पेपर लीक रोकने वाले बिल पर लोकसभा में बहस, विपक्ष ने रखे 93 सुझाव

शफी परम्बिल ने अहम सुझाव दिया कि पेपर लीक से अगर एक हजार या उससे अधिक परिक्षार्थियों पर असर पड़ता है,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शफी परम्बिल ने अहम सुझाव दिया कि पेपर लीक से अगर एक हजार या उससे अधिक परिक्षार्थियों पर असर पड़ता है,

तो जवाबदेही तय करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में जांच कराई जाए. वह यह भी चाहते हैं कि दोबारा टेस्ट 60 दिनों के अंदर कराया जाना चाहिए.

पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के मसले पर संसद में जारी गतिरोध आज मंगलवार को खत्म होता दिख रहा है. लोकसभा में कल सोमवार देर शाम तक गतिरोध जारी रहा, लेकिन सरकार की ओर से पेश विधेयक पर चर्चा करने को सहमति बन गई.

सदन में आज मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर चर्चा होने की संभावना है. सदन में बहस के लिए 6 घंटे तय किए गए हैं जबकि विपक्षी सांसदों ने 93 संशोधन का सुझाव दिया है.

पेपर लीक बिल पर लोकसभा में विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत प्रियंका गांधी वाड्रा करेंगी. बीजेपी की ओर से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, अनुराग ठाकुर, शशांक मणि त्रिपाठी, भोला सिंह, संजय जायसवाल और विष्णु दत्त शर्मा अपनी बात रखेंगे.

बहस के लिए 6 घंटे फिक्स, कौन-कौन बोलेगा

जबकि कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी के अलावा केसी वेणुगोपाल, गौरव गोगोई, के. सुब्रमण्यम (CPI), हरसिमरत कौर (SAD) और शर्मिला सरकार (TMC) बहस में शामिल होंगी. NCPI की मिताली बाग भी अपनी बात रखेंगी.

लोकसभा में गतिरोध खत्म होने के बाद पेपर लीक के खिलाफ लाए गए विधेयक पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 6 घंटे निर्धारित किए हैं तो वहीं विपक्ष ने विधेयक में सुधार के लिए अपनी ओर से 93 संशोधन जमा कराया है. विधेयक पर मंगलवार दोपहर 2 बजे से चर्चा शुरू होनी है. आइए, देखते हैं कि विधेयक को लेकर सांसदों की ओर से किस तरह के अहम सुझाव दिए गए हैं.

जेल की सजा और जुर्माना बढ़ाने की मांग

ज्यादातर सांसदों ने पेपर लीक समेत परीक्षाओं में गलत कामों के लिए जेल की सजा और जुर्माना दोनों बढ़ाने की मांग की है. सुधार के लिए पहला सुझाव RSP के एनके प्रेमचंद्रन का है, जो चाहते हैं कि बिल को एक दिसंबर तक राय जानने के लिए सर्कुलेट कर दिया जाए, साथ ही स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार केंद्र सरकार की जगह राज्यों को दिया जाए.

इसी तरह कांग्रेस के विशालदादा पाटिल और श्यामकुमार बर्वे के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP) के आनंद भदौरिया चाहते हैं कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले दोषियों की प्रॉपर्टी, जिसमें बैंक अकाउंट, शेयर और इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं, जब्त कर लिया जाना चाहिए.

उम्र और अटेम्प्ट्स की संख्या में भी मिले छूट

विशाल पाटिल के अलावा कांग्रेस के सांसद बेनी बेहेनन, शशिकांत सेंथिल और शफी परम्बिल और CPI(M) के सांसद के. राधाकृष्णन भी चाहते हैं कि विधेयक में उन प्रत्याशियों को पर्याप्त मुआवजा, फीस रिफंड और आने-जाने का खर्च शामिल हो, जिनके एग्जाम गलत तरीकों की वजह से कैंसिल करने पड़े. साथ ही वे यह भी मांग करते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में परिक्षार्थियों को उम्र और अटेम्प्ट्स की संख्या में भी छूट दी जानी चाहिए.

शफी परम्बिल की ओर से एक और अहम सुझाव दिया गया है कि पेपर लीक से अगर एक हजार या उससे अधिक परिक्षार्थियों पर असर पड़ता है, तो जवाबदेही तय करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में जांच कराई जाए. वह यह भी चाहते हैं कि दोबारा टेस्ट 60 दिनों के अंदर कराया जाना चाहिए.

एग्जामिनेशन सिक्योरिटी सेल बनाने का सुझाव

शशिकांत सेंथिल चाहते हैं कि व्हिसलब्लोअर को सुरक्षा दी जाए, यही सुझाव डीन कुरियाकोस, परम्बिल और भदौरिया जैसे सांसदों ने भी दिया है. सेंथिल फिजिकल और डिजिटल एग्जाम सिक्योरिटी को लेकर सालाना ऑडिट कराने की भी मांग कर रहे हैं, जिसमें प्रश्न पत्र तैयार करना, प्रिंटिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आदि शामिल हैं. जरूरी सिक्योरिटी ऑडिट की मांग कुरियाकोस भी कर रहे हैं.

साथ ही आनंद भदौरिया ने एक एग्जामिनेशन सिक्योरिटी सेल बनाने का भी सुझाव दिया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अभय कुमार सिन्हा की मांग है कि एग्जामिनेशन सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी और क्वेश्चन पेपर हैंडलिंग पर नजर रखने के लिए एक नेशनल पब्लिक एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी अथॉरिटी बनाई जाए.

दोषियों को सरकारी भर्ती-कॉन्ट्रैक्ट पर लगे रोक

सपा सांसद भदौरिया ने गलत एग्जाम प्रैक्टिस के लिए दोषी पाए गए लोगों पर पब्लिक एग्जाम, सरकारी भर्ती, सरकारी सर्विस या सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में हिस्सा लेने पर लाइफटाइम बैन लगाने की भी मांग की है. कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन ने पेपर लीक मामले में आरोपी बनने की सूरत में सरकारी कर्मचारी को तब तक सस्पेंड किए जाने की मांग की है, जब तक कि कोर्ट उसे बरी या बरी नहीं कर देता.

कुरियाकोस ने अपने सुझाव में खासकर STF के संबंध में राज्य की भूमिका को अहम बताया है, क्योंकि यह केंद्र सरकार को संबंधित राज्य की मंजूरी लेने के लिए कहता है. कांग्रेस के मनोज कुमार ने सुझाव दिया कि पेपर लीक मामलों की जांच CBI से करनी चाहिए. इसी तरह तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा डिप्टी लीडर सौगत रे के सुझाव में सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले की जांच के सुपर विजन और मॉनिटरिंग की बात की गई है.

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