सरकार के खिलाफ प्रदर्शन बना विवाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना या नारे लगाना अपराध नहीं है और इस आधार पर किसी को जिले से बाहर नहीं किया जा सकता.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना या नारे लगाना अपराध नहीं है और इस आधार पर किसी को जिले से बाहर नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने एक स्थानीय नेता के निष्कासन आदेश को रद्द करते हुए कहा कि विरोध करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है.
क्या सरकार के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है या लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा? क्या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से किसी शख्स को उसके क्षेत्र से बाहर निकाला जा सकता है? ऐसे ही एक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने या नारे लगाने के कारण किसी व्यक्ति को उसके जिले से बाहर नहीं किया जा सकता. दरअसल, एक स्थानीय नेता (सईद अहमद चौधरी) सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.
पुलिस ने उन्हें 1 साल के लिए जिले से बाहर कर दिया था. इस मामले में कोर्ट ने इस आदेश रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा, नारे लगाना और शांतिपूर्वक विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है. सिर्फ इसी वजह से किसी को सजा नहीं दी जा सकती.
‘नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा’
49 साल के सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस माधव जे. जामदार की सिंगल-जज बेंच ने पुलिस से पूछा कि क्या सरकार के फैसलों का विरोध करने पर केस दर्ज करके नागरिकों को “सरकार का गुलाम” बनाया जा रहा है और वे विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते.सईद ने बताया था कि वह सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के जनरल सेक्रेटरी हैं और उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर निकाल दिया गया था.
जस्टिस जामदार ये जानना चाहते थे कि मुंबई पुलिस ने याचिकाकर्ता के पुराने विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी FIR के आधार पर शहर से बाहर भेजने का आदेश (externment order) क्यों जारी किया, जिनमें ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’ और ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए थे. हाल में हुए परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले और याचिकाकर्ता की दलील का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि नागरिक विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते या नारे क्यों नहीं लगा सकते?
जस्टिस जामदार ने कहा, “विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। याचिकाकर्ता ने बस ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं. नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते और ऐसे नारों के लिए शहर से बाहर निकालने के आदेश क्यों?”
कोर्ट ने पुलिस को चेताया
पुलिस को चेताते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता के सेवक हैं, न कि सरकार के बड़े अधिकारियों के. पिटीशनर चौधरी ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के 3 दिसंबर, 2025 के देश निकाला ऑर्डर को चैलेंज किया था. उन्हें एक साल के लिए देश निकाला दिया गया था.



