उन्नाव में ‘डेढ़ लाख का खेल’! दरोगा पर रिश्वत लेकर JCB-ट्रैक्टर छोड़ने का आरोप
उन्नाव के बिहार थाने में दरोगा पर रिश्वत लेकर अवैध खनन में पकड़ी गई जेसीबी और ट्रैक्टर छोड़ने का आरोप लगा है। डेढ़ लाख रुपये लेकर बिना कार्रवाई गाड़ियां छोड़ने के आरोप के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अवैध खनन की शिकायत में थाने लाई गईं गाड़ियों को कथित तौर पर रिश्वत लेकर छोड़ देने का आरोप लगाया गया है। मामला बिहार थाना क्षेत्र का है, जहां थाना प्रभारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे दरोगा के. के. सिंह पर डेढ़ लाख रुपये लेकर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के ट्रैक्टर और मिनी जेसीबी छोड़ने के आरोप लगे हैं। इस घटना के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
अवैध खनन की शिकायत पर थाने लाई गई थीं गाड़ियां
जानकारी के मुताबिक, अवैध खनन की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक मिनी जेसीबी और तीन ट्रैक्टरों को पकड़कर बिहार थाने लाया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि मामले में नियमानुसार जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आरोप है कि कुछ ही समय बाद सभी गाड़ियों को बिना किसी आधिकारिक कार्रवाई के छोड़ दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन वाहनों को छोड़ने के बदले थाना प्रभारी का प्रभार संभाल रहे दरोगा के. के. सिंह ने करीब डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत ली। हालांकि, अभी तक पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
थाना प्रभारी की जगह संभाल रहे थे प्रभार
सूत्रों के अनुसार, बिहार थाने के मौजूदा थाना प्रभारी राहुल की अनुपस्थिति में थाने का प्रभार के. के. सिंह के पास था। इसी दौरान यह पूरा मामला सामने आया। आरोप लगने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर अवैध खनन जैसे मामलों में भी पैसों के दम पर कार्रवाई प्रभावित होने लगेगी, तो कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
पुलिस विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश में अवैध खनन पहले से ही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार लगातार अवैध खनन रोकने के निर्देश देती रही है, लेकिन इस तरह के आरोप पुलिस और प्रशासन की सख्ती पर सवाल खड़े कर रहे हैं। खासतौर पर तब, जब जब्त वाहनों को बिना कार्रवाई छोड़ने जैसी बातें सामने आती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि कानून के दुरुपयोग का भी गंभीर उदाहरण होगा।
जांच की मांग तेज
मामला सामने आने के बाद अब निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि गाड़ियों को किस आधार पर छोड़ा गया और क्या वास्तव में रिश्वत का लेन-देन हुआ था। फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से मामले में कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन आरोपों ने उन्नाव पुलिस को कटघरे में जरूर खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में विभागीय जांच या प्रशासनिक कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
रिपोर्ट – रंजन बाजपाई
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