TMC के 8 सांसदों की हुई गिरफ्तारी। भड़कीं Mamata, निकाला पैदल मार्च, BJP पर साधा निशाना!
इस साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य का सियासी पारा हाई है...आए दिन किसी न किसी वजह से पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहमागहमी का माहौल देखने को मिलता ही रहता है...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इस साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य का सियासी पारा हाई है…आए दिन किसी न किसी वजह से पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहमागहमी का माहौल देखने को मिलता ही रहता है…
इसी कड़ी में आज एक बार फिर से पश्चिम बंगाल की राजनीति उबाल पर है…जहां ED की कार्रवाई के बाद TMC और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गई है…TMC के IT सेल प्रमुख से जुड़े ठिकानों पर ED की रेड को पार्टी ने सीधे तौर पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है…इसी के विरोध में TMC ने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सड़क पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया…पार्टी का आरोप है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को डराने और दबाने की कोशिश कर रही है…
दिल्ली में इस सियासी टकराव की शुरुआत आज सुबह हुई…जब TMC के 8 सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऑफिस के बाहर यानी गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे…इस दौरान TMC सांसदों का कहना था कि वो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे…लेकिन उन्हें जबरन रोका गया….प्रदर्शन में डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे बड़े और मुखर चेहरे शामिल थे…जहां सांसदों ने मोदी-शाह के खिलाफ जमकर नारे लगाए….जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने सांसदों को वहां से हटाने की कोशिश की…..इसी दौरान खूब धक्का-मुक्की हुई…कुछ सांसद जमीन पर गिर गए……जिनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए….जिनमें चुने हुए सांसदों के साथ सख्ती करते सुरक्षाकर्मी दिखे…..बता दें कि सुबह करीब 10 बजे सभी 8 सांसदों को हिरासत में ले लिया गया और दोपहर 12 बजे रिहा किया गया….वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया…
महुआ मोइत्रा का बयान इस टकराव की प्रतीक बन गया….जिसमें उन्होंने कहा कि….देखिए चुने हुए सांसदों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है…क्या अब लोकतंत्र में सवाल पूछना भी अपराध हो गया है?…TMC का आरोप है कि भाजपा सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है…पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सांसद ही सुरक्षित नहीं हैं…तो आम नागरिकों की हालत क्या होगी….दिल्ली की घटना की गूंज सीधे कोलकाता तक पहुंची….मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बंगाल की अस्मिता पर हमला करार दिया….गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही ममता बनर्जी खुद सड़क पर उतर आईं….कोलकाता में उन्होंने पैदल मार्च निकाला….जिसमें हजारों कार्यकर्ता और पार्टी नेता शामिल हुए….हाथों में तख्तियां, नारों की गूंज और सीएम ममता बनर्जी का आक्रामक तेवर….ये साफ संकेत था कि TMC इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है…
सीएम ममता बनर्जी का हमला सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा….उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखा बयान जारी किया….जिसमें ममता बनर्जी ने लिखा कि….मैं हमारे सांसदों के साथ किए गए शर्मनाक और गलत बर्ताव की कड़ी निंदा करती हूँ। गृह मंत्री के ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून लागू करना नहीं है…यह वर्दी में घमंड है। यह लोकतंत्र है, बीजेपी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं।
आगे सीएम ममता ने लिखा कि…लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता। जब बीजेपी नेता विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो वो रेड कार्पेट और खास सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। जब विपक्षी सांसद अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें घसीटा जाता है, हिरासत में लिया जाता है और अपमानित किया जाता है। ये दोहरा मापदंड बीजेपी के लोकतंत्र के विचार को दिखाता है…आज्ञाकारिता, विरोध नहीं।
ममता बनर्जी यहीं नहीं रूकीं आगे उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि….ये साफ हो जाना चाहिए कि सम्मान आपसी होता है। आप हमारा सम्मान करेंगे, हम आपका सम्मान करेंगे। आप हमें सड़क पर घसीटेंगे, और हम आपको सहिष्णुता, असहमति और लोकतांत्रिक नैतिकता के संवैधानिक विचार पर वापस लाएंगे। ये हमारा भारत है। हम अधिकार से नागरिक हैं, किसी कुर्सी, बैज या सत्ता की स्थिति की दया पर नहीं। कोई भी सरकार, कोई भी पार्टी और कोई भी गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में गरिमा का हकदार कौन है।
ममता बनर्जी का ये बयान भाजपा के खिलाफ सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है…जिसमें सीएम ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में भाजपा पर लोकतंत्र कुचलने का आरोप लगाया…उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं…केंद्रीय एजेंसियां विपक्षी दलों को निशाना बनाने लगती हैं…यही नहीं सीएम ममता का दावा है कि बंगाल में भाजपा राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ चुकी है…इसलिए वो ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का सहारा ले रही है…
TMC के लिए ये मुद्दा सिर्फ एक Raid का नहीं है…पार्टी इसे बंगाल बनाम दिल्ली की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है…..ममता बनर्जी लंबे समय से खुद को भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरे के तौर पर स्थापित करती रही हैं…ऐसे में सांसदों की गिरफ्तारी ने उन्हें एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है और भाजपा की मुश्किलें यहीं से बढ़ती नजर आती हैं…..विपक्ष का कहना है कि भाजपा की कठोर कार्रवाई अब उल्टा असर डाल रही है…..दिल्ली में सांसदों की गिरफ्तारी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं….कई राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने भी सवाल उठाए कि क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अब अपराध बन गया है….
