निशांत की जदयू में एंट्री पर बिहार में बवाल

  • विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश पर जमकर साधा निशाना
  • पिता के मार्गदर्शन में करूंगा काम : निशांत कुमार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जदयू में एंट्री को लेकर बिहार की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। सियासी बवाल के बीच विपक्ष की ओर से सवाल उठने लगे। राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ी रोहिणी आचार्य ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। रोहिणी आचार्य ने विदेश से ही सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार की राजनीति और उनके पूर्व के बयानों को लेकर तीखी टिप्पणी की। वहीं राजद ने परिवार वाद को लेकर भी जदयू को घेरा है।
लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार को आधिकारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण कर ली है। मौजूद जानकारी के अनुसार पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई है। इस अवसर पर कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे हैं, जिनमें केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी शामिल रहे हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता भी पहुंचे और उन्होंने जोरदार स्वागत किया है। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और समर्थकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें जो विश्वास दिया गया है, उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब बीस वर्षों में उनके पिता ने बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उस पर पूरे बिहार और देश को गर्व है। निशांत कुमार ने यह भी कहा कि राज्य के लोग मुख्यमंत्री के योगदान को कभी नहीं भूलेंगे। साथ ही उन्होंने अपने पिता के राज्यसभा जाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनका निर्णय है और वे उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे भी वे अपने पिता के मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।

चाचा जी कहां चली गई परिवारवाद वाली थोथी दलील: आचार्य

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में लिखा कि चाचा जी, कहां विलुप्त हो गई दूसरों के संदर्भ में कही गई आपकी परिवारवाद वाली थोथी दलील व बेतुकी थ्योरी? आपकी कथनी और करनी में हमेशा बड़ा फर्क रहा है…। सच कहूं तो आप राजनीतिक व वैचारिक विरोधाभास की वो पराकाष्ठा रहे हैं, जिस पर सटीक बैठती है ये कहावत ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’…। रोहिणी इस बयान को परिवारवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि रोहिणी आचार्य ने अपने संदेश में निशांत कुमार को राजनीति में आने के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने लिखा कि वैसे निशांत को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं…। राजनीति में स्वागत है निशांत का इस उम्मीद के साथ कि निशांत आपकी तरह कुर्सी से चिपके रहने की राजनीति के इतर जनसरोकार की राजनीति करेंगे और फासीवादी भाजपा के आगे आपकी तरह कभी मजबूर, लाचार और बेबस नहीं दिखेंगे…।

नीतीश को बिहार से निकाला जा रहा: राबड़ी

राष्ट्री जनता दल (आरजेडी) की नेता राबड़ी देवी ने आरोप लगाया कि भाजपा नीतीश कुमार को बिहार से बाहर धकेल रही है और राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद उन्हें बिहार नहीं छोडऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति नहीं है, बल्कि भाजपा की एक रणनीतिक चाल है। उनका इशारा है कि भाजपा (2025 के चुनावों में मिली भारी जीत के बाद एनडीए की वरिष्ठ सहयोगी) अब मुख्यमंत्री पद खुद चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा नीतीश कुमार को बिहार से बाहर निकाल रही है। उनका दिमाग खराब हो गया है। नीतीश कुमार को बिहार नहीं छोडऩा चाहिए। उनकी यह टिप्पणी बिहार में आए एक बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच आई है, जब नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ढकसोला खुला : एजाज अहमद

निशांत कुमार के जदयू में शामिल होने के बाद राजद ने भी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर परिवारवाद और वंशवाद का आरोप लगाया है। इस संबंध में राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने नीतीश पर हमला करते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री परिवारवादी राजनीति पर जो बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे वह सिर्फ ढकसोला था। अहमद ने मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि दरअसल नीतीश को अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए मौके की तलाश थी और यह मौका उन्होंने अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए अपने आप को राज्यसभा सदस्य के उम्मीदवार के तौर पर स्थापित करके भारतीय जनता पार्टी से अपनी शर्तों पर समझौता करके विरासत की राजनीति को एक नया आयाम देने का काम किया है। एजाज अहमद ने कहा कि जिस तरह से इवेंट बनाया गया है जिस तरह से निशांत कुमार को राजनीति में स्थापित करने के लिए तरह-तरह के पोस्टर बैनर के साथ-साथ हाथी, घोड़ा, ऊंट और बैंड बाजे के सहारे स्थापित किया गया है इससे ही पता चलता है कि नीतीश कुमार कितने बेचैन थे। अंतत: जनता दल यू के अंदर कहीं ना कहीं नेतृत्व को स्थापित करने के लिए परिवारवादी राजनीति का ही सहारा लेना पड़ा और इस तरह की राजनीति इस तरह की सोंच यह बताने के लिए काफी है कि जनता यू जो परिवारवाद की राजनीति की व्याख्या नीतीश कुमार के माध्यम से प्रस्तुत करती थी वह पूरी तरह से खोखला और नारों के अलावा कुछ नहीं था।

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