संसद में पप्पू यादव के ड्रामे पर बयानों की झड़ी
टीएमसी व सपा ने उठाए सवाल

- वाराणसी में पप्पू यादव के खिलाफ एफआईआर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सासंद पप्पू यादव ने संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले को लेकर प्रदर्शन किया था। पप्पू यादव के संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनने को लेकर टीएमसी व सपा ने उनकी आलोचमना की है। सांसद कीर्ति आजाद ने प्रतिक्रिया दी है। संसद परिसर में भगवा पहनने की वजह से वाराणसी में पप्पू यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था- एफआईआर से न तो राहुल गांधी कभी डरे हैं और न ही प्रियंका गांधी, इसलिए वह भी डरने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा था-भगवा पहनने का अधिकार हमें नहीं है? जब गिरी को छद्म रूप से गेरुआ पहनकर चोरी करने का अधिकार है तो पप्पू यादव को गेरुआ पहनकर गेरुआ की रक्षा करने का अधिकार नहीं है और मैं खीरा-ककड़ी हूं क्या? पप्पू यादव के संसद में प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए सरकारी आवास पर 2 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। जहां पर उस समय हंगामा मच गया, जब एक युवक ने कथित तौर पर उन पर चप्पल फेंककर हमला कर दिया।
पप्पू यादव ने तो दर्शाया कि किस तरह डकैती हुई : कीर्ति आजाद
कीर्ति आजाद ने आगे कहा- नितिन नवीन हनुमान जी को दौड़ा रहे हैं। ये सब संस्थान का सम्मान नहीं है। पप्पू यादव ने तो दर्शाया कि किस तरह डकैती हुई है। स्वामी नित्यानंद दास भगवाधारी हैं, गोविंद देव गिरि, दिनेंद्र दास जैसे लोग भगवाधारी हैं ट्रस्ट में इसमें इतने सारे भगवाधारी हैं।
संसद परिसर में पप्पू यादव ने जो किया गलत था : राम गोपाल
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने सोमवार को सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सनातन धर्म का अपमान करने के आरोप में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद समेत विपक्ष के नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यादव ने कहा कि सरकार का ध्यान नैरेटिव बनाने और दोष दूसरों पर मढऩे पर है। राम गोपाल ने कहा कि यह गलत था, क्योंकि राम मंदिर में हुई चोरी से संतों का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए, असल में यह एक गलत काम था, ऐसा नहीं होना चाहिए था। अगर सरकार खुद ही रचनात्मक काम नहीं करती, तो रचनात्मक अभिव्यक्ति के उभरने की कोई गुंजाइश नहीं रहती। इसके बजाय, वे एक नैरेटिव बनाने, तथ्यों को घुमाने-फिराने और दूसरों पर दोष मढऩे के तरीकों पर ध्यान देते हैं। वे इसमें माहिर हैं।



