जितने वार हुए… उतने मजबूत होकर निकले खान सर!
खान सर को अग्रिम जमानत, बॉडी गार्ड को भी राहत

- अग्रिम जमानत के बाद बदला सियासी और सामाजिक नैरेटिव
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। किसी को कठघरे में खड़ा करना आसान है। किसी के खिलाफ आरोपों की आंधी खड़ी करना भी कठिन नहीं है। सोशल मीडिया की अदालत में आजकल मिनटों में फैसला लिख देने का ट्रेंड भी आसान है। लेकिन कानून की अदालत में न तो हैशटैग चलते हैं न ट्रेंड, न शोर, न नारों की गूंज। वहां सिर्फ दो चीजें चलती हैं तथ्य और कानून। और आज के अदालती फैसले ने खान सर और उनके बाडी गार्ड को तथ्यों और सबूतों के आधार पर उन्हें राहत भरी खबर सुनाई है। पटना सिविल कोर्ट ने चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर को अग्रिम जमानत देकर फिलहाल गिरफ्तारी से राहत दे दी है। उनके दोनों निजी सुरक्षा कर्मियों को भी कानूनी संरक्षण मिला है। बीते कुछ महीनों से खान सर सिर्फ एक शिक्षक नहीं रहे थे। वह एक बहस बन गए थे। उन पर आरोप लगे जवाब दिए गए। समर्थक और विरोधी आमने सामने आ गए। सोशल मीडिया ने अपने अपने फैसले लिख दिए। टीवी स्टूडियो में घंटों बहस हुई। हर किसी के पास राय थी। लेकिन अदालत ने राय नहीं, रिकॉर्ड देखा। अदालत ने शोर नहीं, सुनवाई की और खान सर के वकीलों की दलीलों को सही मानते हुए उन्हें राहत प्रदान करने का एलान कर दिया। मुकदमा चलता रहेगा आरोप लगते रहेंगे लेकिन जो लोग खान सर को जेल की सलाखों के पीछे धकेलना चाहते थे उनके अरमान पूरे नहीं हुए। कानूनी जानकारों का मानना है कि बाकी के मुकदमों पर भी आज के फैसलों का असर पड़ेगा और जो मानहानि का मुकदमा एंकर अंजना ने खान सर और 4PM के संपादक संजय शर्मा पर किया है उसमें भी उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी।
जारी रहेगी सुनवाई
अब आगे जांच होगी अदालत में सुनवाई होगी। साक्ष्य परखे जाएंगे। कानून अपना रास्ता तय करेगा। लेकिन आज का दिन उस मूल सिद्धांत की याद दिलाता है जिस पर न्याय व्यवस्था खड़ी है न्याय अदालत करती है माहौल नहीं।
क्या होती है अग्रिम जमानत
अग्रिम जमानत वह कानूनी राहत है जो किसी व्यक्ति को संभावित गिरफ्तारी से पहले अदालत से मिल सकती है। यदि अदालत को लगता है कि परिस्थितियों को देखते हुए व्यक्ति को जांच में सहयोग करते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जा सकता है तो वह अग्रिम जमानत दे सकती है।
आज का फैसला बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश निकलता है। आज के दौर में किसी भी चर्चित व्यक्ति का विवाद केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। वह राजनीति में पहुंचता है सोशल मीडिया में पहुंचता है सार्वजनिक धारणा का हिस्सा बन जाता है। ऐसे माहौल में अदालत का हर आदेश सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं रहता बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसे की याद भी दिलाता है। खान सर को मिली अग्रिम जमानत का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कानून किसी भी व्यक्ति के साथ प्रक्रिया के अनुसार चलता है। न भीड़ के दबाव में न सुर्खियों के दबाव में और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है।
खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर हुई थी हिंसा
पूरा मामला खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर हुई हिंसा और फायरिंग की घटना से जुड़ा है। इसी प्रकरण में खान सर और उनके दो निजी सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने पटना सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी जिस पर आज अदालत ने उन्हें राहत प्रदान की है। पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पटना के मुसल्लहपुर इलाके में स्थित कोचिंग संस्थान के बाहर कथित रूप से कुछ लोगों और सुरक्षा कर्मियों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि स्थिति बिगडऩे के दौरान फायरिंग हुई और इससे इलाके में अफरा तफरी फैल गई। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान खान सर का नाम भी केस में शामिल किया गया जबकि उनके दोनों निजी सुरक्षा कर्मियों पर फायरिंग और हिंसा से जुड़े आरोप लगाए गए। मामला सामने आने के बाद खान सर की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि उनका घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य नहीं था और उन्हें अनावश्यक रूप से मामले में घसीटा जा रहा है। दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने जांच और एफआईआर के आधार पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पहले अपना आदेश सुरक्षित रखा और बाद में अग्रिम जमानत मंजूर कर दी।




