Bollywood के बाप-बेटे का हुआ एक जैसा निधन, कहानी रही बेहद दर्दनाक

बॉलीवुड फिल्म्स की कहानी ही सिर्फ फ़िल्मी नहीं होती है..बल्कि, इनमें काम करने वाले सितारों की पर्सनल लाइफ भी दिलचस्प किस्सों से जुड़ी रहती हैं। एंटरटेनमेंट की दुनिया में कब क्या हो जाए..? ये कहा नहीं जा सकता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉलीवुड फिल्म्स की कहानी ही सिर्फ फ़िल्मी नहीं होती है..बल्कि, इनमें काम करने वाले सितारों की पर्सनल लाइफ भी दिलचस्प किस्सों से जुड़ी रहती हैं। एंटरटेनमेंट की दुनिया में कब क्या हो जाए..? ये कहा नहीं जा सकता है। आखिर, यहां के सेलेब्स जो बड़े पर्दे पर बेहद खुशहाल नजर आते हैं..उनकी असल ज़िंदगी इससे एकदम उलट जो होती है। कुछ ही कहानी तो बेहद ही दर्दनाक होती है।

ठीक ऐसी ही दुखद कहानी बी टाउन के उस एक्टर की रही..जिसने सलमान खान जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया। लेकिन, जवानी में ही वो इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़कर भी चला गया। बेहद काम उम्र में इस एक्टर का निधन हो गया। और, इससे भी ज्यादा दुःख ये रहा कि, इस एक्टर के पिता का निधन भी ठीक वैसे ही हुआ। हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं..वो कोई और नहीं, बल्कि 90 के दशक में ‘फरेब’ और ‘मेहंदी’ जैसी फिल्मों के एक्टर रहे फराज खान हैं..जो अब हमारे बीच इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं। साथ ही, उनके पिता युसुफ खान की बात भी हो रही है। आखिर, पिता और बेटे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से आखिरी समय तक जुड़े रहे..लेकिन कम उम्र में ही दोनों को ऐसी बीमारियां हुईं कि 50 की उम्र पार करने से पहले ही दोनों का अलग-अलग समय में निधन हो गया था।

पहले युसूफ खान की बात करें तो, 1 मई 1940 को युसुफ अबुशेर खान का जन्म मिस्र में हुआ था। इनकी पढ़ाई-लिखाई वहीं से हुई लेकिन बचपन से उन्हें फिल्में देखना पसंद था। इंडियन फिल्में तो वहां बहुत ज्यादा मशहूर थीं और उन्हें हिंदी फिल्में देखना बहुत पसंद था। जब वो बड़े हुए तो मन बना लिया कि अब इंडिया जाकर फिल्में करेंगे। इसके बाद उन्होंने कुछ पैसे बटोरे और लगभग 24-25 साल की उम्र में मुंबई आ गए। लेकिन, कद-काठी में काफी अच्छे दिखने वाले युसुफ खान को काम नहीं मिल रहा था। लगभग दो साल स्ट्रगल करने के बाद साल 1967 के आस-पास गीता प्रिया ने उन्हें अपनी फिल्म ‘जंगल की हसीना’ (1969) में मौका दिया। जो कि सुपरफ्लॉप रही। फिल्म मिलने के बाद भी उनका स्ट्रगल जारी रहा..। युसूफ फिर महमूद की फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ के ऑडिशन के लिए पहुंच गए। महमूद ऑडिशन ले रहे थे और जब उनकी नजर युसुफ खान पर पड़ी तो उन्हें अपनी फिल्म के लिए सिलेक्ट कर लिया। फिल्म बॉम्बे टू गोवा (1972) में युसुफ खान ने ‘बॉक्सर’ का रोल प्ले किया था और उनके साथ महमूद का फाइट सीन भी काफी फेमस हुआ था। इसके बाद युसुफ खान को कई फिल्में मिलीं। जिनमें ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘युवराज’, ‘दो फूल’, ‘नसीब’, ‘कर्ज’ और ‘डिस्को डांसर’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल रहीं। इन फिल्मों में युसुफ खान अहम किरदारों में से एक होते थे।

पर्सनल लाइफ की बात करें तो, युसुफ खान ने मुंबई में रहने वाली फरजाना नाम की लड़की से शादी की थी। इनसे उन्हें तीन बेटे हुए थे जिनमें से एक फराज खान थे। वहीं, फिल्म ‘डिस्को डांसर’ उनके करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई, क्योंकि साल 1985 में उनका निधन हो गया था। तो, 27 मई 1970 को युसूफ के बेटे फराज खान का जन्म हुआ। मुंबई में फराज का जन्म युसुफ खान के बड़े बेटे के तौर पर हुआ। फराज के दो छोटे भाई फहेद और फध्या खान हैं। तो, फराज खान भी पिता की तरह बचपन से एक्टर बनना चाहते थे। वहीं, वो अपने पिता जैसे ही हैंडसम दिखते थे। उनके करियर की शुरुआत भी बेहद फ़िल्मी रही।

