किसान-युवा संकट में, BJP नेताओं की संपत्ति दोगुनी? AAP का सरकार पर तीखा हमला

जहां एक तरफ किसानों की आय दोगुनी होने और युवाओं को रोजगार मिलने के वादे अधूरे दिख रहे हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों से आने वाले आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है.. और उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी होने का वादा पूरा नहीं हुआ.. युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा.. लेकिन BJP के नेताओं की संपत्ति हर साल दोगुनी होती जा रही है.. गुजरात की आदिवासी जनता की हालत खराब है.. जबकि BJP नेता लगातार अमीर होते जा रहे हैं.. और यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया.. आपको बता दें कि चैतर वसावा गुजरात विधानसभा के सबसे युवा सदस्य हैं.. और डेडियापाडा सीट से AAP के विधायक हैं.. अक्सर आदिवासी मुद्दों पर आवाज उठाते रहते हैं..

बता दें कि चैतर वसावा का जन्म गुजरात के आदिवासी इलाके में हुआ.. वे आदिवासी समुदाय से आते हैं.. और AAP में शामिल होने से पहले आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं… 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने BJP को हराकर जीत हासिल की.. उनका हालिया बयान X पर पोस्ट किया गया.. जिसका हिंदी में मतलब है कि किसानों की आय दोगुनी हो या न हो… युवाओं को रोजगार मिले या न मिले.. लेकिन BJP नेताओं को समय पर मलाई मिलती रहती है.. जिससे उनकी संपत्ति हर साल दोगुनी हो जाती है.. गुजरात की आदिवासी जनता बेहाल है.. लेकिन BJP नेताओं की आय लगातार बढ़ रही है..

जानकारी के मुताबिक यह बयान गुजरात के आदिवासी बहुल जिलों जैसे भरूच, नर्मदा और दाहोद में खासतौर पर गूंज रहा है.. गुजरात में आदिवासी आबादी कुल जनसंख्या का करीब 15% है.. और ये इलाके प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हैं.. लेकिन गरीबी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.. BJP सरकार पर आरोप है कि वह आदिवासी हितों की अनदेखी कर रही है.. और कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचा रही है..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का वादा किया था.. यह लक्ष्य किसानों की असली आय (मुद्रास्फीति को घटाकर) को दोगुना करना था.. नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की एक रिपोर्ट के मुताबिक.. 2014-15 से 2023-24 के बीच किसानों की आय 126% बढ़ी है.. यह लक्ष्य से 26% ज्यादा है.. लेकिन यह नाममात्र की आय (बिना मुद्रास्फीति घटाए) पर आधारित है.. असली आय में वृद्धि कम है.. राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफिस के आंकड़ों से पता चलता है कि 2013 से 2019 तक किसान परिवारों की आय 59% बढ़ी.. लेकिन 2022 तक दोगुनी नहीं हुई..

गुजरात में स्थिति और भी खराब है.. यहां आदिवासी किसान ज्यादातर छोटे जोत वाले हैं.. और सूखे, बाढ़ जैसी समस्याओं से प्रभावित होते हैं.. 2025 की एक रिपोर्ट में कहा गया कि किसानों की आय में वृद्धि हुई है.. लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोगुनी नहीं हुई.. गुजरात के आदिवासी इलाकों में किसान मुख्य रूप से मक्का, कपास और सब्जियां उगाते हैं.. लेकिन बाजार में उचित दाम नहीं मिलता.. मनरेगा जैसी योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं.. चैतर वसावा ने खुद मनरेगा घोटाले का मुद्दा उठाया था.. जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार भी किया गया..

सरकार ने किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और सिंचाई योजनाओं से मदद की बात कही है.. लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये योजनाएं ठीक से लागू नहीं हो रही.. 2025 के बजट में कृषि पर जोर दिया गया.. लेकिन ग्रामीण गरीबी अभी भी बनी हुई है.. एक अध्ययन में पाया गया कि किसानों की आय गैर-कृषि मजदूरों से कम है.. जिससे गांवों से पलायन बढ़ रहा है.. गुजरात के आदिवासी किसानों की औसत मासिक आय 10,000 रुपये से कम है.. जो राष्ट्रीय औसत से नीचे है..

चैतर वसावा के आरोप में युवाओं को रोजगार न मिलने की बात प्रमुख है.. गुजरात में कुल बेरोजगारी दर 2.2% है.. जो देश में सबसे कम है.. लेकिन आदिवासी इलाकों में यह दर ऊंची है.. पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 के अनुसार.. ग्रामीण इलाकों में युवा बेरोजगारी 13% है.. और महिलाओं में यह 14.3% तक पहुंच गई.. आदिवासी युवा शिक्षा और कौशल की कमी से जूझ रहे हैं.. 2025 में गुजरात के आदिवासी युवाओं ने बेरोजगारी.. और जाति प्रमाणपत्र की समस्या पर 131 किमी पैदल यात्रा की..

आदिवासी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास कम है.. सरकारी नौकरियों में आरक्षण है.. लेकिन प्रमाणपत्र की जांच में देरी से युवा बेरोजगार रहते हैं.. इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2025 में कहा गया कि ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी ऊंची है.. क्योंकि नौकरियां शहरों में केंद्रित हैं.. गुजरात में आदिवासी युवाओं की बेरोजगारी दर 11-15% के बीच है.. BJP सरकार पर आरोप है कि वह आदिवासी युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों में असफल रही.. चैतर वसावा ने कहा कि BJP आदिवासियों को दाल-भात देकर वोट लेती है.. लेकिन अधिकार नहीं देती..

आपको बता दें कि चैतर वसावा का सबसे गंभीर आरोप BJP नेताओं की संपत्ति पर है.. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की 2026 की रिपोर्ट से पता चलता है कि गुजरात के 7 MPs की संपत्ति 2014 से 2024 तक 2 करोड़ से 130 करोड़ तक बढ़ी है.. जामनगर की BJP MP पूनमबेन मैडम की संपत्ति 17 करोड़ से 147 करोड़ हो गई.. यानी 747% की वृद्धि हुई है.. कच्छ के विनोद छावड़ा की संपत्ति 56 लाख से 6.5 करोड़ हो गई.. जो 1100% बढ़ोतरी है.. बारडोली के परभुभाई वसावा की संपत्ति 195% बढ़ी है..

राष्ट्रीय स्तर पर पुन:निर्वाचित MPs की औसत संपत्ति 110% बढ़ी है.. गुजरात BJP अध्यक्ष सीआर पाटिल की संपत्ति घटी.. लेकिन बाकी में बढ़ोतरी है.. आलोचक कहते हैं कि सत्ता में रहते हुए नेता अमीर हो रहे हैं.. जबकि जनता गरीब होती जा रही है.. चैतर वसावा ने इसे मलाई कहा, जो भ्रष्टाचार का संकेत है.. गुजरात में लैंड स्कैम के मामले भी सामने आए..

गुजरात में आदिवासी समुदाय भूमि, स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्याओं से जूझ रहा है.. BJP सरकार पर आरोप है कि वह आदिवासी भूमि को कॉरपोरेट्स को दे रही है.. फॉरेस्ट राइट्स एक्ट और पेसा कानून ठीक से लागू नहीं हो रहे.. आदिवासी भूमि पर माइनिंग और प्रोजेक्ट्स से विस्थापन हो रहा है.. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासी विरोध कर चुके हैं..

 

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