मिर्जापुर पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, सोना ना खरीदने की अपील पर पीएम मोदी को घेरा
मिर्जापुर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ना सोना खरीदने को लेकर की गई अपील पर तीखा हमला बोला। उन्होंने रुपये की गिरती कीमत, परंपराओं और सरकार की नीतियों पर कई बड़े सवाल उठाए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में उस समय राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी ‘गोविष्ट यात्रा’ के दौरान यहां पहुंचे। यात्रा के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील और आर्थिक मुद्दों को लेकर तीखा बयान दिया। शंकराचार्य ने कहा कि देश की जनता देशहित में त्याग कर सकती है, लेकिन किसी प्रधानमंत्री की “झूठी प्रतिष्ठा” बचाने के लिए नहीं। उनके बयान के बाद एक बार फिर राजनीति, अर्थव्यवस्था और परंपराओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
‘अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए जनता से अपील’
मिर्जापुर में मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकार आर्थिक दबाव में होती है, तब जनता से त्याग की अपील की जाती है। उन्होंने कहा कि अगर देश किसी संकट में हो तो जनता सहयोग करती है, लेकिन किसी व्यक्ति विशेष की छवि बचाने के लिए देश का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले यह बयान दिया करते थे कि जिस सरकार के कार्यकाल में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता है, वह सरकार कमजोर मानी जाती है। अब जबकि रुपये की कीमत लगातार दबाव में है, तब सरकार खुद को जिम्मेदार नहीं मान रही।
सोना खरीदने की अपील पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने सोना खरीदने को लेकर की गई अपील पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में सोने का संबंध केवल निवेश से नहीं बल्कि परंपरा और संस्कृति से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार अपनी बेटियों को “लक्ष्मी स्वरूप” मानकर विवाह में आभूषण देते हैं। ऐसे में लोगों से सोना न खरीदने की अपील करना सामाजिक और पारंपरिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन जाता है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि एक तरफ आम लोगों से सोना न खरीदने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर विदेशों से हजारों करोड़ रुपये के विमान खरीदे जा रहे हैं। उनके मुताबिक यह विरोधाभास लोगों के बीच सवाल खड़े करता है।
‘परंपराओं से छेड़छाड़ उचित नहीं’
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की परंपराएं सिर्फ रस्में नहीं बल्कि सामाजिक संरचना का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि विवाह, कन्यादान और आभूषणों की परंपरा सदियों पुरानी सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में आर्थिक कारणों के नाम पर इन परंपराओं को प्रभावित करने वाली अपीलों को लोग गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों को आर्थिक नीतियां बनाते समय सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों का भी ध्यान रखना चाहिए।
गोविष्ट यात्रा को लेकर भी चर्चा
मिर्जापुर पहुंची शंकराचार्य की ‘गोविष्ट यात्रा’ को लेकर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक मौजूद रहे। यात्रा का उद्देश्य गौसंरक्षण, सनातन परंपराओं और धार्मिक जागरूकता से जुड़े मुद्दों को लेकर जनसंवाद बताया जा रहा है। हालांकि, इस दौरान दिए गए राजनीतिक और आर्थिक बयान अब चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी समय में ऐसे बयान विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के बीच नई बहस को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल शंकराचार्य के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे राजनीति, अर्थव्यवस्था और भारतीय परंपराओं से जोड़कर अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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