पुखरायां में शंकराचार्य का बड़ा बयान, बोले- गाय हमारी आस्था का केंद्र है
कानपुर देहात में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को कानपुर देहात के पुखरायां पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय गौशाला और मंदिर का दौरा किया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कानपुर देहात में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को कानपुर देहात के पुखरायां पहुंचे,
जहां उन्होंने स्थानीय गौशाला और मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गौ संरक्षण, धर्म, संस्कृति और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ रक्षा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, धर्म और आस्था का केंद्र है। ऐसे में गाय की रक्षा की मांग करना किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जो लोग गाय को केवल एक पशु मानते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि भारतीय परंपरा में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। शंकराचार्य ने कहा कि जिन सरकारों ने गाय को केवल पशु की श्रेणी में रखा, उन्हें जनता ने वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया है, लेकिन अब समय आ गया है कि गौ संरक्षण को लेकर गंभीर और ठोस कदम उठाए जाएं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विभिन्न सरकारों ने गौ संरक्षण के मुद्दे पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग स्वयं को हिंदू हितों का संरक्षक बताते हैं, उनके शासनकाल में भी गायों की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जो चिंता का विषय है।
बातचीत के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार और वहां के नेता शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नीतियां और बयान गौ संरक्षण की भावना के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि गाय के संरक्षण को लेकर समाज और सरकार दोनों को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है।
शंकराचार्य ने जनता से अपील करते हुए कहा कि गाय को केवल एक पशु नहीं बल्कि “गाय माता” के रूप में सम्मान दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक परंपराएं गाय के सम्मान से जुड़ी हुई हैं और इसके संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि गौ रक्षा का मुद्दा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों से भी जुड़ा हुआ है। आगामी समय में इस विषय को लेकर व्यापक स्तर पर जनजागरणअभियान चलाया जाएगा ताकि समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। शंकराचार्य के दौरे को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उनके दर्शन और विचार सुनने के लिए मौजूद रहे।
रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा, कानपुर



