बंगाल में टीएमसी में मचा सियासी बवाल

  • काकोली के बाद शांतनु ने भी छोड़ी पार्टी
  • पार्टी की महिला शाखा के प्रमुख पद से काकोली ने दिया था त्यागपत्र

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में विधान चुनावों के परिणाम के बाद से ही घमासान मच गया है। सांसद काकोली घोष के पार्टी छोडऩे के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की काकोली दस्तीदार घोष द्वारा अपने सभी पदों से इस्तीफा देने के एक दिन बाद सामने आया है। 24 के आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले और भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए, शांतनु सेन ने पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को संबोधित अपने इस्तीफे में कहा कि वे अब अनैतिक कृत्यों पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
इस्तीफे में यह कहा गया कई मुश्किल दौर में मैं अलग-अलग विचारों से सहमत नहीं था, फिर भी मैंने कई विवादास्पद मुद्दों पर मीडिया में पार्टी के लिए खुलकर आवाज उठाई, जिसके लिए आम जनता ने अक्सर मेरी प्रशंसा की है। लेकिन मौजूदा हालात में, जब बंगाल की जनता ने आरजी कर मामले, अभया मामले और नौकरी के बदले रिश्वतखोरी जैसे कई अनैतिक कृत्यों और भ्रष्टाचार के कारण हमें नकार दिया है, तो अब मेरा मन किसी भी तरह से प्रवक्ता के रूप में उनका समर्थन करने को तैयार नहीं है। इसलिए, जनता के फैसले को ध्यान में रखते हुए, मैं तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना चाहता हूं। कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार करें और उसका सम्मान करें। हालांकि कई मुश्किल दौर में मैं अलग-अलग विचारों से सहमत नहीं था, फिर भी मैंने कई विवादास्पद मुद्दों पर मीडिया में पार्टी के लिए खुलकर आवाज उठाई, जिसके लिए आम जनता ने अक्सर मेरी प्रशंसा की है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी की महिला शाखा के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे पत्र में उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें एक साथी सांसद के दुव्र्यवहार से बचाने में विफल रही, जिसका उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से बनर्जी की ओर इशारा करते हुए जिक्र किया था। बनर्जी ने लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक के पद से भी उन्हें हटा दिया था। जहां एक ओर घोष दस्तीदार ने प्रमुख संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर पार्टी से अपनी दूरी बढ़ा ली है, वहीं दूसरी ओर उनके सहयोगी कल्याण बनर्जी के खिलाफ दायर शिकायत ने संकटग्रस्त तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक उथल-पुथल में एक नया मोर्चा खोल दिया है।

काकोली के आरोपो पर भडक़े कल्याण बनर्जी

कल्याण बनर्जी ने काकोली घोष के दुव्र्यवहार के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी शिकायत में देरी और मंशा संदिग्ध लगती है। बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि संसद में किसी भी घटना की सूचना तुरंत स्पीकर को दी जानी चाहिए, जिससे घोष के इरादों पर संदेह गहरा गया है। यह घटना टीएमसी के भीतर एक बड़े राजनीतिक विवाद की ओर इशारा करती है। बता दे स्पीकर को लिखे अपने पत्र में दस्तीदार ने कल्याण बनर्जी के खिलाफ हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनका व्यवहार महिला-विरोधी सोच को दर्शाता है और यह केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है। उन्होंने लिखा कि मैं एआईटीसी के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति चाहती हूं, जिन्होंने लोकसभा के अंदर बार-बार मेरा मौखिक रूप से अपमान किया है।

हार के बाद भी नहीं सीखा सबक, पार्टी अब बिखर जाएगी : सुखेन्दु राय

पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेन्दु शेखर रॉय ने संगठन के कामकाज पर खुले तौर पर सवाल उठाते हुए आंतरिक लोकतंत्र के पतन, संस्थागत भ्रष्टाचार और राजनीतिक परामर्श फर्म आईपीएसी के अत्यधिक नियंत्रण का आरोप लगाया है। पार्टी की स्थिति पर खुलकर बोलते हुए रॉय ने कहा कि उनका मानना है कि तृणमूल कांग्रेस विघटन की ओर बढ़ रही है क्योंकि चुनावी हार के बाद उसने आत्मनिरीक्षण नहीं किया है। रॉय ने कहा कि मुझे लगता है कि पार्टी का विघटन होगा। वे अपनी हार स्वीकार नहीं कर रहे हैं। रॉय ने आरोप लगाया कि पार्टी में अब आंतरिक बहस या असहमति की अनुमति नहीं है और दावा किया कि सभी निर्णय अब एकतरफा तरीके से लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कुछ बातें कहने की कोशिश की है, लेकिन हमारी पार्टी में चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं है। रॉय के अनुसार, पार्टी के भीतर निर्णय लेने की संरचना अत्यधिक केंद्रीकृत हो गई है। उन्होंने कहा कि यह एकतरफा है। केवल एक ही व्यक्ति की बात मानी जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं प्रभावी रूप से ध्वस्त हो गई हैं। अपने पहले के सोशल मीडिया पोस्ट का बचाव करते हुए, जिनमें उन्होंने मौजूदा स्थिति को अराजकता बताया था, रॉय ने कहा कि उनकी टिप्पणियां वास्तविकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि मैंने अराजकता के बारे में ट्वीट किया क्योंकि वास्तव में अराजकता ही थी। उनकी ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रॉय को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ सांसदों और बुद्धिजीवी आवाजों में से एक माना जाता रहा है।

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