TMC ऑफिस पर किसका होगा कब्जा? कोलकाता में बढ़ा सियासी संग्राम
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की जंग तेज हो गई है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया है,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की जंग तेज हो गई है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया है, जिससे ममता बनर्जी समर्थकों में आक्रोश है. इस घटना के बाद पार्टी कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
पश्चिम बंगाल में असली टीएमसी की जंग तेज हो गई है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया है. जिस पर ममता बनर्जी वाले गुट ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसका विरोध किया है. हालांकि तनाव के चलते कोलकाता के EM बाईपास स्थित पार्टी के मेट्रोपॉलिटन राज्य कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कार्यालय के बाहर CRPF और कोलकाता पुलिस को तैनात किया गया है. इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
जानकारी के मुताबिक विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट द्वारा मुख्यालय पर कब्जा करने के दावों के बाद कार्यालय के बाहर CRPF और कोलकाता पुलिस की तैनाती की गई. बागी गुट ने वरिष्ठ नेताओं फिरहाद हकीम, जावेद खान और अखरुज्जमान के साथ ईएम बाईपास स्थित पार्टी कार्यालय में प्रवेश किया. यह कार्यालय साल 2022 से टीएमसी की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
बागी गुट का दावा
बागी गुट का दावा है कि बिल्डिंग की पुरानी लीज समाप्त हो चुकी थी और अब नई लीज उनकी वर्किंग कमेटी के नाम पर कराई गई है. बागियों ने कार्यालय के साइनबोर्ड बदल दिए और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह नया अध्यक्ष बताते हुए बैनर भी लगा दिया.
‘यह हमारा पार्टी कार्यालय है’
MLA अखरुज्जमान ने कहा ‘यह हमारा पार्टी कार्यालय है और यह हमारा ही पार्टी कार्यालय रहेगा. मुख्य द्वार की चाबी हमारे पास ही रहेगी’. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो कार्यालय में लगी ममता बनर्जी की तस्वीरों का सम्मान करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते.
ममता बनर्जी गुट में आक्रोश
इस नाटकीय तख्तापलट ने ममता बनर्जी के वफादार खेमे में तत्काल आक्रोश पैदा कर दिया, जिसके चलते वरिष्ठ नेता सड़कों पर उतर आए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पार्टी के दिग्गज नेताओं ने बागी गुट की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए जमकर निशाना साधा.
केंद्र सरकार पर हमला
वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि CRPF विद्रोहियों के लिए ढाल के रूप में काम करने के लिए कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गई. उन्होंने कहा ‘बंगाल में हमारे पार्टी के कम से कम एक लाख कार्यालय वर्तमान में बंद हैं और हमारे सदस्यों को उत्पीड़न, गुंडागर्दी और पुलिस हमलों का सामना करना पड़ रहा है. बीजेपी से कोई भी उनकी सुरक्षा के लिए नहीं गया’. मित्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि बागी गुट भगवा पार्टी की B-टीम के रूप में मिलीभगत से काम कर रहा है.
‘पार्टी इस जबरन कब्जा बर्दाश्त नहीं करेगी’
वहीं TMC नेता और वरिष्ठ वकील बिस्वानोर चट्टोपाध्याय ने कहा कि पार्टी इस जबरन कब्जा बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा ‘निष्कासित सदस्यों ने अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जबरन पार्टी कार्यालय में प्रवेश किया. इस कार्यालय पर ममता बनर्जी का चिन्ह और चेहरा अंकित है. अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की पहचान केवल उनके चेहरे से ही होती है’.
‘कोर्ट और जनता की अदालत में लड़ेंगे’
इधर TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए विपक्ष को अपराधी घुसपैठिया करार दिया. बनर्जी ने असंतुष्टों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा ‘सिर्फ इसलिए कि कुछ गुंडों ने पार्टी बना ली है, क्या हमें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए? खेल की शुरुआत तुमने की है, लेकिन इसे हम खत्म करेंगे. यह लड़ाई हम दो जगह लड़ेंगे कानून की अदालत में और जनता की अदालत में’.
चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
कोलकाता पुलिस ने कहा है कि नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति देने से पहले वो बिल्डिंग के स्वामित्व और लीज दस्तावेजों की जांच करेगी. हालांकि असली लड़ाई अब दिल्ली शिफ्ट हो गई है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट दोनों को 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर अपना-अपना संगठनात्मक दावा पेश करने का निर्देश दिया है.
बागी गुट ने एक दिन पहले ही दिल्ली में चुनाव आयोग में याचिका दायर कर 28 साल पुरानी पार्टी के नाम, फंड और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पर दावा किया था. अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर हैं, क्योंकि इससे तय होगा कि बंगाल में सत्ता में मौजूद TMC का असली मालिक कौन है.



