ईरान की मिसाइल ड्रोन क्षमता से ट्रंप चिंतित, महाडील की तैयारी में

ट्रंप व्हाइट हाउस के मंच से तो दहाड़ रहे हैं, लेकिन एक्सियोस (Axios) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक 'महा-डील' करने के लिए बेताब है। ट्रंप ने अपनी सारी ज़िद छोड़ दी है और सिर्फ एक 'सीक्रेट शर्त' रखी है।

4pm न्यूज नेटवर्क: ट्रंप व्हाइट हाउस के मंच से तो दहाड़ रहे हैं, लेकिन एक्सियोस (Axios) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक ‘महा-डील’ करने के लिए बेताब है। ट्रंप ने अपनी सारी ज़िद छोड़ दी है और सिर्फ एक ‘सीक्रेट शर्त’ रखी है।

लेकिन खेल यहाँ खत्म नहीं होता। एक तरफ ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन ताकत को मटियामेट कर दिया है, तो दूसरी तरफ ईरान ने महज़ कुछ ही मिनटों में इज़राइल पर मिसाइलों की ऐसी बारिश की है कि नेतन्याहू का ‘आयरन डोम’ भी पानी भरता नज़र आ रहा है। क्या ट्रंप हार मान चुके हैं? क्या यह ‘सुपरपावर’ का अंत है?

एक्सियोस की रिपोर्ट ने वॉशिंगटन से लेकर यरुशलम तक हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अब इस जंग से अपना पीछा छुड़ाना चाहते हैं। खबर है कि ट्रंप ने ईरान को एक ‘फाइनल ऑफर’ भेजा है कि— “सब कुछ भूल जाओ, बस ये एक शर्त मान लो।” ट्रंप सार्वजनिक मंचों पर भले ही ‘तुर्रम खां’ बने फिर रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे वे किसी भी कीमत पर सीज़फायर की कोशिश कर रहे हैं।

हाल ही में खबर लीक हुई है कि पेंटागन से लेकर तेहरान तक, बंद कमरों में गुप्त मुलाकातें चल रही हैं और दोनों देशों के बीच एक ‘महा-डील’ पर रज़ामंदी भी हो चुकी है। एक्सियोस के मुताबिक, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसी बिसात तैयार हो रही है, जो पूरी दुनिया की किस्मत बदल सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब न्यूक्लियर बम की धमकियों से हटकर ‘होर्मुज स्ट्रेट जलमार्ग’ को खुलवाने के लिए समझौते की मेज़ पर उतर आया है। व्हाइट हाउस के भीतर और बाहर चल रही इन गुप्त चर्चाओं में सबसे बड़ा मुद्दा ‘युद्धविराम’ है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने शर्त रखी है कि अगर वह दुनिया की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले होर्मुज रास्ते को मुक्त और साफ़ कर देता है, तो अमेरिका अपनी घातक बमबारी तुरंत रोक देगा।

हालांकि यह साफ़ नहीं है कि ट्रंप के अधिकारी ईरान से सीधे बात कर रहे हैं या ओमान और कतर जैसे मध्यस्थों के ज़रिए, लेकिन इतना तय है कि ट्रंप खुद इस डील को फाइनल करने के लिए प्रशासन के भीतर लगातार मीटिंग्स कर रहे हैं। माना जा रहा था कि ट्रंप आज सुबह अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जंग को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान कर सकते थे, लेकिन उन्होंने फिलहाल ऐसा नहीं किया।

ट्रंप ने आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में होर्मुज का मुद्दा वहां से गुजरने वाले देशों पर छोड़ दिया और इसके लिए ब्रिटेन और फ्रांस के प्रमुख 35 देशों के साथ बैठक करने वाले हैं। इज़रायल चाहता है कि ट्रंप ईरान को और कुचलें, लेकिन व्हाइट हाउस का एक धड़ा अब इस जंग से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है।

ट्रंप खुद ईरान में अपने सारे मकसद बीच में छोड़-छाड़ कर भाग रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने आज सुबह के भाषण में यह जताने की कोशिश की कि ईरान ‘आत्मसमर्पण’ को तैयार हो गया है। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा— “ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति, जो उतने रेडिकल नहीं हैं, उन्होंने अभी-अभी संयुक्त राज्य अमेरिका से युद्धविराम की गुहार लगाई है। हम इस पर तभी विचार करेंगे जब होर्मुज स्ट्रेट खुला, स्वतंत्र और साफ़ होगा, तब तक हम ईरान को पत्थर युग में भेजने तक बमबारी जारी रखेंगे।”