बताया जाता है कि, जब फिल्म-मेकर सूरज बड़जात्या अपनी फिल्म के लीड एक्टर के लिए ऑडिशन ले रहे थे। तो, वहां 50-60 लड़के पहुंचे जिसमें फराज खान, सलमान खान और दीपक तिजोरी जैसे एक्टर्स शामिल थे। मजे की बात तो ये है कि फराज खान का लुक देखकर सूरज बड़जात्या ने उन्हें सिलेक्ट कर लिया और सलमान खान को शॉर्टलिस्ट में रखा। लेकिन, फराज की किस्मत में शायद इस फिल्म में काम करने का मौका नहीं लिखा था। और फिर, फराज खान के हाथ से किसी वजह से फिल्म ”’मैंने प्यार किया” निकल गई।

फराज के करियर की पहली हिट फिल्म ‘फरेब’ थी। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘मेहंदी'(1999) की। जिसमें वो लीड एक्टर थे। हां लेकिन उनका किरदार निगेटिव था। रानी मुखर्जी मेन लीड थीं और उन्होंने ही सारा का सारा क्रेडिट ले लिया। हालांकि, फिल्म के बाद फराज की पहचान विलेन के तौर पर बन गई। उन्होंने ‘पृथ्वी’, ‘लव स्टोरी’, ‘दुल्हन बनूं मैं तेरी’, ‘दिल ने फिर याद किया’,’बाजार’ और ‘चांद बुझ गया’ जैसी कई फिल्मों में जबरदस्त काम किया था, जिसके के लिए उन्होंने खूब तारीफ बटोरी थीं। एक जमाना ऐसा भी था, जब फराज खान के लुक्स पर सभी लड़कियां फिदा हो जाती थी। एक्टर हर रोल को इतने अच्छे से करते थे कि लोग उन्हें स्क्रीन पर देखते ही रह जाते थे।

लेकिन फिर, उनके करियर में बुरा दौर भी आया। जब फराज ने कुछ फिल्में कीं लेकिन ज्यादातर इसमें से सब फ्लॉप साबित हुईं। जिसके बाद, फिर उन्होंने टीवी की तरफ रुख किया। उन्होंने कुछ टीवी सीरियल किए। जिनमें ‘अचानक 37 साल बाद’ और ‘लिपस्टिक’ शामिल रहे। उन्हें आखिरी बार 2008 के शो ‘नीली आंखें’ में देखा गया था, जिसके बाद वह बीमारी के चलते 12 साल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से दूर रहे।

वहीं, साल 2010 के बाद से एक्टर ज्यादा बीमार रहने लगे। फराज को कफ की शिकायत थी, जिसके बाद उन्हें सीने में इंफेक्शन हो गया। सीने से होता हुआ ‘हर्पीस इंफेक्शन’ फराज के ब्रेन तक पहुंच गया। निधन से पहले काफी समय से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें हॉस्पिटल के ‘न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ आईसीयू वार्ड में भर्ती भी रखा गया था।

तो, पैसों की तंगी के चलते फराज के इलाज में परेशानी भी आई थी। जिसके बाद उनके परिवार के सदस्यों ने एक फंडरेजिंग वेबसाइट पर मदद की गुहार लगाई थी। परिवार को फराज के इलाज के लिए 25 लाख रुपए की जरूरत थी। जिसके बाद सुपरस्टार सलमान खान भी आगे आए थे। उन्होंने फराज के मेडिकल बिल्स चुकाने के लिए परिवार को आर्थिक मदद दी थी। एक बातचीत में फराज के छोटे भाई फहमान ने कहा था, ‘हम ताउम्र सलमान खान के आभारी रहेंगे। भगवान उन्हें खुश रखे और उन्हें लंबी उम्र दें।’ फराज के इलाज के लिए एक्ट्रेस आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने भी पैसे दिए थे’।* बीमारी से लड़ते-लड़ते फिर, 4 नवंबर 2020 को उनका निधन हो गया था। बहरहाल, यूं तो छह साल पहले फराज इस दुनिया को अलविदा कहकर जा चुके हैं। लेकिन आज भी वह अपने तमाम फैंस के दिलों में जिंदा हैं।

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