम्पोजिट विद्यालय अछरौड़ की बताई जा रही है, जहां 30 अप्रैल 2026 को छात्र-छात्राओं से कथित तौर पर बालू ढुलवाने का काम कराया गया। इस मामले की शिकायत गांव के निवासी महेंद्र पुत्र रामपाल ने की है। महेंद्र का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को रोज की तरह स्कूल भेजा था, लेकिन वहां पढ़ाई के बजाय उनसे श्रम कराया गया। यह आरोप सामने आने के बाद पूरे गांव में नाराजगी देखने को मिल रही है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता

ग्रामीणों के मुताबिक, इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों को बालू ढोते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामला तूल पकड़ने लगा। मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है, जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है।

शिक्षा के अधिकार पर सवाल

ग्रामीणों ने इस घटना को बच्चों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जोड़ते हुए कहा कि स्कूल में इस तरह का श्रम कराना पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि इससे बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यालयों में बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के भी विपरीत है।

जांच और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता महेंद्र ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में कोई शिक्षक या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए।

प्रशासन की भूमिका पर नजर

इस मामले के सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि जांच कितनी पारदर्शी और समयबद्ध होती है।

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, क्या स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर पर्याप्त निगरानी है? और अगर नहीं, तो इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? बांदा का यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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