IAS रिंकू सिंह राही ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘नौकरी नहीं छोड़ रहा, सिस्टम सुधारना चाहता हूं’
आईएएस रिंकू सिंह राही ने इस्तीफे की खबरों को गलत बताया। कहा कि उन्होंने टेक्निकल रेजिगनेशन मांगा था, नौकरी छोड़ने की मंशा नहीं है। सिस्टम की खामियों को सुधारने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा था।

4pm न्यूज नेटवर्क: पिछले कुछ दिनों से यूपी के चर्चित अधिकारी IAS रिंकू सिंह राही को लेकर खबरें तेज थीं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अब खुद सामने आकर उन्होंने इन सभी खबरों को गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने नौकरी छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए कदम उठाया था। रिंकू सिंह राही ने साफ कहा कि मीडिया में उनके पत्र का गलत मतलब निकाला गया, जबकि उनकी मंशा बिल्कुल अलग थी।
क्या है पूरा मामला?
26 मार्च को रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा था। इस पत्र के सामने आते ही खबर फैल गई कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह ‘टेक्निकल रेजिगनेशन’ से जुड़ा अनुरोध था, न कि नौकरी छोड़ने का फैसला। उन्होंने कहा, अगर सरकार मुझसे IAS के तौर पर काम नहीं ले रही, तो मुझे मेरी मूल सेवा यानी PCS कैडर में वापस भेज दिया जाए।
IAS से पहले PCS थे रिंकू सिंह
रिंकू सिंह राही ने बताया कि IAS बनने से पहले वह PCS अधिकारी थे और अब जरूरत पड़ी तो फिर से उसी कैडर में जाकर काम करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि उन्हें पोस्टिंग की चिंता नहीं है, जहां जो जिम्मेदारी मिलेगी, वह उसे निभाएंगे।
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‘सिस्टम में खामियां हैं, उन्हें सुधारना जरूरी’
रिंकू सिंह राही ने अपने बयान में सरकारी सिस्टम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि
सिस्टम में कुछ कमियां हैं, जिन्हें ठीक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई बार अधिकारी सिस्टम को समझ नहीं पाते और नौकरी छोड़ देते हैं, लेकिन उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। वह सेवा में रहकर बदलाव लाना चाहते हैं।
पोस्टिंग और पनिशमेंट पर भी बोले
रिंकू सिंह राही ने कहा कि वह पहले ही पोस्टिंग और पनिशमेंट का सामना कर चुके हैं। उनका दावा है कि शायद आजादी के बाद पहली बार किसी जूनियर IAS अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ है, जो एक अच्छा संदेश नहीं देता। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें काम नहीं दिया जाएगा, तो वह वेतन भी नहीं लेंगे।
शाहजहांपुर वाली घटना फिर चर्चा में
रिंकू सिंह राही इससे पहले शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने की घटना को लेकर भी सुर्खियों में आ चुके हैं। अब राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र के बाद उनका नाम फिर चर्चा में है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर उठाए सवाल
उन्होंने साफ कहा कि उनके पत्र को गलत तरीके से पेश किया गया और इसे इस्तीफा बता दिया गया, जबकि ऐसा नहीं है। उनका मानना है कि हर अधिकारी को अपनी ड्यूटी करनी चाहिए और वह भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
अब देखना होगा कि सरकार उनके इस पत्र और बयान पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला प्रशासनिक सिस्टम और उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
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