CJP प्रदर्शन और पैलेट गन विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने किन मुद्दों पर जताई चिंता?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह छात्रों का पूरी तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जिसमें कुछ मांगें रखी गई थीं. यह संवैधानिक दायरे में था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह छात्रों का पूरी तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जिसमें कुछ मांगें रखी गई थीं. यह संवैधानिक दायरे में था. विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान हुई लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही नीट परीक्षा का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तय नियमों का उल्लंघन होता है, तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने लाठीचार्ज से जुड़े सभी मामलों को एक साथ जोड़ दिया है. सभी मामलों की सुनवाई एकसाथ होगी. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हमें नहीं लगता कि लंबी-चौड़ी दलीलों की जरूरत है. यह छात्रों का पूरी तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जिसमें कुछ मांगें रखी गई थीं. यह संवैधानिक दायरे में था. उनका कहना है कि इस तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में हमेशा बिन बुलाए मेहमान आ जाते हैं. वे अपने एजेंडे के साथ आते हैं और जल्द ही वे सह-आयोजक बन जाते हैं. छात्रों की ओर से कहा गया है कि संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद, उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया.
दलीलें और उस पर कोर्ट का जवाब
सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि यह मामला देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर, बिहार वगैरह में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं. कई घटनाएं हैं. इस पर CJI ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अगर मोटे तौर पर देखें तो एक मामला पेलेट गन के इस्तेमाल का है, जिसकी वजह से 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी चली गई. इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के मामले भी हैं. एक युवती को ICU में भर्ती कराना पड़ा, कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे जानलेवा चोटें आईं.
कोर्ट ने कहा कि एक मीडियाकर्मी पर हमले का मामला भी है, जिसका जिक्र कल भी किया गया था. उस पर बेरहमी से हमला किया गया, फिर सादे कपड़ों में पुलिस द्वारा हिंसा की गई. एक और मामला है जिसमें बिना किसी उकसावे के एक पुलिसकर्मी ने युवती को थप्पड़ मारा. आज ज्यादती को लेकर एक अलग याचिका भी दायर की गई है.
वकील गोपाल ने कहा कि जंतर-मंतर के लिए कोई आदेश नहीं था. पुलिस के लिए प्रोटोकॉल है कि वे लाउडस्पीकर पर घोषणा करें कि वे क्या करने जा रहे हैं, जैसे वॉटर कैनन का इस्तेमाल, पैरों के नीचे लाठी चलाना. आंसू गैस का इस्तेमाल बाद का कदम है. इस पर सीजेआई ने कहा कि हर स्टेकहोल्डर को रचनात्मक सुझाव देने चाहिए. इस कोर्ट ने पहले जो प्रोटोकॉल सुझाया था, समय के साथ, बहुत सी चीजें अब गैर-पारंपरिक तरीके से हो रही हैं. हमें इस बात पर गौर करना होगा कि किस तरह की आंसू गैस वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है और क्या इसकी इजाजत दी जानी चाहिए. लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन तो होंगे ही.
गोपाल ने कहा कि एक ASI ने खुद कार की खिड़कियां तोड़ीं. इसका वीडियो भी है. इन लोगों ने मनमानी की. हम चाहते हैं कि जिम्मेदारी ऊपर के अधिकारियों की तय की जाए. जब तक यह कोर्ट ऐसा नहीं करता, पुलिस को लगता है कि वे बच निकलेंगे. इस पर सीजेआई ने कहा कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तो जांच का कोई मतलब नहीं है.
वकील गोपाल ने कहा कि SIT की अगुवाई इस कोर्ट के पूर्व जज कर सकते हैं. इससे कम कुछ भी करने से कोई संदेश नहीं जाएगा. इन सबके बावजूद, कल बिहार में एक पुलिसकर्मी ने AK47 का इस्तेमाल किया. वहीं, सीनियर वकील शोएब आलम ने कहा कि पूरी तरह से निहत्थी भीड़, पुलिसकर्मी का वीडियो है. उसने गियर और मास्क पहना हुआ था. सीनियर वकील श्याम दीवान ने कहा कि हमने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की इन घटनाओं को वर्गीकृत किया है. हमने भरोसेमंद मीडिया रिपोर्ट और तस्वीरें दी हैं. पेलेट गन का बहुत गंभीर इस्तेमाल हुआ है. सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारियों द्वारा हिंसा की गई है. इस पर सीजेआई लोकतंत्र में इस तरह के सभी नियम तय किए जाने चाहिए. सीजेआई ने कहा कि एक बार गाइडलाइंस तय हो जाने के बाद, जो कोई भी कानून अपने हाथ में लेगा, उस पर कार्रवाई की जा सकेगी.
