पैरों की मांसपेशियां इन योगासनों से होगीं मजबूत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मजबूत पैर चाल, सुंदर बॉडी के साथ ही शरीर का भार संभालने के काम आते हैं। पैरों की मांसपेशियां मजबूत होने से शरीर में भी ताकत रहती है। पैरों की कमजोर मांसपेशियों का मतलब है, जल्दी थकान महसूस होना, घुटनों में दर्द, कम संतुलन और उम्र से पहले शरीर का झुक जाना। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पैरों को मजबूती दिए जाने की जरूरत है। पुराने जमाने में लोग खेतों में चलते फिरते थे, पैदल चलने, शारीरिक सक्रियता होने से पैर मजबूत बना लेते थे। हालांकि आज कुर्सी वाली संंस्कृति ने लोगों से पैरों की ताकत छीन ली है। शरीर कम एक्टिव रहता है, लोग दफ्तर में बैठे और घर में लेटे रहते हैं, जिससे उनके पैरों का व्यायाम बहुत कम हो जाता है। यही कारण है कि मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और चलने फिरने में दिक्कत आती है। इस समस्या से बचने के लिए लोग जिम में लेग एक्सरसाइज करते हैं। हालांकि अगर आप बिना जिम जाए पैरों की मांसपेशियां, घुटने और टखने मजबूत करना चाहते हैं, तो ये योगासन कर सकते हैं जो कि आपकी रोजमर्रा की जि़ंदगी में फर्क ला सकते हैं।

मालासन

मालासन को अंग्रेजी में गारलैंड पोज कहते हैं, यह एक मध्यम श्रेणी का योगासन है। दिन भर दफ्तर में बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए मालासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस योगासन का नियमित अभ्यास शरीर की कई समस्याओं को दूर करने का काम करता है। मालासन पुराने समय की प्राकृतिक बैठने की मुद्रा है। इसमें पूरी तरह बैठें। एडिय़ां जमीन पर रखें और हाथ जोड़ें। यह आसन जांघ, पिंडली और हिप्स मजबूत बनाता है। घुटनों की जकडऩ कम करता है और पैरों की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने में सहायक है।

वीरभद्रासन

यह आसन जांघों, पिंडलियों और हिप्स को मजबूत करता है। वीरभद्रासन के अभ्यास के लिए एक पैर आगे, दूसरा पीछे रखें। आगे वाले घुटने को मोड़ें, हाथ ऊपर उठाएं और नजर सामने रखें। इस आसन को नियमित करने से जांघों की मांसपेशियां मजबूत, पैरों में स्थिरता और संतुलन आता है और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।

सेतु बंधासन

ब्रिज पोज लेग मसल्स के साथ लोअर बैक को भी सपोर्ट देता है। इसके अभ्यास से जांघ और हिप्स टोन होते हैं। ब्लड फ्लो बेहतर रहता है और पैरों में ऊर्जा आती है। इस आसन के अभ्यास के लिए शरीर की मुद्रा एक सेतु या ब्रिज जैसी बन जाती है। यह आसन आपकी कमर को भी सही शेप देने में लाभकारी होता है। इस आसन को करने से जांघों और पैरों में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है, जिससे पैरो को सही आकार मिलता है।

त्रिकोणासन

त्रिकोणासन पैरों के साथ-साथ शरीर के निचले हिस्से में लचीलापन बढ़ाता है। इसके अभ्यास से जांघ और पिंडली की स्ट्रेचिंग होती है। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर और पैरों की अकडऩ दूर होती है। इसके करने के लिए पैर फैलाएं। एक हाथ नीचे पैर की ओर और दूसरा ऊपर आसमान की ओर।

उत्कटासन

उत्कटासन उत्कट शब्द से बना है। वहीं अगर इसके अर्थ की बात की जाए तो इसका अर्थ उग्र यानी विशाल या तीव्र होता है। इस आसन को करने से सेहत को कई तरीके से फायदे हो सकते हैं। उत्कटासन के अभ्यास से थाई और ग्लूट्स को ताकत मिलती है। घुटनों को सपोर्ट और पैरों की थकान कम होती है। इसके अभ्यास के लिए घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे कुर्सी पर बैठ रहे हों। इस दौरान हाथ ऊपर रखें।

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