उमरेठ उपचुनाव में वोटिंग पूरी, BJP vs कांग्रेस में सीधी टक्कर, किसके सिर सजेगा ताज?
गुजरात के आणंद जिले की उमरेठ विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया है... यह सीट बीजेपी विधायक गोविंद परमार...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के आणंद जिला की उमरेठ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है.. बृहस्पतिवार को इस सीट के लिए मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ.. यह उपचुनाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.. क्योंकि पिछले महीने भारतीय जनता पार्टी के विधायक गोविंद परमार के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी.. उनके निधन के चलते चुनाव आयोग को यहां उपचुनाव कराने का निर्णय लेना पड़ा..
वहीं इस बार का चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है.. बल्कि इसे राज्य में राजनीतिक ताकत की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है.. एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा है.. जो इस सीट को बरकरार रखना चाहती है.. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस मौके को भुनाकर वापसी की कोशिश में है.. उमरेठ सीट पर इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है.. भाजपा ने दिवंगत विधायक के बेटे हर्षद गोविंदभाई परमार को मैदान में उतारा है.. पार्टी ने सहानुभूति लहर और पारिवारिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें टिकट दिया है..
वहीं कांग्रेस ने भृगुराजसिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है.. जो क्षेत्र में अपनी पकड़ और संगठनात्मक अनुभव के लिए जाने जाते हैं.. कांग्रेस को उम्मीद है कि स्थानीय मुद्दों.. और असंतोष के आधार पर वह भाजपा को कड़ी चुनौती दे पाएगी.. इसके अलावा, तीन निर्दलीय उम्मीदवार और एक अन्य पार्टी का प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं.. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि.. असली लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीमित है..
आपको बता दें कि बृहस्पतिवार को सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली.. युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया.. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे.. ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.. कई मतदान केंद्रों पर शुरुआती घंटों में लंबी कतारें देखने को मिलीं.. जिससे यह संकेत मिला कि मतदाताओं में इस चुनाव को लेकर उत्साह है.. चुनाव आयोग ने भी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी.. और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखी..
उमरेठ विधानसभा सीट का उपचुनाव कई कारणों से अहम माना जा रहा है.. सत्ताधारी पार्टी की यह सबसे बड़ी परीक्षा है.. भाजपा के लिए यह सीट बचाना प्रतिष्ठा का सवाल है.. क्योंकि यह सीट पहले उनके पास थी.. कांग्रेस इस चुनाव को वापसी के अवसर के रूप में देख रही है.. इस चुनाव में स्थानीय समस्याएं जैसे सड़क, पानी, रोजगार और कृषि से जुड़े मुद्दे भी अहम भूमिका निभा रहे हैं..
भाजपा जहां सहानुभूति लहर पर भरोसा कर रही है.. वहीं कांग्रेस सरकार के कामकाज को मुद्दा बना रही है.. भाजपा ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है.. पार्टी के कई बड़े नेताओं ने क्षेत्र में प्रचार किया.. भाजपा ने विकास कार्यों, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं और दिवंगत विधायक के कामों को प्रमुख मुद्दा बनाया.. इसके अलावा, भाजपा ने भावनात्मक जुड़ाव पर भी जोर दिया.. पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि दिवंगत विधायक के परिवार को समर्थन देना जनता का कर्तव्य है..



