ईडी का कर्नाटक में छापा, सियासत ने खोया आपा
राजनीतिक गलियारों में मचा हडक़ंप, मंत्री सतीश जारकीहोली और सांसद बेटी प्रियंका के 18 ठिकानों पर छापेमारी\मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला

कांग्रेस और भाजपा में तीखी नोकझोंक
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार (9 सितंबर) को कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के कद्दावर नेता और लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली तथा उनकी बेटी व चिक्कोडी से सांसद प्रियंका जारकीहोली के परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने राज्य भर में करीब 18 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हडक़ंप मच गया है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार (9 सितंबर) को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली, उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली और कुछ अन्य लोगों से जुड़ी जगहों पर छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक, बेंगलुरु के डॉलर्स कॉलोनी इलाके में 64 वर्षीय मंत्री के घर समेत करीब 18 जगहों की तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि उनकी बेटी प्रियंका जारकीहोली, जो चिक्कोडी लोकसभा सीट से सांसद हैं, के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए सभी परिसरों के बाहर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों को तैनात किया गया है, ताकि बिना अनुमति किसी की आवाजाही न हो सके।

जून में रिश्तेदारों और अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि जारकीहोली परिवार केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर काफी समय से था। इससे पहले इसी वर्ष जून के महीने में एड ने बेलगावी में आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त और सतीश जारकीहोली के बहनोई वाई. मंजूनाथ के आवास पर भी बड़े पैमाने पर तलाशी ली थी। उस समय मंजूनाथ के साथ-साथ मंत्री के कई अन्य करीबी करीबियों और रिश्तेदारों के घरों को भी खंगाला गया था।
कांग्रेस का केंद्र पर निशाना
वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है और वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी निष्पक्ष जांच कर रही है।
केरल के मुख्यमंत्री विजयन और उनकी बेटी के खिलाफ ईडी ने मांगी एफआईआर
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी ने केरल के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस को पत्र लिखकर पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीना और दामाद व विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास के खि़लाफ़ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़े कथित रिश्वत मामले से संबंधित है। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और सीएमआरएस तथा विजयन की बेटी की कंपनी एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़ी संस्थाओं के बीच संदिग्ध अनियमित वित्तीय लेन-देन के आरोपों से जुड़ा है। पिछले महीने, ईडी ने वित्तीय लेन-देन मामले की जांच के सिलसिले में केरल के कोझिकोड में आठ जगहों पर तलाशी ली थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि ये तलाशी अभियान, इस मामले में ED द्वारा इस साल 27 मई को की गई पिछली छापेमारी का ही अगला कदम था। उन्होंने कहा कि मई में की गई तलाशी के दौरान, केंद्रीय एजेंसी को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीना से जुड़े कथित मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) के कुछ नए सबूत मिले थे। 27 मई को, ED के कोच्चि ज़ोन ने CMRL के डायरेक्टर SN शशिधरन कार्था, सरन स कार्था, वीना और उनकी कंपनी एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ़ मामले में 1०जगहों पर तलाशी ली थी।
सोनी-क्रोमा के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत एफआईआर की मांग
अब खुलेगा टीवी की असली कहानी का राज
4क्करू के जीएम एडमिन मनीष मौर्या ने मुंबई पुलिस कमिश्नर से की शिकायत
जांच में एक्टिवेशन, सर्विस और स्टॉक रिकॉर्ड खंगालने की मांग
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिस टीवी को प्रीमियम बिल्कुल नया और फैक्ट्री फ्रेश बताकर करीब ढाई लाख रुपये में बेचा गया वही खरीद के महज एक महीने के भीतर गंभीर तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। अधिकृत तकनीशियन की सर्विस के बाद समस्या दोबारा सामने आई और आखिरकार टीवी ने काम करना ही बंद कर दिया। अब मामला सिर्फ खराब टीवी और खराब सर्विस तक सीमित नहीं रहा है।
सोनी और क्रोमा के खिलाफ धोखाधड़ी की आशंका जताते हुए मुंबई पुलिस में शिकायत पहुंच गई है और एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की गई है। 4पीएम न्यूज नेटवर्क के जीएम एडमिन मनीष मौर्या ने मुंबई पुलिस आयुक्त को दी शिकायत में बताया है कि उन्होंने 7 जून 26 को अंधेरी, मुंबई स्थित क्रोमा स्टोर से सोनी ओएलईडी ब्राइवा 8 ii, मॉडल K-zzXR80Mw खरीदा था। शिकायत के मुताबिक टीवी खरीदने के लगभग एक महीने के भीतर गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। सोनी के अधिकृत तकनीशियन ने टीवी की जांच और सर्विस की लेकिन समस्या दोबारा पैदा हो गई। इसके बाद टीवी पूरी तरह बंद हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोनी और क्रोमा से लगातार संपर्क तथा रिपलेस्मेंट अथवा रिफंड की मांग के बावजूद उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। शिकायत में कहा गया है कि इतने महंगे नए टीवी में खरीद के तुरंत बाद बार-बार गंभीर खराबी सामने आने से यह आशंका पैदा हुई कि कहीं उत्पाद की पूर्व एक्टीवेशन, इंस्टालेशन, यूसेज, रिटर्न, रिपेयर अथवा रिअम्ब्रस्मेंट से जुड़ी कोई जानकारी छिपाई तो नहीं गई। यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। मनीष मौर्या ने पुलिस से मांग की है कि जांच के दौरान टीवी का सीरियल नम्बर, मैन्यूफैक्चरिंग रिकार्ड सोनी एक्टीवेशन और इंस्टालेशन हिस्ट्री वारंटी रजिस्ट्रेशन आदि सुरक्षित कराए जाएं। इन रिकॉर्ड से यह साफ हो सकता है कि टीवी वास्तव में फैक्ट्री फ्रेश था या उससे पहले उसका कोई इस्तेमाल अथवा सर्विस इतिहास था। मनीष मौर्या का साफ कहना है कि वह बिना जांच के यह दावा नहीं कर रहे कि टीवी निश्चित रूप से पुराना था। उनका कहना है कि संदेह की वजह सामने आए घटनाक्रम और इतनी कम अवधि में हुई गंभीर खराबी है जिसकी सच्चाई कंपनी के रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है।
