भारत का गणतंत्र एक जीवंत संकल्प है

गणतंत्र के 77 वर्ष पूरे होने पर स्वागत समारोह का आयोजन

  • चिंतन रिसर्च फाउंडेशन ने किया जन-केंद्रित नीतिगत संवाद
  • डॉ. सिंह ने कहा- देश विरासत आधारित ढांचों से आगे बढ़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। चिंतन रिसर्च  फाऊंडेशन (सीआरएपफ) ने भारत के गणतंत्र के 77वें वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस स्वागत समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर राजदूतों, वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और संस्था के मित्रों ने संवाद और आत्ममंथन की एक सार्थक शाम में भाग लिया। इस समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। चिंतन रिसर्च फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने गणतंत्र को एक जीवंत संकल्प के रूप में बताया, जो विमर्श, बहुलवाद, सहभागिता और सशक्त संस्थानों पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि सीआरपफ की स्थापना इस विश्वास पर हुई कि भारत की विकास यात्रा तब सबसे मज़बूत होती है, जब नीतिगत संवाद जन-केंद्रित, प्रमाण-आधारित और वैश्विक दृष्टि से जुड़ा हुआ हो। अपने संबोधन में केंद्रीय राज्य मंत्री ने गणतंत्र के बदलते अर्थ और भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत इस महत्वपूर्ण पड़ाव को ऐसे समय मना रहा है, जब देश में नया आत्मविश्वास और संस्थागत परिवर्तन दिखाई दे रहा है। डॉ. सिंह ने कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड के प्रतीकात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भारत के उस परिवर्तन को दर्शाता है, जिसमें देश विरासत आधारित ढाँचों से आगे बढक़र कर्तव्य, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता पर आधारित शासन की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने पीढय़िों के बीच लोकतांत्रिक संस्कारों के हस्तांतरण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और कहा कि बीते दो दशकों में भारत में लोकतंत्र की वास्तविक भावना और अधिक गहराई से अभिव्यक्त हुई है।

राजनयिक मिशनों, शिक्षा जगत, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े हितधारक

यह शाम सरकार, राजनयिक मिशनों, शिक्षा जगत, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े हितधारकों के बीच अनौपचारिक संवाद का मंच बनी, जिसने तेज़ी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में विचारपूर्ण सहभागिता के लिए मंच तैयार करने की सीआरएफ की प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ हुआ, जिसमें फ़ाउंडेशन ने भारत की लोकतांत्रिक और विकासात्मक आकांक्षाओं की सेवा में जिज्ञासु, खुले और प्रासंगिक बने रहने के अपने संकल्प को दोहराया।

संस्थाएं तब टिकाऊ बनती हैं, जब नागरिक सक्रिय रहते हैं : शिशिर प्रियदर्शी

सीआरएफ केअध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा हमारी संस्थाएं तब टिकाऊ बनती हैं, जब नागरिक सक्रिय रहते हैं और विचारों पर गंभीर बहस होती है, प्रियदर्शी ने कहा, और जन-संवाद को सशक्त बनाने में थिंक टैंकों की भूमिका को रेखांकित किया। प्रियदर्शी ने व्यापार और भू-अर्थशास्त्र, ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य का कार्यक्षेत्र, वैश्विक अवसंरचना तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बदलती संरचना जैसे क्षेत्रों में सीआरपीएफ के कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस स्वागत समारोह जैसे आयोजन विश्वास, संवाद और सीमाओं व विषयों से परे सहयोग पर आधारित लोकतांत्रिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता

भारत की वैश्विक स्थिति पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश अब केवल अपनाने वाला नहीं, बल्कि अग्रणी भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन चुका है और कई रणनीतिक क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय एआई मिशन, विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति और परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने जैसे सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी संकेत हैं कि भारत अधिक प्रभावशाली वैश्विक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने शासन और राष्ट्रीय विकास में साइलो से बाहर निकलकर समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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