करूर भगदड़: DMK ने SC से लगाई गुहार, CM-मंत्रियों पर रोक की मांग
याचिका में कहा गया कि जांच से जुड़े लोगों या राजनीतिक कार्यपालिका के सदस्यों द्वारा ऐसे गवाहों के साथ सीधी बातचीत से जांच की निष्पक्षता को लेकर उचित आशंका पैदा हो सकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: DMK नेता ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि पीड़ितों के परिवार भी CBI जांच में अहम गवाह हैं. याचिका में कहा गया कि जांच से जुड़े लोगों या राजनीतिक कार्यपालिका के सदस्यों द्वारा ऐसे गवाहों के साथ सीधी बातचीत से जांच की निष्पक्षता को लेकर उचित आशंका पैदा हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट आज सोमवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की एक याचिका पर कल सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है. इस याचिका में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों को करूर भगदड़ के बारे में सार्वजनिक बयान देने से रोकने और जांच के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत को नियंत्रित करने की मांग की गई है. मामले की जांच अभी सीबीआई कर रही है.
मुख्य विपक्षी दल DMK के सचिव आरएस भारती की ओर से सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने यह मुद्दा उठाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए, अहमदी ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई को कुरूर हादसे के पीड़ितों के परिवारों से मिलने वाले हैं, और आशंका जताई कि इससे गवाह प्रभावित हो सकते हैं.
गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश
अहमदी ने आशंका जताते हुए कहा, “हमने एक याचिका लगाई है. मामला जरूरी है. आपने CBI जांच का आदेश दिया था, और अब जब जांच चल रही है, तो गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. मैं इसे रिकॉर्ड के जरिए साबित कर सकता हूं.”
उन्होंने यह भी कहा, “यह मामला करूर भगदड़ से जुड़ा हुआ है. आपने एक मॉनिटरिंग कमेटी भी बना रखी है. इस बीच, अप्रैल के बाद, कुछ आरोपी – जो अब मौजूदा राज्य सरकार में मंत्री बन गए हैं, गवाहों को प्रभावित करने की सक्रिय कोशिश कर रहे हैं. इसलिए मैंने एक याचिका लगाई है, जिसे रिकॉर्ड से साबित किया जा सकता है. इसे पिछले हफ्ते शुक्रवार को दाखिल किया गया था. आशंका है कि यह 10 जुलाई को किया जा सकता है.”
CM विजय के मिलने से पहले याचिका
इस पर जस्टिस अमानुल्लाह ने पूछा, “आखिर इस संबंध में क्या आदेश दिया जा सकता है?” फिलहाल, बेंच कल मंगलवार को केस की सुनवाई के लिए सहमत हो गई है. याचिका में उन रिपोर्टों का जिक्र किया गया है जिनके अनुसार मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई के आसपास करूर जाने वाले हैं, ताकि वे मृतकों और घायलों के परिजनों से मुलाकात कर सकें और उन्हें सरकारी आदेश, अनुकंपा के आधार पर नौकरी और अन्य लाभ दे सकें.
याचिका में यह साफ किया गया कि उन्हें राज्य सरकार की ओर से अनुग्रह राशि या कल्याणकारी मदद दिए जाने को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, DMK नेता ने तर्क दिया कि पीड़ितों के परिवार CBI जांच में अहम गवाह भी हैं. याचिका में कहा गया कि जांच से जुड़े लोगों या राजनीतिक कार्यपालिका के सदस्यों द्वारा ऐसे गवाहों के साथ सीधी बातचीत से जांच की निष्पक्षता को लेकर उचित आशंका पैदा हो सकती है.
पहले ही मुआवजा दे चुके हैं विजय
याचिका में यह भी बताया गया कि विजय ने पहले ही पिछले साल अक्टूबर 2025 में, जब भगदड़ को लेकर आपराधिक कार्यवाही चल रही थी, तब मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायल पीड़ितों को 2-2 लाख रुपये दिए थे.
इसमें तर्क दिया गया है कि पद संभालने के बाद सरकारी लाभ देने के प्रस्ताव और आरोपी मंत्री के सार्वजनिक बयानों को देखते हुए, जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायिक सुरक्षा को बनाए रखने की जरूरत है. पिछले साल 27 सितंबर को करूर में ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) की जन-संपर्क रैली के दौरान अचानक भगदड़ मच गई. हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई और 140 से अधिक लोग घायल हो गए.



