एक साल से नहीं मिली गो-पोषण की राशि, अब गोवंश लौटाने की चेतावनी!

मीरजापुर के लालगंज ब्लॉक के बामी गांव में मुख्यमंत्री गो-पोषण सहभागिता योजना से जुड़े करीब चार दर्जन लाभार्थी एक वर्ष से धनराशि न मिलने से परेशान हैं। पशुपालकों ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंचकर बकाया भुगतान की मांग की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को राहत और सहारा प्रदान करना होता है, लेकिन जब योजनाओं का लाभ समय पर न पहुंचे तो सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को होती है जो उस सहायता पर निर्भर होते हैं। मीरजापुर जिले के लालगंज विकास खंड स्थित बामी गांव में मुख्यमंत्री गो-पोषण सहभागिता योजना से जुड़े लाभार्थियों की स्थिति कुछ ऐसी ही बन गई है। योजना के तहत गोवंश का पालन कर रहे करीब चार दर्जन लाभार्थी पिछले एक वर्ष से धनराशि न मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

सोमवार को लाभार्थियों ने मीरजापुर विकास भवन पहुंचकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र सौंपा और जल्द से जल्द बकाया धनराशि जारी कराने की मांग की।

गोवंश के पालन-पोषण में बढ़ी मुश्किलें

मुख्यमंत्री गो-पोषण सहभागिता योजना के अंतर्गत लालगंज के बामी गांव स्थित गौशाला से पात्र लाभार्थियों को दो से चार गोवंश दिए गए थे। योजना के अनुसार प्रत्येक गोवंश के पालन-पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपये की दर से सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। लाभार्थियों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यह धनराशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। ऐसे में पशुओं के लिए चारा, भूसा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

उधार लेकर कर रहे पशुओं का पालन

गांव निवासी चैतू प्रसाद, रामखेलावन और रामलाल कनौजिया ने बताया कि उन्हें मई 2025 तक ही योजना की धनराशि प्राप्त हुई थी। इसके बाद से कोई भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गोवंश को भूखा नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए मजबूरी में उधार लेकर चारा और भूसा खरीदना पड़ रहा है। लाभार्थियों का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च के बीच बिना सरकारी सहायता के गोवंश का पालन करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

लाभार्थियों ने दी सामूहिक कदम उठाने की चेतावनी

बामी गांव के निवासी लाल बहादुर ने बताया कि वह अपनी समस्या लेकर विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही बकाया धनराशि लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंचती है, तो सभी पशुपालक सामूहिक रूप से गोवंश को वापस गौशाला में सौंपने पर मजबूर हो सकते हैं। लाभार्थियों का कहना है कि आर्थिक सहायता के अभाव में पशुओं की देखभाल करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।

इन लाभार्थियों ने सौंपा प्रार्थना पत्र

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देने वालों में गिरिजा शंकर, लाल बहादुर, तीजा देवी, पार्वती देवी बिंद, ममता देवी, सीता देवी, चैतू प्रसाद, रामखेलावन, अनिल कुमार, कमालुद्दीन और राजकुमार कोल सहित कई लाभार्थी शामिल रहे।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने क्या कहा?

इस मामले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र पाठक ने बताया कि जिन लाभार्थियों की सूची 20 मार्च से पहले प्राप्त हो गई थी, उनके खातों में धनराशि भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि जिन लाभार्थियों को अब तक भुगतान नहीं मिला है, वे लालगंज के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से संपर्क कर अपनी स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें अभी तक बकाया भुगतान नहीं मिला है और वे जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

योजना की सफलता के लिए समय पर भुगतान जरूरी

ग्रामीण विकास और पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री गो-पोषण सहभागिता योजना जैसी योजनाएं गोवंश संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन यदि लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता न मिले तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट कर पात्र लाभार्थियों को शीघ्र राहत प्रदान की जाए।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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