9,617 वोटर बाहर! चैतर वसावा का BJP पर हमला, प्रपत्र-7 से उठा लोकतंत्र पर सवाल

सूरत पश्चिम विधानसभा में 9,617 मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने पर सियासी घमासान तेज हो गया है…

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत का लोकतंत्र वोट की ताकत पर टिका है.. लेकिन गुजरात में चल रही मतदाता सूची की सफाई प्रक्रिया पर अब सवालों का सैलाब आ गया है.. AAP विधायक चैतर वसावा ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि.. सूरत पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने फॉर्म-7 के जरिए 9,617 मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश की है.. और उन्होंने चुनाव अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.. और पूछा कि क्या यही लोकतंत्र है.. जहां सत्ताधारी पार्टी और चुनाव आयोग मिलकर जनता के वोटिंग अधिकार छीन रहे हैं.. यह मुद्दा सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं.. बल्कि पूरे गुजरात में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के नाम पर लाखों नाम हटाने से जुड़ा है.. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी आरोप लगा रहे हैं.. कि यह मुस्लिम और विपक्ष समर्थक इलाकों में सुनियोजित साजिश है..

चुनाव आयोग की मतदाता सूची को साफ रखने के लिए फॉर्म-7 एक महत्वपूर्ण टूल है.. कोई भी व्यक्ति इस फॉर्म से किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कर सकता है.. अगर वह मृत है, स्थानांतरित हो गया है, डुप्लिकेट है या विदेशी नागरिक है.. लेकिन नियम है कि आपत्ति के साथ सबूत देना जरूरी है.. और BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) जांच के बाद ही नाम हटा सकता है.. SIR एक विशेष अभियान है.. जो घर-घर जाकर सूची अपडेट करता है.. गुजरात में 2025-26 में SIR चला.. जिसमें ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद 18 जनवरी तक आपत्तियां ली गईं.. लेकिन विपक्ष का कहना है कि भाजपा ने इस प्रक्रिया का दुरुपयोग किया.. RTI से पता चला कि गुजरात में SIR से 73.73 लाख नाम हटे.. जो कुल सूची का 14-15% है.. सूरत जैसे शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा.. जहां 25% से ज्यादा नाम कटे..

सूरत पश्चिम विधानसभा, जो मुस्लिम बहुल.. और कांग्रेस-अन्य विपक्ष के प्रभाव वाला क्षेत्र है.. यहां भाजपा पर आरोप है कि उन्होंने फॉर्म-7 के जरिए 9,617 मतदाताओं के नाम हटवाए.. चैतर वसावा ने अपने बयान में कहा कि भाजपा गुजरात इकाई ने इन वोटर्स के खिलाफ आपत्ति दाखिल की.. और चुनाव अधिकारी ने बिना जांच के नाम हटा दिए.. उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ बताया.. और कहा कि जहां भाजपा को हार दिखती है.. वहां मतदाता ही सिस्टम से गायब कर दिए जाते हैं.. वसावा, जो देदियापाड़ा से AAP MLA हैं.. उन्होंने X पर पोस्ट कर भाजपा को घेरा.. हालांकि स्पेसिफिक पोस्ट में 9,617 का उल्लेख सीधे नहीं मिला.. लेकिन उनके समर्थकों और विपक्षी नेताओं के बयानों से यह आंकड़ा सामने आया.. सूरत में कुल 1.50 लाख फॉर्म-7 दाखिल हुए.. जिनमें से ज्यादातर कांग्रेस प्रभाव वाले इलाकों जैसे लिंबायत और मांडवी से हैं.. मांडवी में अकेले 21,000 आपत्तियां आईं.. कांग्रेस नेता आनंद चौधरी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता बिना सबूत के बल्क में फॉर्म भर रहे हैं..

उदाहरण के तौर पर, सूरत के अनवर नगर में 200 से ज्यादा जीवित लोगों को ‘मृत’ दिखाकर नाम हटाने की कोशिश हुई.. अब्दुल रज्जाक वजीरशाह जैसे स्थानीय निवासी, जो 36 साल से वहां रहते हैं.. उन्होंने बताया कि उन्हें मृत बताया गया.. जबकि वे नियमित वोट डालते हैं.. इसी तरह, अहमदाबाद में पद्मश्री हास्य कलाकार शाहबुद्दीन राठोड का नाम भी फॉर्म-7 से हटाने की कोशिश हुई.. उन्होंने कहा कि मुझे खबर ही नहीं.. राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा जहां हार भालती है.. वहां से मतदाता गायब कर देती है..

चैतर वसावा, गुजरात के सबसे युवा विधायकों में से एक, आदिवासी मुद्दों पर हमेशा सक्रिय रहते हैं.. इस बार उन्होंने भाजपा को सीधे निशाने पर लिया.. और उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 याचिका से बवाल मचा है.. और चुनाव अधिकारी की चुप्पी सवाल खड़े करती है.. वसावा का आरोप है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर गुजरात की जनता का वोट अधिकार छीन रहे हैं.. उनके X अकाउंट पर ऐसे पोस्ट्स हैं.. जहां उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा की बात की.. हालांकि स्पेसिफिक 9,617 पर डायरेक्ट पोस्ट नहीं मिला.. लेकिन उनके बयानों से पता चलता है कि वे SIR और फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर लगातार बोल रहे हैं.. वसावा ने पहले तलाटी भर्ती में भी ST उम्मीदवारों के लिए छूट की मांग की थी.. जो दिखाता है कि वे सामाजिक न्याय के लिए लड़ते हैं.. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह जारी रहा तो आदिवासी समाज आंदोलन करेगा..

आपको बता दें कि विपक्ष का मुख्य आरोप चुनाव अधिकारियों पर है कि उन्होंने भाजपा को खुली छूट दी.. सूरत में भाजपा कॉर्पोरेटर विक्रम पॉपट पाटिल पर आरोप है कि उन्होंने मुस्लिम वोटर्स के खिलाफ फॉर्म-7 दाखिल किए.. बिना सबूत के BLO पर दबाव डाला.. जब संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया.. कांग्रेस ने जिला कलेक्टर को शिकायत की कि फॉर्म भरने वालों से सबूत मांगे जाएं, वरना पुलिस केस हो.. लेकिन चुनाव आयोग चुप है.. RTI से पता चला कि गुजरात में लाखों आपत्तियां एक ही नाम से आईं.. जैसे एक व्यक्ति ने दर्जनों फॉर्म भरे.. विपक्ष ने पूछा कि बिना जांच के नाम क्यों हटे.. सुप्रीम कोर्ट में भी यह मुद्दा उठा.. जहां आयोग से पूछा गया कि माइग्रेशन का बहाना क्यों..

 

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