बीजेपी के खिलाफ भयंकर बवाल, सीएम पद की शपथ लेते ही आखिर ऐसा क्या हुआ?
मणिपुर में बीजेपी की सरकार की बनते ही एक बार फिर भड़की हिंसा। मुख्यमंत्री के शपथ लेने के 24 घंटों के अंदर ही सड़कों पर बो गई आगजनी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मणिपुर में बीजेपी की सरकार की बनते ही एक बार फिर भड़की हिंसा। मुख्यमंत्री के शपथ लेने के 24 घंटों के अंदर ही सड़कों पर बो गई आगजनी।
4 फरवरी को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया जाता है। कहा जाता है कि मणिपुर के हालात अब सामान्य हो गए हैं। इसी 4 फरवरी को BJP के खेमचंद सिंह मणिपुर के CM ने शपथ लेते हैं। उनके साथ दो डिप्टी सीएम भी शपथ लेते हैं और फिर उसके अगले ही दिन यानि 5 फरवरी को मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क जाती है। नई सरकार का विरोध होने लगता है। बंद का आह्वान किया जाने लगता है। हालात अचानक इतने तनावपूर्ण हो जाते हैं कि एक बार फिर से मणिपुर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की जाती है। तो आखिर अब क्या वजह हो गई कि नई सराकर के गठन के बाद राज्य के हालात एक बार फिर से इतने खराब हो गए हैं? क्या मणिपुर में अब भी सरकार के खिलाफ नाराजगी है? क्या मणिपुर मोदी शाह के हाथ से निकलता जा रहा है? आखिर क्या वजह है कि सीएम के शपथ लेते ही मणिपुर के हालात, जो इतने मुश्किल से ठीक हुए थे, वो एक बार फिर नाजुक मोड़ पर आ गए हैं।
मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कती है। हिंसा में कई लोगों की जान जाती हैे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इसपर एक शब्द नहीं बोलते हैं और न मणिपुर का दौरा करते हैं। राज्य के पूर्व बीजेपी सीएम खुद कहते हैं कि उनसे अब वहां का हालात नहीीं संभस रहे तो वहां पर राष्ट्रपति शासन लागु कर दिया जाता है। फिर करीब 28 महीनों के बाद जब मामला एक दम शांत हो जाता है तब मोदी जी मणिपुर का पहला दौरा करते हैं। वहां जाकर भाषणबाजी करते हैं। दो चार आंसू टपकाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और वापस आ जाे हैं। फिर हालातों के देखते हुए बीजेपी वहां से राष्ट्रपति शासन हटा लिया जाता है और खेमचंद सिंह को राज्य का नया सीएम बनाकर शपथ दिला दी जाती है। उनके साथ नेमचा किपगेन और लोसी दिखो उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हैं। लेकिन उनके शपथ लेते ही मणिपुर के हालात एक बार फिर बेकाबू हो जाते हैं। चुराचंदपुर जिले में गुरुवार को तनाव बढ़ जाता है। जिले के तुइबोंग क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों द्वारा नई एनडीए सरकार के गठन का खुलेआम विरोध होता है। प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं। जिससे बाद भारी सुरक्षा बलों को तैनात किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस से झड़पों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है। इलाके में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षाबल इलाके में हालात काबू करने में जुटे हुए हैं।
जनसत्ता एक्सप्रेस में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से कहा गया कि प्रदर्शनकारियों में कुकी विधायकों के एनडीए सरकार को समर्थन देने से असंतोष व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचित विधायकों पर समुदाय की भावनाओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। कुकी विधायकों में उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और विधायक एलएम खाउते और नगुरसांग्लुर सनाते के नाम शामिल हैं। इनके सरकार में भागीदार बनते ही इलाके में कुकी समुदाय के बीच तनाव में और बढ़ गया है। यानि कुकी समुदाय खुलेतौर पर बीजेपी का विरोध कर रहा जबकि उसके समुदाय से एक उपमुख्यमंत्री भी चुना गया है। अब देखिए कुकी समूहों ने अपने समुदाय के विधायकों को मणिपुर सरकार गठन में भाग नहीं लेने की चेतावनी पहले से दी थी। लेकिन इसके बावजूद मोदी-शाह ने उन्हें सत्ता और पद की लालच दिखाकर उनसे समर्थन लेकर सरकार बना ली। फिर क्या था। मणिपुर एक बार जलने लग गया।
कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास बुधवार प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस के डंडे रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया। वहीं चुराचांदपुर में पूरी तरह बंद और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया। जिले के तुइबोंग मेन मार्केट इलाके में सैकड़ों युवा प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को वापस उनकी बैरक में धकेलने की कोशिश की। जब सुरक्षाबलों ने बात मानने से इनकार कर दिया तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने सड़क के बीच में टायर जला दिए।इतना ही नहीं दो प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध करते हुए आत्मदाह करने की कोशिश की। हालांकि पुलिसकर्मियों ने समय पर तेजी दिखाई और उन्हें बचा लिया। देखते ही देखते शाम तक यह प्रदर्शन उग्र हो गया और कई जगहों से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद छिटपुट झड़पों की खबरें सामने आईं। मतलब मोदी-शाह के एक और फैसले ने मणिपुर को फिर से आग में झोंक दिया। अब इसका खामियाजा किसको उठाना पड़ रहा है? मणिपुर की आम जनता को।
वहीं डेक्कान हेराल्ड की एक खबर के मुताबिक, कुकी समुदाय के सशस्त्र समूह, विलेज वॉलंटियर्स ने कुकी विधायक नेमचा किपगेन की हत्या के लिए 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। यह इनाम तब घोषित किया गया जब उन्होंने मणिपुर की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं विधायकों एलएम खाउते, एन सेनाते को मारने वाले को 10-10 लाख इनाम देने का ऐलान किया गया है। मतलब अब आप समझ सकते हैं कि जिसको मोदी शाह मास्टर स्ट्रोक समझ रहे होंगे उससे जनत में कितना रोष फैल गया है।
अब देखिए इसको लेकर कांग्रेस को मोदी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेट ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि, ‘मणिपुर फिर से जल रहा है। कल ही BJP ने नया मुख्यमंत्री बनाया। अब फिर से हिंसा भड़क गई है। लेकिन मोदी जी नेहरू जी को कोसने में व्यस्त हैं।’ वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने मणिपुर हिंसा की तस्वीरें शेयर करते हुए पोस्ट किया है, ‘आग लगे बस्ती में, मोदी जी मस्ती में, मणिपुर फिर जल रहा है, PM फिर संसद में गाल बजा रहा है।’
कुल मिलाकर मणिपुर की तस्वीर एक बार फिर यही सवाल खड़ा करती है कि क्या वहां की पीड़ा सिर्फ सत्ता के आंकड़ों तक सिमट कर रह गई है। राष्ट्रपति शासन हटाने और नई सरकार बनाने को हालात सामान्य होने का प्रमाण बताया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत ने 24 घंटे के भीतर ही इस दावे की पोल खोल दी। जिस राज्य ने महीनों तक हिंसा, भय और विस्थापन झेला, वहां बिना भरोसा बनाए, बिना समुदायों की सहमति के सरकार थोप देना आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। कुकी समुदाय की नाराजगी, विधायकों के खिलाफ खुला आक्रोश और सड़कों पर उतरते युवा इस बात का संकेत हैं कि मणिपुर का जख्म अब भी हरा है। दिल्ली में बैठे सत्ता के चाणक्या इसे मास्टर स्ट्रोक समझते रहे, लेकिन इसकी कीमत मणिपुर की आम जनता चुका रही है। सवाल सिर्फ सरकार बनने या गिरने का नहीं है, सवाल भरोसे, संवाद और संवेदनशीलता का है, जो इस पूरे घटनाक्रम में नदारद दिखती है। अगर यही रवैया रहा तो मणिपुर बार-बार जलेगा और हर बार जिम्मेदारी तय करने से सत्ता बचती रहेगी, जबकि लहूलुहान जनता सिर्फ शांति की उम्मीद लगाए बैठी रहेगी।



