ईडी का छापा, सियासत ने खोया आपा
लोकतंत्र को कमजोर कर रही बीजेपी : पवन खेड़ा

- कांग्रेस व टीएमसी का भाजपा पर हमला
- विपक्ष बोला- एजेंसियां भाजपा की निजी सेना
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कोलकता में आईएपीसी पर ईडी के छापे के बाद नेताओंं का सियासी आपा भी खो गया। कांग्रेस, टीएमसी समेत कई दलों ने भाजपा व एनडीए सरकार पर करार वारकिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा पर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग को अपनी निजी सेना की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, और दावा किया कि ये एजेंसियां केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में विपक्षी दलों को निशाना बनाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं।
खेड़ा ने कहा कि भाजपा ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई को अपनी निजी सेना समझती है। उन्होंने दावा किया कि ईडी केवल चुनिंदा राज्यों में ही छापेमारी करती है, जहां भाजपा की सरकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ईडी की छापेमारी की खबर देखते ही हम समझ जाते हैं कि यह कुछ चुनिंदा राज्यों में ही हुई है। हम हमेशा से कहते आए हैं कि भाजपा ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई को अपनी निजी सेना समझती है। यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
ममता शेरनी हैं, झुकेंगी नहीं : महबूबा मुफ्ती
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शेरनी बताते हुए कहा कि टीएमसी प्रमुख बहुत बहादुर हैं और आत्मसमर्पण नहीं करेंगी। बंगाल के कोलकाता स्थित आईपीएसी कार्यालय पर ईडी की छापेमारी और ममता के विरोध पर मुफ्ती ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर एक परीक्षण प्रयोगशाला बन गया है और यही बात अन्य राज्यों पर भी लागू होती है। चाहे एनआईए हो, ईडी हो या अन्य, केंद्रीय एजेंसियों द्वारा यहां छापेमारी आम बात है, लेकिन अब यह अन्य राज्यों में भी फैल रही है। महबूबा ने साफ तौर पर कहा कि मुझे उम्मीद है कि ममता बनर्जी साहसी होंगी। वह शेरनी हैं, वह इनसे सख्ती से निपटेंगी। उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद खुद, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि जब अनुच्छेद 370 निरस्त किया गया, जब छापे मारे गए और जब तीन मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया, तब अधिकांश राजनीतिक दलों ने चुप्पी साधे रखी। अब यही स्थिति पूरे देश में देखने को मिल रही है।
यह सिर्फ चुनावी लाभ का ड्रामा : अधीर चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कोलकाता स्थित आई-पीएसी कार्यालय पर की गई छापेमारी के विरोध में टीएमसी द्वारा किए गए प्रदर्शन के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ईडी की तलाशी अभियान के दौरान टीएमसी को विरोध प्रदर्शन करना जरूरी लगा, लेकिन सांसदों ने बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के लिए कभी विरोध नहीं किया, जिन पर उनके अनुसार बांग्लादेशी होने का बहाना बनाकर हमला किया गया और उन्हें भागने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि शायद उनके (टीएमसी के) कुछ सांसद अभी भी दिल्ली में हैं। कल की घटना के बाद उन्हें लगा कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करना चाहिए। मेरा सवाल यह है कि जब बंगाल के प्रवासी श्रमिक भारत के विभिन्न हिस्सों में काम करने जाते हैं और उन पर बांग्लादेशी होने का बहाना बनाकर हमला किया जाता है, जिससे उन्हें भागने पर मजबूर होना पड़ता है, तो हमने टीएमसी पार्टी की ओर से संसद के अंदर या बाहर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा। अब, चूंकि ईडी ने कार्रवाई की है, इसलिए उन्हें विरोध प्रदर्शन करना जरूरी लग रहा है। इसे केवल चुनावी लाभ उठाने की कोशिश कहा जा सकता है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को टीएमसी से चुनावी लाभ प्राप्त करने का एक तरीका बताया।
सिर्फ विपक्षी दलों के पीछे पड़ते हैं ईडी वाले : शमा मोहम्मद
कोलकाता में आई-पीएसी कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के बारे में बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने खेड़ा के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि ईडी केंद्र सरकार का एक अंग बन गई है। उन्होंने कहा कि ईडी मौजूदा केंद्र सरकार का एक अंग बन गया है। वे सिर्फ विपक्षी दलों के पीछे पड़ते हैं। आई-पैक के पूरे भारत में कार्यालय हैं क्योंकि वे मौजूदा सरकार के गठबंधन दलों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए काम करते हैं… उन्हें एक ही बार में सभी आई-पैक कार्यालयों में ईडी भेजनी चाहिए थी, न कि सिर्फ उन जगहों पर जहां विपक्षी दल सत्ता में हैं।