राजनीतिक विशलेषज्ञों का कहना है कि भाजपा की बखिया खुद भाजपा की नीतियों ने उधेड़ दी है….उनका आरोप है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है…वहीं TMC का दावा है कि भाजपा बंगाल में राजनीतिक जमीन खो चुकी है और यही वजह है कि वो दमन की राजनीति अपना रही है…..इसके साथ ही इस पूरे घटनाक्रम में ईडी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है….विपक्ष लगातार ये आरोप लगाता रहा है कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां अब स्वतंत्र नहीं रहीं….आंकड़े भी विपक्ष के दावे को हवा देते हैं…पिछले कुछ सालों में एजेंसियों की ज्यादातर कार्रवाइयां विपक्षी नेताओं पर ही हुई हैं…TMC इसे चुनावी हथियार बता रही है….
वहीं भाजपा की तरफ से हालांकि पलटवार भी किया गया…पार्टी का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से जांच करने दी जानी चाहिए…भाजपा नेताओं का आरोप है कि ममता बनर्जी जांच से बचने के लिए सड़कों पर उतरकर दबाव बना रही हैं…लेकिन सवाल ये है कि क्या चुने हुए सांसदों की गिरफ्तारी इस दलील को मजबूत करती है या कमजोर?…….राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ये टकराव 2026 के बंगाल चुनाव से पहले की रणनीतिक लड़ाई है….जहां सीएम ममता बनर्जी हर उस मौके को भुनाना चाहती हैं…जिससे भाजपा को तानाशाही के तौर पर पेश किया जा सके…वहीं भाजपा ये संदेश देना चाहती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है…….लेकिन जमीनी सच्चाई ये भी है कि तस्वीरों और वीडियो ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है…जिस तरह से सांसदों के गिरने, धक्का-मुक्की और हिरासत की खबरें आम मतदाता के मन में सवाल पैदा कर रही हैं…यही वजह है कि सीएम ममता बनर्जी इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक बनी हुई हैं…
कोलकाता का पैदल मार्च सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश है….जिसके जरिए सीएम ममता बनर्जी ने दिखा दिया कि वो न सिर्फ बयानबाज़ी करती हैं….बल्कि सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने को भी तैयार हैं….उनका ये तल्ख रवैया उन्हें भाजपा विरोधी खेमे में और मजबूत करती है…
कुल मिलाकर, TMC सांसदों की गिरफ्तारी ने सीएम ममता बनर्जी को भाजपा की जमकर क्लास लगाने का मौका दे दिया है…शाह के ऑफिस के बाहर हुई कार्रवाई को उन्होंने लोकतंत्र पर हमला बताकर भाजपा की रणनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है…..ऐसे में सवाल अब ये नहीं है कि ईडी की Raid सही थी या नहीं, बल्कि सवाल ये है कि क्या केंद्र सरकार विरोध की आवाज को कुचलने की कीमत पर सत्ता की लड़ाई लड़ रही है?…आने वाले दिनों में ये सियासी संग्राम और भी तेज होगा….दिल्ली से कोलकाता तक खिंची ये लड़ाई अब सिर्फ एक राज्य की नहीं….बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र, एजेंसियों और सत्ता के संतुलन की बहस को नई धार देने वाली है….ऐसे में देखने वाली बात होगी कि सीएम ममता बनर्जी इस लड़ाई को कबतक लड़ती हैं और भाजपा सीएम ममता बनर्जी के वार के खुद को कैसे बचाती है?.