सीनियर एडवोकेट शोएब आलम ने कहा कि बिहार पुलिस ने कहा है कि उन्होंने उस पुलिस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है जिसने AK-47 से गोली चलाई थी. सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि इस SIT का प्रमुख सिर्फ कोई पूर्व CJI ही होना चाहिए, इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं. सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि भरोसेमंद मीडिया रिपोर्ट्स और कनॉट प्लेस वगैरह से मिली मीडिया फुटेज से ज्यादती का पता चलता है. इसके अलावा इलेक्ट्रिक बैटन का भी इस्तेमाल किया गया. हमने रिपोर्ट्स साथ में लगाई हैं. सीजेआई ने कहा कि इन मामलों की गहन जांच की जरूरत है. इसमें कोई शक नहीं. वह जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. जांच टीम में कौन-कौन होगा, यह हम बाद में बताएंगे.
सीजेआई ने कहा कि कानूनी सिद्धांतों के बारे में एक बात जो आप समझेंगे कि वह यह है कि इस कोर्ट के कई फैसले हैं. अब समय आ गया है कि इन सभी सिद्धांतों को एक साथ लाया जाए और उनका विस्तार किया जाए. न्यायिक प्रोटोकॉल का मतलब है. 2018 के निर्देश 2026 में किस हद तक प्रासंगिक हैं? शायद, हमें एक ऐसा सिस्टम बनाने की जरूरत है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी स्थिति आने पर प्रोटोकॉल तुरंत लागू हो जाए. दीवान ने प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा का इस्तेमाल करने वाले प्रतिवादियों के खिलाफ अंतरिम निर्देश देने की मांग पर ज़ोर दिया. सीनियर वकील शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने कहा है कि वह FIR वापस ले रही है, लेकिन 150 से ज्यादा नाबालिग अभी भी हिरासत में हैं. उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. 48 घंटे से ज़्यादा समय से हिरासत में हैं. 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के पास भेजा गया. एक लड़का 13 साल का है.
दिल्ली में लाठीचार्ज के बाद भीड़ तितर-बितर हो गई. इस बार के वकील भी वहां मौजूद थे. कनॉट प्लेस में उनकी भी पिटाई की गई. यह आत्मरक्षा के अधिकार का बेहद गलत इस्तेमाल था. एडवोकेट प्रशांत भूषण, जुनैद मलिक की ओर से कहा कि वह खाना पहुंचा रहे थे. SG तुषार मेहता ने कहा कि वह पीड़ित नहीं हैं. यह एक अलग मामला है. भूषण ने कहा कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। मसूरी ले जाया गया। पूरे परिवार को उठाकर पूछताछ की गई कि उन्हें कौन फंडिंग कर रहा है. पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह से गैर-कानूनी थी. एक और मामला- पत्थरों से भरा एक पूरा ट्रक. सीजेआई ने कहा कि ये सभी मुद्दे, आखिरकार इन्हें किसी कमेटी/आयोग/SIT के सामने उठाना होगा. जांच वैज्ञानिक होनी चाहिए, सबूत चाहिए.
सीजेआई ने कहा कि कल किसी ने बताया था कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले को देख रहा है. हम कह सकते थे कि सारे मामले वहीं चले जाएं लेकिन चूंकि इसमें दूसरे राज्य भी शामिल हैं, इसलिए हमने इस पर सुनवाई की. एसजी ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है और अगर किसी ने देश के कानून का उल्लंघन किया है, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए. कुछ याचिकाएं हैं जिनमें पुलिस अधिकारी शामिल हैं, 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. राज्य के तौर पर हम ऐसा कुछ नहीं कर सकते जिससे पुलिस अधिकारियों का मनोबल गिरे. सच्चाई कोर्ट के सामने आनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि ये हमले छात्रों ने किए थे या कुछ उपद्रवियों ने. सीजेआई ने कहा कि सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए SIT का गठन किया जा सकता है.



