सियासी छांव में नगर पालिका में लहलहा रही फर्जीवाड़े की पौध

आगामी विस चुनाव में पालिका का भ्रष्टाचार बन सकता है बड़ा मुद्दा

  • महमूदाबाद नगर पालिका में फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर नागरिकों में बढ़ता जा रहा आक्रोश
  • ईओ की पैरवी से खुद की सियासी जमीन को बंजर तो विपक्ष की पिच कहीं कर न दें मजबूत

वली चौधरी/4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सीतापुर। महमूदाबाद नगर पालिका में फर्जीवाड़े के मंसूबे कोई नई बात नहीं हैं। अगर बुनियाद खोदकर देखा जाए तो मलबे में भ्रष्टाचार से सनी कई ईंटें निकलेंगी। दिलचस्प बात तो यह है कि इन दिनों पालिका में फैला भ्रष्टाचार अब सियासी रंग लेता जा रहा है। गहराते मामले के बीच पालिका में फैले भ्रष्टाचार का मकडज़ाल आगामी विधानसभा चुनाव में न सिर्फ बड़ा मुद्दा बनकर उभर सकता है, बल्कि एक बड़े दल के प्रत्याशी की राह में रोड़ा भी साबित हो सकता है।
लंबे समय से पालिका में फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद भी कार्रवाई तो दूर, जांच का भी हाशिये पर चला जाना नागरिकों को हैरान कर रहा है। नागरिकों का गुस्सा और गुबार सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियों में देखने को मिल रहा है। इन सबके बीच बड़ा सवाल हर एक की जुबान पर यह है कि निकाय से जुड़े अधिशासी अधिकारी पर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आखिर कार्रवाई तो दूर, जांच तक सही से क्यों नहीं हो पा रही है। इसके अलावा वह कौन सियासतदान है जो इस अधिकारी को संरक्षण दे रहा है। ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचारी अधिकारी की करतूतों को सियासी पुश्तपनाही से दबाया तो जा सकता है, मगर उसे कार्रवाई की जद में आने से बचाया नहीं जा सकता। एक सियासी हुक्मरान का राजधानी तक इस ईओ की पैरवी करना उसकी सियासी जमीन को अभी से बंजर कर रहा है। ऐसे में इसका फायदा विपक्ष के एक बड़े सियासतदान को भी मिल रहा है। सत्तारूढ़ नुमाइंदे की नादानी विपक्ष के इस संभावित प्रत्याशी की सियासी पिच अभी से तैयार कर रही है, जिसका उसे आगामी विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईओ की बेईमानी पर पर्दा डालने अथवा पैरवी के लिए जो दौड़ाभागी में सरकारी ईंधन फूंका जा रहा है, उससे क्षणिक आर्थिक लाभ भले मिल जाए, मगर विपक्ष को इसका सियासी माइलेज जरूर मिल रहा है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई

डीएम डॉ. राजा गणपति द्वारा एसडीएम महमूदाबाद अभिषेक प्रियदर्शी को जांच अधिकारी नामित किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच में शिकायतों की पुष्टि होने और वित्तीय अनियमितता अथवा फर्जीवाड़ा सामने आने पर संबंधित अधिशासी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेजी जा सकती है। ऐसे में आउटसोर्सिंग भुगतान, टेंडर, स्ट्रीट लाइट, डीजल खर्च और निर्माण कार्यों से जुड़े आरोपों की जांच के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

सूची वायरल करने में भी ‘खेल’!

सोशल मीडिया पर जब लोगों ने सवाल उठाए तो ईओ ने आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची खुद ही वायरल कर दी। हैरतअंगेज बात तो यह रही कि ईओ ने जो आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची वायरल की, उसमें कर्मचारियों की वल्दियत और पता हटा दिया गया। इतना ही नहीं, जिनके नाम संदिग्ध थे, उनके नामों में भी छेड़छाड़ करते हुए उपनाम हटा दिए गए।
बड़ा सवाल यह है कि जब सब कुछ ठीक-ठाक था तो इस तरह सूची में छेड़छाड़ करने का क्या मतलब था। और हड़बड़ाहट में इसे खुद व्हाट्सएप समूहों पर वायरल करने का औचित्य क्या था। आखिर इसे किसी और से भी वायरल कराया जा सकता था। खास बात यह है कि यह सब उस वक्त किया गया, जब डीएम की ओर से फटकार लगाई गई थी। इसके बावजूद सूची में छेड़छाड़ किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आउटसोर्स कर्मियों की जांच में सीसीटीवी और जीपीएस से खुल सकता है राज

आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर कथित फर्जी भुगतान की शिकायत की जांच में सिर्फ कागजों में दर्ज उपस्थिति देखना पर्याप्त नहीं होगा। यदि आरोपों के मुताबिक संदिग्ध कर्मचारी वास्तव में काम कर रहे थे तो उनकी कार्यस्थल पर मौजूदगी का डिजिटल रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। इसके लिए संबंधित अवधि की जीपीएस लोकेशन वाली फोटो, मोबाइल से दर्ज उपस्थिति, उपस्थिति रजिस्टर और भुगतान संबंधी अभिलेख का मिलान कराया जा सकता है। इसके अलावा यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है कि जिन कर्मचारियों की उपस्थिति पालिका कार्यालय में दर्ज हुई, वे वास्तव में वहां पहुंचे भी थे या नहीं। इसके लिए संबंधित अवधि की नगर पालिका में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से उनके चेहरे और आवाजाही का मिलान कराया जा सकता है। जिन कर्मचारियों की मौके पर तैनाती बताई गई है, उनके संबंधित कार्यस्थल के पर्यवेक्षक की रिपोर्ट, मस्टर रोल, उपस्थिति और भुगतान रिकॉर्ड का भी आपस में मिलान कराया जाए तो कागजों पर मौजूद और वास्तव में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच का फर्क सामने आ सकता है।

Related Articles

Back to top button