सुनीता पाल का सरकार पर हमला, बोलीं- समाज की भावनाओं के साथ हुआ खिलवाड़
बदायूं में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के बाद पाल समाज में जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ गहरा आक्रोश देखने को मिला।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बदायूं में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के बाद पाल समाज में जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ गहरा आक्रोश देखने को मिला।
समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के आयोजन के लिए करीब 20 दिन पहले प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अंतिम समय में अनुमति निरस्त कर दी गई। इससे न केवल समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची, बल्कि आयोजन पर खर्च की गई बड़ी धनराशि भी व्यर्थ हो गई।
पाल समाज के लोगों का कहना है कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती को भव्य रूप से मनाने की तैयारी कई दिनों से चल रही थी। कार्यक्रम में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई थीं। आयोजन स्थल पर टेंट, मंच, बैठने की व्यवस्था, भोजन और अन्य जरूरी इंतजामों पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके थे। ऐसे में अंतिम समय में अनुमति रद्द किए जाने से समाज को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
इस पूरे मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की महिला नेत्री एवं पाल समाज की प्रमुख प्रतिनिधि सुनीता पाल ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार यह आश्वासन दिया जाता रहा कि कार्यक्रम की अनुमति मिल जाएगी। इसी भरोसे पर समाज के लोगों ने बड़े स्तर पर तैयारियां कीं, लेकिन जब कार्यक्रम का समय नजदीक आया तो अचानक अनुमति रद्द कर दी गई।
सुनीता पाल ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से तानाशाहीपूर्ण रवैये को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज के लोगों की भावनाओं और उनके सामाजिक अधिकारों की अनदेखी कर रही है। उनके अनुसार, यह केवल एक कार्यक्रम की अनुमति का मामला नहीं, बल्कि समाज के सम्मान और पहचान से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की एक महान शासक, समाज सुधारक और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक रही हैं। ऐसे में उनकी जयंती मनाने की अनुमति न देना समाज की भावनाओं के साथ अन्याय है। सुनीता पाल ने कहा कि पाल समाज इस पूरे घटनाक्रम को भूलेगा नहीं और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगा।
बताया जाता है कि अनुमति रद्द किए जाने से नाराज पाल समाज के लोगों ने शनिवार को इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे, जिन्होंने प्रशासन के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
वहीं रविवार को पाल समाज के लोगों ने समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती मनाई। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए और लोकमाता के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और समाज सेवा के कार्यों को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि किसी भी समाज को अपने महापुरुषों और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों की जयंती मनाने का अधिकार है। यदि ऐसे आयोजनों पर रोक लगाई जाती है तो इससे सामाजिक असंतोष बढ़ता है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने और समाज के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की।
इस पूरे विवाद के बाद जिले का राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन को घेरने में जुट गए हैं। वहीं पाल समाज के लोगों का कहना है कि उनकी लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
हालांकि, इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अनुमति रद्द किए जाने के वास्तविक कारणों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। फिलहाल, यह मामला सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
रिपोर्ट:- संतुलित पाठक,बदायूं



