पकड़ी गई बड़ी वोट चोरी! चुनाव आयोग की बढ़ी मुश्किलें, Raj Thackeray का फूटा गुस्सा

मुंबई नगर निगम चुनाव में मतदान स्याही को लेकर विवाद खड़ा हो गया है…ठाकरे ब्रदर्स ने आरोप लगाया है कि स्याही आसानी से मिटाई जा रही है...जिससे लोग एक से ज्यादा बार वोट डाल रहे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुंबई नगर निगम चुनाव में मतदान स्याही को लेकर विवाद खड़ा हो गया है…ठाकरे ब्रदर्स ने आरोप लगाया है कि स्याही आसानी से मिटाई जा रही है…जिससे लोग एक से ज्यादा बार वोट डाल रहे हैं…इस बीच शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने मतदान की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए है…और उन्होंने चुनाव आयोग पर सत्ताधारी दल की मदद करने का आरोप लगाया है…जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है……..तो आखिर क्यों चुनाव आयोग पर लगे ऐसे गंभीर आरोप और क्या सच में चुनाव आयोग सत्ताधारी दल की मदद कर रही है?

महाराष्ट्र में BMC चुनाव के दौरान सियासी माहौल उस वक्त और गरमा गया…जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी MNS प्रमुख राज ठाकरे ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए…राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मतदान के बाद मतदाताओं की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही हैंड सैनिटाइजर से आसानी से मिट जा रही है…उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि अगर स्याही इतनी कमजोर है कि सैनिटाइजर से हट जाए…तो फिर दोबारा वोट डालने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता…

राज ठाकरे का कहना है कि कोरोना काल के बाद से मतदान केंद्रों पर बड़ी मात्रा में हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल हो रहा है…ऐसे में अगर स्याही सैनिटाइजर से हट जाती है…तो ये पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है….उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों है और क्या ये लापरवाही जानबूझकर की जा रही है?…यही नहीं MNS प्रमुख ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि…सरकार और प्रशासन सत्ता हासिल करने के लिए हर तरह की कोशिश कर रही है…उन्होंने कहा कि ये स्याही खरीदी गई…लेकिन चुनाव आयोग किसी भी पार्टी को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी…बार-बार अनुरोध के बाद भी हमें मशीन नहीं दी गई…साथ ही उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को इसके बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए….चिट्ठी सौंपने के बाद भी कुछ नहीं किया जा रहा है….

यही नहीं राज ठाकरे ने ये भी कहा कि…चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था की तरह काम करने के बजाय सरकार के इशारों पर फैसले ले रहा है…राज ठाकरे ने कहा कि अगर निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है…तो फिर ऐसी कमजोर स्याही का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है…जिससे वोटिंग की पारदर्शिता पर सवाल उठें….राज ठाकरे ने ये भी सवाल उठाया कि…क्या चुनाव आयोग अब स्याही की जगह किसी खास तरह के मार्कर का इस्तेमाल कर रहा है…जो आसानी से हट सकता है….उनका आरोप है कि अगर ऐसा है…तो ये सत्ता में बैठे लोगों की मदद करने की साजिश हो सकती है…उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे अहम चीज मतदाता का भरोसा होता है…और जब वही भरोसा टूटता है…तो चुनाव महज एक दिखावा बनकर रह जाता है…

राज ठाकरे ने दावा किया है कि… वोटिंग के बाद वोटर्स की उंगलियों पर लगाई जाने वाली पक्की स्याही को नेल पॉलिश रिमूवर और सैनिटाइजर से आसानी से हटाया जा रहा है, जिससे कुछ लोग एक से ज्यादा बार वोट दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति रूलिंग महायुति और स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC) के बीच ‘मिलीभगत’ का सबूत है…

वहीं इस पूरे विवाद ने विपक्ष को भी एकजुट होने का मौका दे दिया है…कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (SP) जैसे दलों ने भी चुनाव आयोग से जवाब मांगा है…विपक्ष का कहना है कि अगर वोटिंग की स्याही ही सुरक्षित नहीं है…तो फिर निष्पक्ष चुनाव की बात कैसे की जा सकती है…विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा जहां-जहां सत्ता में है…वहां चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं…चाहे वो ईवीएम का मुद्दा हो…वीवीपैट का विवाद हो या अब स्याही का मामला….हर बार शक की सुई चुनाव आयोग की निष्पक्षता की ओर जाती है…