ईरान ने ट्रंप के इस बयान को फौरन झूठा साबित कर दिया। विदेश मंत्री अराघची ने साफ़ कहा कि— “हमें अमेरिका के साथ कोई सीज़फायर नहीं चाहिए और होर्मुज अमेरिका के लिए नहीं खुलेगा।” हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कुछ समय पहले यूरोपीय नेताओं से बातचीत में संकेत दिए थे कि अगर अमेरिका हमलों के रुकने की गारंटी दे, तो वे युद्ध खत्म करने को तैयार हैं।

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएई और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ भी बात की है, जिसमें ट्रंप ने सलमान को संभावित ‘सीज़फायर’ की चल रही चर्चा पर ब्रीफ किया है। ट्रंप और सऊदी प्रिंस की यह बातचीत संकेत दे रही है कि अमेरिका अब होर्मुज को फिर से खुलवाने और युद्ध को इज़्ज़त के साथ खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे से ‘महा-डील’ की ज़मीन तैयार कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज यानी गुरुवार की सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को ईरान जंग में ‘जीत’ मिली है। साथ ही चेतावनी दी कि अमेरिका 2-3 हफ्ते में ईरान पर बड़ा हमला करेगा। ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान की मिसाइल-ड्रोन क्षमता और नौसेना खत्म हो गई है और उनकी सैन्य ताकत काफी कमज़ोर हो चुकी है।

ट्रंप ने यह भी गीदड़भभकी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एज’ यानी पाषाण काल में भेज देगा। हालांकि उन्होंने यह दावा भी किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर है।

अब ये बातें कितनी सही हैं, यह कह पाना मुश्किल है; क्योंकि ज़मीन पर ऐसा कुछ दिख नहीं रहा। ईरान अभी भी इज़राइल और मिडिल ईस्ट में लगातार मिसाइल अटैक कर रहा है। आज भी जब ट्रंप दावा कर रहे थे कि ईरान की नेवी और मिसाइलें खत्म हो गई हैं, ठीक उसी समय ईरान ने इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। ईरान के सरकारी टीवी ने दावा किया कि ये मिसाइलें ट्रंप के उसी झूठ का करारा जवाब हैं।

ट्रंप कह रहे थे कि ईरान खत्म हो गया, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की मिसाइलें आज भी इज़राइल के सीने को छलनी कर रही हैं। ट्रंप और नेतन्याहू की यह जोड़ी सिर्फ अपनी जनता को गुमराह कर रही है, क्योंकि शायद अब उनका ‘सुपरपावर’ वाला ढोल बुरी तरह फट चुका है। पूरी दुनिया को उम्मीद थी कि ट्रंप आज जंग खत्म करने का ऐलान करेंगे, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो कई देशों के शेयर मार्केट में भूचाल आ गया और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से आग लगनी शुरू हो गई है। दुनिया महामंदी की तरफ तेज़ी से बढ़ रही है।

इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा फजीहत बेंजामिन नेतन्याहू की हो रही है। नेतन्याहू चाहते थे कि अमेरिका उनके लिए ईरान को साफ़ कर दे, लेकिन ट्रंप तो खुद भागने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। नेतन्याहू अब ट्रंप को ब्लैकमेल कर रहे हैं कि अगर अमेरिका पीछे हटा, तो इज़राइल अकेले इस आग को और भड़काएगा। नेतन्याहू को डर है कि जिस दिन जंग रुकी, उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इसलिए वे मासूमों का खून बहाकर अपनी सत्ता बचा रहे हैं। ट्रंप और नेतन्याहू—ये दो ऐसे लोग हैं जिन्हें न तो अपनी फौज की फिक्र है और न ही बेगुनाह लोगों की। ये सिर्फ अपनी कुर्सियों के लिए पूरी दुनिया की इकोनॉमी को दांव पर लगा चुके हैं।

ट्रंप ने सोचा था कि वे बहरीन और यूएई जैसे देशों को आगे करके खुद पीछे हो जाएंगे। लेकिन जैसे ही बहरीन ने होर्मुज में ‘सरपंच’ बनने की कोशिश की, रूस और चीन ने वो तेवर दिखाए कि बहरीन के पसीने छूट गए। रूस और चीन ने साफ़ कर दिया है कि अगर किसी ने भी ईरान पर हमला किया, तो अंजाम बहुत बुरा होगा। चीन ने अपनी ‘सप्लाई लाइन’ का डर दिखाया और रूस ने अपनी ‘हाइपरसोनिक मिसाइलों’ का। नतीजा यह हुआ कि बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र में अपना वह सख्त प्रस्ताव ही बदल दिया जिसमें ईरान पर सैन्य कार्रवाई की बात थी। ट्रंप साहब, जब आपके साये में रहने वाले देश भी रूस-चीन की एक झिड़की से डर जाएं, तो समझ लीजिए कि आपकी ‘दादागिरी’ खत्म हो चुकी है।

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