वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर बंगाल पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

  • कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई
  • अदालत बोली- हर ब्लॉक में एसआईआर ट्रब्यूनल बनाए जाएं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ अपीलों का तेज़ी से निपटारा करने के लिए पश्चिम बंगाल के हर ब्लॉक में एसआईआर ट्रिब्यूनल बनाए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल में पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ दायर अपीलों पर ट्रिब्यूनल द्वारा किए गए फैसलों का विवरण रिकॉर्ड पर रखे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ अपीलों का तेज़ी से निपटारा करने के लिए पश्चिम बंगाल के हर ब्लॉक में एसआईआर ट्रब्यूनल बनाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह बुनियादी ढांचे और मामलों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने जैसी अन्य चिंताओं पर विचार करने से पहले, मौजूदा ट्रिब्यूनल द्वारा संभाले और निपटाए जा रहे मामलों की संख्या का आकलन करना चाहता है। बेंच ने चुनाव आयोग से ट्रिब्यूनल के कामकाज के बारे में खास जानकारी मांगी, जिसमें अभी चल रहे ट्रिब्यूनल की संख्या, उनके काम के घंटे और निपटाई गई अपीलों की संख्या शामिल है। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने अपील निपटाने के लिए एक समय-सीमा तय करने का निर्देश देने की मांग की। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह इस चरण में समय-सीमा तय करने की स्थिति में नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने भी ट्रिब्यूनल के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे के बारे में चिंता जताई। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि बुनियादी ढांचे और कामकाज से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार करने से पहले वह निपटान के आंकड़ों की जांच करेगा। कार्यवाही के दौरान उन लोगों को राशन और अन्य कल्याणकारी लाभ न मिलने के बारे में भी बातें हुईं, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जबकि ऐसे हटाने के खिलाफ उनकी अपील अभी भी लंबित है।

बोझ-कामकाज का आकलन करने में मदद करें

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, समय-सीमा? वह हम तय नहीं कर सकते, पहले हमें ट्रिब्यूनल के फैसलों की संख्या और उनकी सही-गलत होने की जांच करने दें। बेंच ने संकेत दिया कि निपटान के आंकड़े उसे ट्रिब्यूनल के काम के बोझ और कामकाज का आकलन करने में मदद करेंगे, ताकि यह तय किया जा सके कि आगे और निर्देश देने की ज़रूरत है या नहीं। वहीं कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जमीयत ए उलेमा को कुछ शर्तों के साथ रैली आयोजित करने की अनुमति दे दी और मंजूरी देने से पुलिस के इनकार करने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने याचिकाकर्ता और उनके संगठन को पूर्वाह्न 11.30 बजे से दोपहर एक बजे तक राजाबाजार से मौलाली तक रैली निकालने की अनुमति दी।

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