शिकायत में जांच के दौरान यदि धोखे से नया उत्पाद बताकर धन लिए जाने के तत्व सामने आते हैं तो बीएनएस की धारा 318, जिसमें चीटिंग का प्रावधान है, तथा परिस्थितियों के अनुसार धारा 318(4) समेत अन्य लागू धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है।
तेलंगाना से बीआरएस के 22 विधायक पूरे मानसून सत्र के लिए सस्पेंड
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
हैदराबाद। तेलंगाना विधानसभा में आसन के समक्ष आ कर नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित करने के कारण बुधवार को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के 22 सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही बीआरएस सदस्यों ने आसन के समक्ष आ कर ‘हमें न्याय चाहिए’ जैसे नारे लगाए। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने दो दिन पहले पार्टी की महिला विधायकों के खिलाफ पुलिस की कथित मनमानी (जब पुलिस ने विधानसभा गेट पर बीआरएस विधायकों को रोका) और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की मौत की कामना करने संबंधी सत्तारूढ़ कांग्रेस के कुछ सदस्यों की कथित टिप्पणियों पर चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया।
यूएस नागरिक पर यूएपीए नहीं लगाने को लेकर निशाने पर एनडीए सरकार
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना, जयराम रमेश केंद्र पर हमलावर, पूछा- किसके दबाव में झुकी मोदी सरकार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ एनआईए की चार्जशीट में यूएपीए की धारा न लगाने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एजेंसी पर आतंकवाद से जुड़े आरोप हटाने के लिए किसी तरह का दबाव डाला गया था।
एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या एनआईए का यह फैसला निष्पक्ष और सही जांच के नतीजे पर आधारित था या फिर अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार के दबाव में लिया गया। क्या एनआईए ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोप सही जांच के बाद हटाए या अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार ने तुरंत ऐसा करने के लिए दबाव डाला? इसके बदले भारत को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है? यह दादागिरी जैसा लगता है।इससे पहले 2 सितंबर को मैथ्यू वैनडाइक के परिवार की ओर से चलाए जा रहे एक एक्स खाते से अमेरिकी सरकार से उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कराने की अपील की गई थी। परिवार ने दावा किया था कि मैथ्यू वैनडाइक बेगुनाह हैं।
परिवार ने कहा, मैथ्यू वैनडाइक का परिवार अमेरिकी सरकार से तुरंत राजनयिक दखल की मांग कर रहा है, क्योंकि उन्हें अभी भी कैदियों के बुनियादी अधिकार नहीं मिल रहे हैं और उन्हें भारत के दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल की जेल संख्या 8/9 में अकेले रखा जा रहा है। मैथ्यू पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने मानवीय तकलीफों को दर्ज किया है और संघर्ष तथा संकट से प्रभावित लोगों तक मानवीय मदद पहुंचाई है।
छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सीजेआई बोले- मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस से जुड़ा है। यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता बिश्वजीत भट्टाचार्य ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उठाया।
उन्होंने बताया कि छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस दिया गया था। वकील के मुताबिक, यह कार्रवाई तब की गई, जब सुप्रीम कोर्ट छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और छात्रों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है।
कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया था कि शांति बनाए रखने के लिए उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका क्यों न लिया जाए। इसके अलावा दो जमानतदारों से भी पांच-पांच लाख रुपये के मुचलके की मांग की गई थी। वरिष्ठ वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नोटिस पर अमल होने वाला था। हालांकि, बाद में मामला प्रेस में आने के बाद इसे वापस ले लिया गया। वकील ने कहा कि अधिकारियों की ऐसी कार्रवाई छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा कर सकती है।
छात्र को नोटिस क्यों दिया गया?
चार सितंबर 26 को जारी नोटिस में पुलिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि अक्षत त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहे थे। उन पर छात्रों को कॉकरेच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया गया। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी कथित गतिविधियों से काफी तनाव पैदा हुआ। इससे लड़ाई-झगड़े और शांति भंग होने की आशंका भी जताई गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 126 और 135 के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार माना।



