मांजलपुर उपचुनाव में बवाल, BJP पर आचार संहिता तोड़ने का आरोप
मांजलपुर उपचुनाव को लेकर वडोदरा में सियासी माहौल गरमा गया है... कांग्रेस ने BJP पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मतदान के दिन भारतीय जनता पार्टी.. और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनातनी खुलकर सामने आई.. मतदान समाप्त होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.. शहर कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी अपने समर्थकों.. और पार्टी नेताओं के साथ वडोदरा कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए.. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान बीजेपी नेताओं ने खुलेआम आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया.. लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.. कांग्रेस का आरोप है कि मतदान वाले दिन बीजेपी के कुछ नेता गले में पार्टी का केसरिया गमछा या दुपट्टा डालकर ढोल-नगाड़ों के साथ क्षेत्र में घूमते रहे.. कांग्रेस के अनुसार यह स्पष्ट रूप से चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन था.. पार्टी का कहना है कि चुनाव के दिन किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा इस तरह शक्ति प्रदर्शन करना नियमों के विरुद्ध है..
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया.. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि धक्का-मुक्की की नौबत आ गई.. कांग्रेस का दावा है कि उनकी एक महिला पार्षद के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया.. और पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के साथ मारपीट की गई.. वहीं इस घटना में कांग्रेस नेता के कपड़े तक फट गए और उन्हें चोटें भी आईं.. धरने पर बैठे शहर कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने प्रशासन से मांग की कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में संबंधित बीजेपी नेताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए.. उनका कहना था कि यदि चुनाव के दिन ही नियमों की अनदेखी होगी.. और प्रशासन मूकदर्शक बना रहेगा.. तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है..
दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.. वडोदरा के कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी आईएएस अनिल धामेलिया से जब कांग्रेस के आरोपों के संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई.. तब उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई.. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मांजलपुर विधानसभा का यह उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा है.. इसे गुजरात की आगामी राजनीति का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी माना जा रहा है.. वर्ष 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं.. और ऐसे में इस उपचुनाव के परिणाम को राजनीतिक दल जनता के मूड के रूप में देख रहे हैं..
मांजलपुर विधानसभा सीट विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल रहे योगेश पटेल के निधन के बाद रिक्त हुई थी.. योगेश पटेल लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे और लगातार तीन बार इस सीट से विधायक चुने गए थे.. उनके निधन के बाद चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव कराने की घोषणा की.. भारतीय जनता पार्टी ने इस उपचुनाव में सहकारी क्षेत्र से जुड़े सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाया.. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनाव मैदान में उतारा.. इस प्रकार चुनाव मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच नहीं.. बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के बीच भी माना जा रहा है..
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में कांग्रेस ने ओबीसी समुदाय को साधने की रणनीति अपनाई है.. भीखाभाई रबारी ओबीसी समाज से आते हैं.. और लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं.. दूसरी ओर बीजेपी ने पाटीदार समाज से आने वाले सतीश पटेल को टिकट देकर अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का प्रयास किया है.. इसलिए इस चुनाव को कई विशेषज्ञ ओबीसी बनाम पाटीदार सामाजिक समीकरण की परीक्षा भी मान रहे हैं.. मांजलपुर विधानसभा सीट वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी.. तब से लेकर आज तक इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा रहा है.. बीजेपी ने यहां लगातार जीत दर्ज की है.. और पार्टी इसे अपने मजबूत गढ़ के रूप में देखती रही है.. ऐसे में कांग्रेस इस बार इस सीट पर बीजेपी को कड़ी चुनौती देने का दावा कर रही है..



