नहीं थम रहा नेताओं और कोर्ट के बीच विवाद
केजरीवाल समेत 5 नेताओं के खिलाफ नोटिस

- अदालत की आपराधिक अवमानना का मामला
- तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी के रूप में किया नियुक्त
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अदालत की आपराधिक अवमानना के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज में अराजकता फैल जाएगी। इस मामले में केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान न्यायपालिका की गरिमा का जिक्र करते हुए कोर्ट ने एक बेहद अहम और कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जब न्यायपालिका जैसी सर्वोच्च संस्था को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाती है, तो एक जज का यह सर्वोपरि दायित्व बन जाता है कि वह बिना किसी दबाव के काम करे और बदनामी की ऐसी कोशिशों से अपने फैसले को प्रभावित न होने दे।
अदालत ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि जब जज को इस मामले की सुनवाई से अलग होने की याचिका पर विचार किया जा रहा था, तब कोर्ट को ऐसा लगा था कि यह मुद्दा केवल एक न्यायिक आदेश की वैधता और पक्षपात की आशंका तक ही सीमित है। इससे पहले, अदालत ने कहा था कि वह आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का प्रतिनिधित्व करने के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त करेगी। ये अधिवक्ता आबकारी नीति मामले में उनके पक्ष में पारित बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका में शामिल होंगे। यह तब हुआ जब केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि आबकारी मामले की कार्यवाही में उनका कोई वकील नहीं होगा। केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि वे न्यायाधीश के समक्ष लंबित कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद खत्म हो गई है। इसलिए मैंने महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का फैसला किया है। केजरीवाल के बाद सिसोदिया और पाठक ने भी न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे भी उनकी अदालत में बिना वकील के पेश होंगे। न्यायमूर्ति शर्मा ने इससे पहले सीबीआई की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था।
न्यायालय परिसर के बहार लगे चोर-चोर के नारे
सुनवाई समाप्त होने के बाद न्यायालय परिसर के अंदर तनाव की खबर आई। जब ममता बनर्जी उच्च न्यायालय से बाहर निकल रही थीं, तो वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर उन्हें चोर कहकर नारे लगाए। टीएमसी नेताओं और वकीलों द्वारा उन्हें परिसर से सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास के दौरान स्थिति कुछ समय के लिए अराजक हो गई। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने भाजपा से जुड़े वकीलों पर पूर्व मुख्यमंत्री को परेशान करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यदि एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है, तो पूरे बंगाल में आम टीएमसी कार्यकर्ताओं को और भी अधिक शत्रुता का सामना करना पड़ रहा होगा।
ममता के वकील की पोशाक में कोर्ट में आने पर बवाल
बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील के गाउन में राज्य में कथित चुनावोत्तर हिंसा से जुड़े एक मामले पर बहस करने के लिए पेश हुईं। वह टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी के साथ अदालत पहुंचीं। यह मामला अधिवक्ता शिरशन्या बंद्योपाध्याय द्वारा टीएमसी की ओर से दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 26 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और कई टीएमसी कार्यकर्ताओं को हिंसा का सामना करना पड़ा। याचिका के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के कारण कई पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर हमला किया गया। इसमें यह भी दावा किया गया है कि चुनाव के बाद कई कार्यकर्ताओं को अपने घर छोडऩे के लिए मजबूर किया गया। यह याचिका 12 मई को कलकत्ता उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई और मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।