राज ठाकरे ने कहा कि BMC जैसे बड़े नगर निकाय के चुनाव में अगर इस तरह की लापरवाही होती है…तो देश के बाकी हिस्सों में हालात क्या होंगे…इसका अंदाजा लगाया जा सकता है….उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया…तो उनकी पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी…

हालांकि दोस्तों, ये कोई पहला मौका नहीं है…जब चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठे हों…इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई तरह के विवाद सामने आए थे…जब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं और कई इलाकों में वोटिंग के आंकड़ों पर संदेह जताया गया…वहीं बिहार चुनाव के दौरान ये भी आरोप लगे थे कि कुछ मतदान केंद्रों पर मतदान प्रतिशत अचानक बढ़ गया…जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही थी…विपक्ष ने कहा था कि देर रात तक आंकड़ों में बदलाव होता रहा…जिससे शक और गहरा गया……यहां तक कि बिहार में कई जगहों पर ये भी सवाल उठा था कि ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की जांच ठीक से नहीं की गई…विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया था…..हालांकि आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था….

अब BMC चुनाव में स्याही का मुद्दा सामने आने के बाद…बिहार चुनाव की यादें फिर ताजा हो गई हैं….वहीं विपक्ष का कहना है कि ये सब अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं…बल्कि एक ही पैटर्न का हिस्सा हैं…जिसमें चुनाव प्रक्रिया को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है…राज ठाकरे ने कहा कि अगर मतदाता दोबारा वोट डाल सकता है…तो इसका सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा…ये समझना मुश्किल नहीं है…..उन्होंने इशारों-इशारों में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि…सत्ता में बैठी पार्टी को ही इस तरह की गड़बड़ियों से फायदा मिलता है…

MNS प्रमुख ने ये भी कहा कि आम आदमी इन तकनीकी बातों को शायद न समझ पाए…लेकिन राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वो ऐसी कोई भी गुंजाइश न छोड़ें…जिससे लोकतंत्र पर सवाल खड़े हों…विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को तुरंत ये स्पष्ट करना चाहिए कि मतदान में किस तरह की स्याही या मार्कर का इस्तेमाल किया जा रहा है….उसकी गुणवत्ता क्या है और क्या वो हैंड सैनिटाइजर या अन्य रसायनों से प्रभावित होती है…राज ठाकरे ने मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और अगर किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती सामने आती है…तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए…साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि चुनाव आयोग को सत्ता और विपक्ष दोनों से समान दूरी बनाकर रखनी चाहिए…अगर आयोग पर एक पक्ष विशेष की मदद करने का शक गहराता है…तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा…

वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएमसी चुनाव केवल मुंबई की सत्ता का सवाल नहीं है…बल्कि ये 2029 के आम चुनावों से पहले राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है…ऐसे में हर विवाद का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है…….ऐसे में बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल ये दिखाते हैं कि जनता का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है…अगर चुनाव आयोग समय रहते पारदर्शिता नहीं दिखाता…तो आने वाले चुनावों में विवाद और बढ़ सकते हैं…

जबकि विवाद के बीच, महाराष्ट्र स्टेट इलेक्शन कमीशन ने साफ किया है कि…स्टेट इलेक्शन कमीशन ने 19 नवंबर, 2011 और 28 नवंबर, 2011 को वोटर्स की उंगलियों पर स्याही लगाने के लिए मार्कर पेन के इस्तेमाल के बारे में ऑर्डर जारी किए थे…तब से, लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट चुनावों में वोटर्स की उंगलियों पर निशान लगाने के लिए मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है…

एक ओर जहां महाराष्ट्र स्टेट इलेक्शन कमीशन ने साफ किया है कि मार्कर पेन का इस्तेमाल 2011 से किया जा रहा है…तो वहीं दूसरी ओर राज ठाकरे के बाद उद्धव ठाकरे ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरोप लगाया कि…शायद ये पहला इलेक्शन है…जहां इतनी शिकायतें आ रही हैं कि लगाई गई स्याही तुरंत उतर रही है…इलेक्शन कमीशन और रूलिंग पार्टी के बीच मिलीभगत है…कई गड़बड़ियां हो रही हैं… फिलहाल, बीएमसी चुनाव के दौरान उठा ये स्याही विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है…ठाकरे ब्रदर्स के आरोपों ने चुनाव आयोग और भाजपा समर्थित महायुति दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

Related Articles

Back to top button