बगावत बनी गले की फांस? जारी हुई नोटिस, 24 घंटे में बागियों को देना पड़ेगा जवाब!
सांसदों को जारी नोटिस में चीफ सेक्रेटरी अनिल देसाई ने कहा, "आपने अपनी पार्टी के संसदीय गुट के नेता और सांसद अरविंद सावंत या चीफ सेक्रेटरी के तौर पर मुझे अपने गायब रहने की कोई वजह नहीं बताई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में छह सांसदों ने बगावत कर दी। ये सांसद दिल्ली में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में नहीं पहुंचे, जबकि पार्टी व्हिप जारी किया गया था।
उद्धव गुट ने इन बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। कहा जा रहा है कि 24 घंटे का समय दिया गया। आपको बता दें कि पार्टी से बागी सांसदों को चीफ सेक्रेटरी अनिल देसाई ने व्हिप जारी होने के बाद भी बैठक में शामिल न होने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसके लिए सभी सांसदों को 24 घंटे का समय दिया गया है. आदेश में कहा गया है कि पार्टी व्हिप मिलने के बावजूद लोकसभा सांसदों की बैठक में मौजूद न रहने के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया जा रहा है. नोटिस में लिखा गया कि जरूरी मीटिंग का बताने के बावजूद आप इस बैठक से गायब थे.
सांसदों को जारी नोटिस में चीफ सेक्रेटरी अनिल देसाई ने कहा, “आपने अपनी पार्टी के संसदीय गुट के नेता और सांसद अरविंद सावंत या चीफ सेक्रेटरी के तौर पर मुझे अपने गायब रहने की कोई वजह नहीं बताई है. पार्टी ने इस मीटिंग में आपके गायब होने को गंभीरता से लिया है. यह पार्टी के आदेश का भी उल्लंघन है.
इसके साथ ही अनिल देसाई ने आगे कहा, “इसलिए, पार्टी के चीफ सेक्रेटरी के तौर पर, मैं यह ‘शो कॉज’ नोटिस जारी कर रहा हूं और आपको यह लेटर मिलने के चौबीस घंटे के अंदर इस पार्टी-विरोधी गतिविधियों के बारे में सफाई देने का निर्देश दे रहा हूं. नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई, और कहा गया है कि इसके अलावा अगर इस समय के अंदर आपकी तरफ से कोई सही जवाब या सफाई नहीं मिलती है, तो मैं मान लूंगा कि आपने अपनी मर्ज़ी से शिवसेना (UBT) पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आगे कहा, “यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत के संविधान के दसवें शेड्यूल के तहत आप अपने कामों के नतीजों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे.
इस मामले को लेकर शिंदे की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना कहा, ‘लोग आपको क्यों छोड़कर जा रहे हैं, इस पर आपको आत्मचिंतन करना चाहिए।’ उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी में मची भगदड़ के लिए जहां भाजपा और शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया, तो एकनाथ शिंदे ने शोले फिल्म में असरानी के एक डायलॉग को याद करते हुए कहा, ‘वह कह रहे हैं कि जिसे जाना हो, छोड़कर चला जाए।
यानी आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ। अब वह पीछे घूमकर देखते हैं, तो कोई बचा ही नहीं। लोग उन्हें क्यों छोड़कर जा रहे हैं, इस पर उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए।’ शिंदे एक शेर के जरिए भी उद्धव पर यह कहकर तंज कसा कि ‘तुम्हारे पांव के नीचे जमीन नहीं, मगर तुम्हें इस बात का यकीन नहीं।’ शिंदे ने कहा, ‘अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब मैं-मैं कहकर राजनीति नहीं की जा सकती। अब हम-हम का दौर आ गया है। मैं-मैं कहने वाले रावण की भी लंका ध्वस्त हो गई थी।’
वहीं इससे पहले शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी में नई बगावत के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि अगर समर्थकों को उनकी लीडरशिप पर भरोसा नहीं है, तो वह पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर जा रहे सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को दिए पत्र में कहा है कि उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की बात चल रही है। इसलिए वह शिवसेना (यूबीटी) छोड़ शिवसेना में जाना चाहते हैं। लेकिन सोचने की बात है कि जब हम 30 साल भाजपा के साथ रहकर उसमें विलीन नहीं हुए, तो कांग्रेस में क्या विलीन होंगे। हमारी तो आधी उम्र कांग्रेस को विरोध करते बीती है।
