UGC फैसले से गुजरात लॉबी में टेंशन | BJP नेताओं के इस्तीफों की लगी झड़ी

UGC के फैसले के बाद गुजरात की सियासत में हलचल तेज हो गई है... शंकराचार्य से जुड़े विवाद को लेकर विरोध बढ़ता दिख रहा है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर हंगामा मचा हुआ है.. पहले जहां विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस कानून का विरोध कर रही थी.. वहीं अब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के अपने नेता भी बगावत पर उतर आए हैं.. 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन.. UP के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नियमों के खिलाफ इस्तीफा दे दिया.. और उन्होंने इसे विभाजनकारी नीति बताया.. और प्रयागराज में माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर हमले का भी जिक्र किया..

इसी दिन श्रावस्ती जिले में BJP के पूर्व जिला अध्यक्ष उदय प्रकाश तिवारी ने भी UGC कानून को ब्राह्मण.. और सवर्ण विरोधी बताते हुए इस्तीफा दिया.. लखनऊ में BJP के मंडल महामंत्री अंकित तिवारी समेत 10 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया.. वहीं ये घटनाएं BJP के लिए खतरे की घंटी हैं.. क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं.. और ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लग सकती है.. देश के अन्य राज्यों जैसे बिहार, राजस्थान और तमिलनाडु में भी UGC के नियमों पर विरोध हो रहा है..

आपको बता दें कि UGC भारत में उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाली संस्था है.. जनवरी 2026 में UGC ने नए नियम जारी किए.. जिन्हें ‘इक्विटी रूल्स’ या ‘समता नियम’ कहा जा रहा है.. ये नियम विश्वविद्यालयों में प्रवेश, नियुक्ति.. और पाठ्यक्रम में समानता लाने के लिए हैं.. जिसमें आरक्षण नीति में बदलाव, मेरिट के आधार पर छूट.. और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मुख्य प्रावधान हैं.. लेकिन विरोधी कहते हैं कि ये नियम ब्राह्मण और सवर्ण समुदायों के लिए नुकसानदेह हैं.. क्योंकि इनमें आरक्षण को ज्यादा सख्ती से लागू करने की बात है.. वहीं UGC के नियमों में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों में 50% से ज्यादा पदों पर आरक्षण अनिवार्य होगा.. और मेरिट लिस्ट में भी समता का ध्यान रखा जाएगा.. ये नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत आए हैं.. लेकिन 2026 में इन्हें और सख्त बनाया गया..

जिसको लेकर विपक्ष का कहना है कि ये नियम शिक्षा की गुणवत्ता गिराएंगे.. और जातीय आधार पर विभाजन बढ़ाएंगे.. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फरवरी 2025 में ही UGC के ड्राफ्ट नियमों पर विरोध जताया था.. और उन्होंने तमिलनाडु में DMK के प्रदर्शन में हिस्सा लिया.. और कहा कि UGC के नियम राज्य के अधिकारों का हनन करते हैं.. SP प्रमुख अखिलेश यादव ने भी UGC को ‘संघीकरण’ का हथियार बताया.. लेकिन अब BJP के अंदर से विरोध सुनाई दे रहा है.. जो पार्टी के लिए नई समस्या है.. ब्राह्मण समुदाय, जो UP में BJP का बड़ा वोट बैंक है.. जिसकी कुल भागीदारी लगभग 10-12% है.. जो इन नियमों से नाराज है.. उन्हें लगता है कि आरक्षण से उनके बच्चों को नुकसान होगा..

जिसको लेकर देश भर में विरोध फैल रहा है.. बिहार में छात्र और शिक्षक सड़कों पर हैं.. राजस्थान में राजपूत संगठन विरोध कर रहे हैं.. पटना में UGC के नियमों पर प्रदर्शन हुए.. जहां छात्रों ने UGC ऑफिस घेरा.. तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे गैर-BJP राज्यों के मंत्रियों ने UGC से नियम वापस लेने की मांग की.. कुल मिलाकर, UGC के नियम शिक्षा में सुधार लाने का दावा करते हैं.. लेकिन विरोधी इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं..

आपको बता दें कि 26 जनवरी 2026 को UP के बरेली में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया.. वे सिटी मजिस्ट्रेट थे.. और UGC के नए नियमों को ‘विभाजनकारी’ बताया.. उनके इस्तीफे की पत्र में लिखा है कि UGC नियम बच्चों के लिए नुकसानदेह हैं.. और प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर हमला असहनीय है.. अलंकार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि वे सरकारी नीतियों से असहमत हैं.. यह इस्तीफा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि PCS अधिकारी सरकारी सेवा में हैं.. और उनका विरोध सरकार की छवि खराब करता है..

अलंकार अग्निहोत्री 2018 बैच के PCS अधिकारी हैं.. जो बरेली में कानून-व्यवस्था संभाल रहे थे.. उनके इस्तीफे से ब्यूरोक्रेसी में हलचल मच गई.. इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया कि यह UGC विवाद में पहला बड़ा इस्तीफा है.. और इससे मंत्री भी चुप हैं.. वहीं खबरों में बताया गया कि अलंकार ने शंकराचार्य एपिसोड का भी जिक्र किया.. जो धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है.. उनके इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उनका समर्थन किया..

बता दें कि यह इस्तीफा अकेला नहीं है.. पहले भी अधिकारी UGC जैसे मुद्दों पर इस्तीफा दे चुके हैं.. लेकिन यह 2026 का पहला मामला है.. विपक्ष ने इसे सरकार की असफलता बताया है.. सपा ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मणों को दबा रही है.. UGC नियमों पर BJP के अंदर कलह बढ़ रही है.. 26 जनवरी को श्रावस्ती में पूर्व जिला अध्यक्ष उदय प्रकाश तिवारी ने इस्तीफा दिया.. और उन्होंने UGC को ब्राह्मण और सवर्ण विरोधी बताया.. और कहा कि यह बच्चों के हित में नहीं है.. तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ का भी विरोध किया.. जो BJP के लिए शॉकिंग है.. मीडिया से बात में उन्होंने कहा कि UGC नियम खतरा हैं.. उनके साथ कई नेता इस्तीफा दे चुके हैं.. और पार्टी ऑफिस के बाहर नारेबाजी हुई..

आपको बता दें कि श्रावस्ती UP का सीमावर्ती जिला है.. जहां BJP मजबूत है.. लेकिन तिवारी का इस्तीफा ब्राह्मण वोटर्स को प्रभावित कर सकता है.. इसी दिन लखनऊ में BJP के कुम्हरावां मंडल महामंत्री अंकित तिवारी ने UGC विरोध में इस्तीफा दिया.. उनके साथ 10 पदाधिकारी शामिल हुए.. उन्होंने पार्टी को मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया.. वहीं लखनऊ BJP का मुख्यालय है.. तो यह झटका बड़ा है..

 

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