बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, किरेन रिजिजू बोले- सभी दलों के सुझाव किए गए नोट
कल यानी बुधवार से संसद का बजट सत्र है. इससे पहले मंगलवार को सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें दोनों सदनों के विधायी कार्यों और विभिन्न विषयों को लेकर चर्चा की गई. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमने सबके सुझाव को नोट किया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कल यानी बुधवार से संसद का बजट सत्र है. इससे पहले मंगलवार को सर्वदलीय बैठक हुई,
जिसमें दोनों सदनों के विधायी कार्यों और विभिन्न विषयों को लेकर चर्चा की गई. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमने सबके सुझाव को नोट किया.
संसद के बजट सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले मंगलवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के आगामी विधायी कार्यों के साथ-साथ विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद बताया कि सर्वदलीय फ्लोर लीडर्स की यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान सभी राजनीतिक दलों के सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना गया और उन्हें नोट किया गया है।
कल राष्ट्रपति का अभिभाषण और परसो आर्थिक सर्वे पेश होगा. बजट 1 फरवरी को पेश होगा. बाद में राष्ट्रपति के
अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी. रिजिजू ने कहा कि हमने सभी दलों से चर्चा में हिस्सा लेने और
संसद को सुचारू रूप से चलाने का आग्रह किया, जिनको अपनी बात रखनी है वो राष्ट्रपति के धने प्रस्ताव पर चर्चा
में अपनी बात संसद में रख सकते हैं.
51 नेताओं ने की शिरकत
उन्होंने कहा कि आज 39 दलों से 51 नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया. हम सबसे अपील करते है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. संसदीय प्रजातंत्र हम बनाएं रखें और जिस मकसद से जनता ने हमको चुनकर भेजा है वो करे. उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक चर्चा हो. आपके बोलने की आजादी है पर दूसरो को भी अपनी बात सदन में रखने का हक है.
किन मुद्दों को उठाएगा विपक्ष?
कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा. राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को खत्म कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा, विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा. हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है. हमें यह भी नहीं पता चल रहा कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा.