उद्धव ठाकरे हमेशा से बाल ठाकरे की असली विरासत के रखवाले रहे हैं। उन्होंने कभी सत्ता के लालच में पार्टी को बेचा नहीं। 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की, तब भी उद्धव जी ने सच्चाई का साथ दिया। अब फिर छह सांसदों की बगावत हो रही है। ये सांसद हैं – संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आश्टीकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दिना पाटिल और ओमराजे निंबालकर।
ये लोग पार्टी की बैठक से गायब रहे और लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर अलग गुट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उद्धव गुट का कहना है कि ये सब BJP की साजिश है। पैसा, सत्ता और धमकी के बल पर इन सांसदों को तोड़ा जा रहा है।
BJP महाराष्ट्र में अपनी सत्ता बचाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। 2022 में शिंदे बगावत कराकर उद्धव सरकार गिराई गई। अब फिर वही खेल दोहराया जा रहा है। बागी सांसदों पर आरोप है कि उन्हें करोड़ों रुपये दिए गए। उन्हें जयपुर जैसे सुरक्षित जगह पर छिपाकर रखा गया ताकि वे उद्धव गुट की बैठक में न पहुंच सकें। वहीं आपको बता दें कि यह BJP की पुरानी आदत है।
जहां भी उनकी सरकार नहीं होती, वहां तोड़-फोड़ शुरू कर देते हैं। महाराष्ट्र में असली शिवसेना उद्धव ठाकरे के साथ है, जो हिंदुत्व के साथ-साथ आम आदमी की लड़ाई भी लड़ती है। BJP केवल सत्ता चाहती है, विकास नहीं। उद्धव जी ने MVA गठबंधन में रहकर भी महाराष्ट्र के हितों की रक्षा की। लेकिन BJP को यह बर्दाश्त नहीं हुआ।
बाल ठाकरे ने शिवसेना बनाई तो सिर्फ सत्ता के लिए नहीं। उन्होंने मराठी मानुष की आवाज बुलंद की, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और हिंदुत्व का प्रचार किया। उद्धव ठाकरे उसी रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कभी सहयोगी दलों को धोखा नहीं दिया। लेकिन BJP ने बार-बार तोड़ने की कोशिश की।
अब ये बागी सांसद कह रहे हैं कि उद्धव गुट कांग्रेस के साथ मर्ज होने वाला है। यह सरासर झूठ और BJP की प्रोपेगैंडा है। उद्धव गुट ने हमेशा कहा है कि वे असली शिवसेना हैं। कांग्रेस या किसी के साथ मर्जर की कोई बात नहीं। बागी सांसद खुद सत्ता के लालच में शिंदे गुट में जाना चाहते हैं, जो BJP की गोद में बैठा है।
भले ही शिवसेना UBT के कुछ बागी नेता बगावत कर गए हों लेकिन आज भी संजय राउत जैसे मजबूत नेता ने साफ कहा है कि ये बागी सांसद पार्टी की हिदायतों का उल्लंघन कर रहे हैं। पार्टी ने नोटिस जारी करके उनसे जवाब मांगा है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं आया तो कानूनी कार्रवाई होगी और अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू होगी। यह सिर्फ पार्टी अनुशासन की बात नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के लोगों के विश्वास की रक्षा की लड़ाई है। लोग इन सांसदों को वोट देकर भेजे थे, BJP के लिए नहीं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की जनता BJP की इन हरकतों से तंग आ चुकी है। लोग जानते हैं कि उद्धव ठाकरे सच्चे नेता हैं। उन्होंने संकट के समय में भी हिम्मत नहीं हारी। COVID काल में, बाढ़-भूकंप में उन्होंने लोगों के साथ खड़े रहकर काम किया। जबकि BJP केवल फोटो खिंचवाने और आरोप लगाने में लगी रहती है।शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ पर उद्धव गुट ने अलग से कार्यक्रम किए।
बागी सांसद वहां भी नहीं पहुंचे। यह दिखाता है कि उनकी नीयत साफ नहीं है। BJP केंद्र में सत्ता में है, फिर भी महाराष्ट्र में स्थिर सरकार नहीं चला पा रही। इसलिए तोड़-फोड़ पर उतर आई है। एकनाथ शिंदे गुट पहले ही BJP के इशारे पर काम कर रहा है। अब ये नए बागी भी उसी रास्ते पर जा रहे हैं। लेकिन असली शिवसेना कार्यकर्ता उद्धव के साथ मजबूती से खड़े हैं।
अब नोटिस का समय चल रहा है। बागी सांसदों को जवाब देना है। अगर उन्होंने BJP के साथ मिलकर गद्दारी की तो कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उद्धव गुट मजबूत है। कार्यकर्ता, समर्थक और आम जनता उनके साथ है। यह लड़ाई सिर्फ पार्टी की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की पहचान, मराठी अस्मिता और लोकतंत्र की है। BJP जैसे बड़े दल छोटे दलों को तोड़कर अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि सच्चाई आखिर में जीतती है।



