गर्मी में शरीर को ठंडा रखेंगे येे योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान शरीर पर कई तरह का असर डालता है, जैसे थकान, डिहाइड्रेशन और चिड़चिड़ापन। ऐसे में शरीर को अंदर से ठंडा और संतुलित रखने के लिए योगासन और प्राणायाम बेहद प्रभावी माने जाते हैं। योग केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से गर्मियों में कुछ ऐसे योग और श्वास अभ्यास होते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं और हीट स्ट्रेस को कम करते हैं। नियमित योग अभ्यास से न केवल शरीर की गर्मी नियंत्रित रहती है, बल्कि पाचन तंत्र, ब्लड सर्कुलेशन और मानसिक स्थिरता भी बेहतर होती है।
बालासन
बालासन एक बेहद सरल लेकिन प्रभावी योगासन है, जिसे करने से शरीर तुरंत रिलैक्स महसूस करता है। इसमें घुटनों के बल बैठकर शरीर को आगे झुकाया जाता है और माथा जमीन पर टिकाया जाता है। यह आसन पीठ, गर्दन और कंधों के तनाव को कम करता है। साथ ही यह मानसिक तनाव और चिंता को भी घटाता है। गर्मी में यह शरीर को ठंडक और मानसिक आराम देने के लिए बहुत उपयोगी है। इसके अलावाबालासन कूल्हों, जांघों, और टखनों में मामूली सा खिचाव लाता है। यह पीठ और गर्दन में दर्द से छुटकारा दिलाता है । बालासन संपूर्ण शरीर को आराम देता है। अगर आपको दस्त, गर्भावस्था, घुटने में चोट हो तो बालासन ना करें। शीर्षासन के बाद बालासन ज़रूर करें। अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक ज़ोर न लगायें। बालासन एक आराम करने की मुद्रा है। इसे किसी भी आसन से पूर्व कर सकते हैं।
चंद्र नमस्कार
चंद्र नमस्कार योग का एक शांत और संतुलित रूप है, जिसे खासकर रात या गर्मी में किया जाता है। यह शरीर में चंद्र ऊर्जा को सक्रिय करता है, जो शांति और ठंडक का प्रतीक मानी जाती है। इसे करने से शरीर की थकान कम होती है और मानसिक तनाव घटता है। यह सूर्य नमस्कार की तुलना में अधिक रिलैक्सिंग माना जाता है और शरीर को ओवरहीटिंग से बचाता है। इन आसनों का क्रम ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर के नेचुरल कूलिंग सिस्टम में मदद मिलती है। चंद्रमुखासन पसीना निकालने को प्रोत्साहित करता है, जो शरीर को डिटॉक्स करने और हाइड्रेशन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।
शीतली प्राणायाम
शीतली का अर्थ ठंडा या सुखदायक है। शीतली प्राणायाम गर्मी के मौसम में शरीर को तुरंत ठंडक देने के लिए सबसे प्रभावी श्वास अभ्यास माना जाता है। इसमें जीभ को नली की तरह मोडक़र मुंह से धीरे-धीरे सांस ली जाती है और फिर नाक से छोड़ी जाती है। यह योग की आठ प्रकार की प्राणायाम तकनीकों में से एक है, जिसका उल्लेख हठयोग प्रदीपिका जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मंत्रालय बताता है कि यह अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। यह प्रक्रिया शरीर के अंदर की गर्मी को कम करती है और ब्लड प्रेशर को भी संतुलित रखने में मदद करती है। नियमित अभ्यास से चिड़चिड़ापन कम होता है और मन में शांति महसूस होती है। यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जिन्हें गर्मी में जल्दी थकान या बेचैनी महसूस होती है। यह पाचन संबंधी समस्याओं जैसे एसिडिटी और कब्ज को ठीक करता है।
शीतकारी प्राणायाम
‘शीतकारी’ शब्द का अर्थ ही होता है ठंडक पैदा करने वाला या ‘शीतल’ करने वाला। जब हम इस प्राणायाम का अभ्यास करते हैं, तो मुंह से सी-सी की आवाज निकलती है। गर्मियों के मौसम में यह प्राणायाम शरीर के तापमान को तुरंत नियंत्रित करने और भीतर की गर्मी या ‘पित्त’ को शांत करने का अचूक नुस्खा है। इस प्राणायाम में दांतों को हल्का खोलकर या जुबान के बीच से हवा खींची जाती है, जिससे ठंडी हवा शरीर के अंदर जाती है। यह शरीर के तापमान को कम करने के साथ-साथ मानसिक तनाव और गुस्से को भी नियंत्रित करता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर को ठंडा और शांत बनाए रखता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर करता है।



