तमिलनाडु: मंदिर जमीन घोटाले में बड़ी सफलता, CBCID ने 3 आरोपियों को पकड़ा
गलत तरीके से जमीन का रजिस्ट्रेशन कराए जाने को लेकर जनता और राजनीतिक हलकों में खासा आक्रोश दिखा. लोगों की नाराजगी को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक ने पिछले दिनों 15 जुलाई को मामले की जांच क्राइम CB-CID को सौंप दी थी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गलत तरीके से जमीन का रजिस्ट्रेशन कराए जाने को लेकर जनता और राजनीतिक हलकों में खासा आक्रोश दिखा. लोगों की नाराजगी को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक ने पिछले दिनों 15 जुलाई को मामले की जांच क्राइम CB-CID को सौंप दी थी.
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की जांच जारी है, इस बीच देश के कई अन्य मंदिरों से ऐसे ही घोटालों और चोरी के मामले सामने आए. इस पर कार्रवाई भी की जा रही है. लेकिन अब मंदिर की जमीन से जुड़ा धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया जिसमें तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित मंदिर से संबंधित मठ की कीमती जमीन का धोखाधड़ी के साथ रजिस्ट्रेशन ही करवा लिया गया. आम जनता की नाराजगी देखते हुए सरकार में जांच के आदेश दिए और 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि CB-CID ने तमिलनाडु के डिंडीगुल शहर के मशहूर पलानी मुरुगन मंदिर से जुड़े एक मठ की कीमती जमीन के कथित धोखाधड़ी के जरिए रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये गिरफ्तारियां मंदिर के पास तलहटी में स्थित 1.4 एकड़ के प्लॉट से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल केस में एक बड़ी कामयाबी हैं.
100 करोड़ कीमत, 2 करोड़ में रजिस्ट्री
यह प्रॉपर्टी, जिसका इस्तेमाल अभी श्रद्धालुओं के लिए फ्री पार्किंग के तौर पर किया जा रहा है और इसकी बाजार में कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई, उसे इस महीने की शुरुआत में महज 2 करोड़ रुपये में निजी शख्स के नाम धोखाधड़ी से रजिस्टर करा दिया गया था.
धोखाधड़ी के साथ यह लेन-देन 6 जुलाई को किया गया था, जबकि 1888 का एक स्थायी बंदोबस्ती विलेख (Permanent Endowment Deed) मौजूद है, जिसमें इस जमीन को सिर्फ धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए समर्पित किया गया था और इस पर किसी भी तरह की व्यवसायिक बिक्री या ट्रांसफर करने पर रोक लगी थी. रजिस्ट्रेशन के दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (Hindu Religious and Charitable Endowments, HR&CE) विभाग की स्पष्ट, लिखित आपत्तियों पर भी ध्यान नहीं दिया गया.
रजिस्ट्री कराने वाले अफसरों पर गिरी गाज
राज्य सरकार ने पहले ही अवैध रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पलानी के ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन और जिला रजिस्ट्रार शशिकला को सस्पेंड कर दिया है. मणिकंदन, जो अभी मद्रास हाई कोर्ट से मिली अंतरिम अग्रिम जमानत पर बाहर हैं, उनसे हाल ही में CB-CID की टीम ने 7 घंटे तक लंबी पूछताछ की थी.
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच पहले ही इस केस में दखल दे चुकी है और विवादित बिक्री विलेख (Sale Deed) को अमान्य घोषित कर चुकी है. गलत तरीके से जमीन का रजिस्ट्रेशन कराए जाने को लेकर जनता और राजनीतिक हलकों में खासा आक्रोश दिखा. लोगों की नाराजगी को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक ने पिछले दिनों 15 जुलाई को मामले की जांच क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CB-CID) को सौंप दी थी. चल रही जांच के तहत, जांचकर्ताओं ने घोटाले में शामिल बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए मंदिर के पूर्व अधिकारियों, रिटायर राजस्व अधिकारियों और रजिस्ट्रेशन विभाग के कर्मचारियों सहित 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की है.



